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मैदानी अफसरों की मिलीभगत से भूमाफिया ने सरकारी जमीनों पर तनवा दिए मकान

नगर निगम को आवास निर्माण के लिये दी गई जमीन पर अभी भी बन रहे मकान, नोटिस तक नहीं हो सकी जारी  

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The land mafia built houses on government land

The land mafia built houses on government land

सतना। माफियाराज के विरुद्ध प्रदेश सरकार ने भले ही अभियान प्रारंभ कर दिया है लेकिन जिले में अभी तक इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही है। हालात यह है सरकारी जमीनों से अवैध निर्माण हटाने की जो विहित प्रक्रिया होनी चाहिए वह मैदानी अफसरों ने नहीं की। ऐसे में मौके से बुल्डोजरों को बिना कार्रवाई के खाली लौटना पड़ रहा है। ऐसा ही मामला नगर निगम क्षेत्र में रिलायंस पेट्रोल पंप के पीछे स्थित सरकारी आराजी 1285 में दो दर्जन से ज्यादा पक्के मकान बन चुके हैं। आधा दर्जन के लगभग निर्माण कार्य अभी हाल में प्रारंभ किये गये हैं। हद तो यह है कि निगम को इन आराजी का जो अंश रकवा एमआईजी भवन बनाने के लिये दिया गया है वहां भी निर्माण चालू हैं और निगम के अफसर इस पर चुप्पी साधे रहे। आज जब यहां अमला बुल्डोजर लेकर पहुंचा तो पता चला कि अभी किसी को नोटिस तक जारी नहीं है। ऐसे में बिना कार्रवाई के वापस लौटना पड़ा। हालांकि इस दौरान एक अवैध कॉलोनी की संरचना को हटाया गया।

मिली जानकारी के अनुसार सतना-रीवा रोड स्थित रिलायंस पेट्रोल पंप के पीछे शासकीय आराजी 1285 स्थित है। जो आवासीय विद्यापीठ के पीछे स्थित नाले तक गई हुई है। इस जमीन को भू-माफिया ने राजस्व अमले की मिलीभगत से शासकीय से निजी करवा लिया था। इसके साथ ही यहां जमीनों की प्लाटिंग करते हुए कई प्लाट बेच भी डाले थे। इधर मामला उजागर होने पर बाद में यह जमीन शासकीय हो गई। हालांकि शासकीय होने के पहले लगभग 11 लोगों ने यहां अपने मकान बना लिये थे। आज की स्थिति में यहां 22 के लगभग पक्के मकान बन चुके हैं और आधा दर्जन के लगभग मकान हाल में निर्माणाधीन है। स्थानीय लोगों ने बताया कि यह जमीन 2011 में रामस्वरूप कुशवाहा के नाम थी। इसके बाद इस जमीन को महेन्द्र कुशवाहा, मुचकुन्द पाण्डेय और पिंट गुप्ता ने हमें बेचा था। उस वक्त जमीन निजी स्वत्व की थी। बाद में जांच के बाद यह जमीन शासकीय घोषित कर दी गई। हालांकि शासकीय घोषित होने से पहले ही यहां 11 लोगों ने निर्माण करवा लिये थे। इस दौरान यहां कार्रवाई करने पहुंचे एसडीएम ने कहा कि वर्तमान में यह शासकीय जमीन है और कोई भी निर्माण अवैध है। तब लोगों ने बताया कि इस मामले में स्टे है।

कर रहे न्यायालय की अवमानना

जब लोगों ने स्टे की बात कही तो एसडीएम पीएस त्रिपाठी ने संबंधितों से आदेश मांगा। जिसमें कमिश्रर के यहां प्रकरण सुनवाई में होना पाया गया तथा इस मामले में हाईकोर्ट से डायरेक्शन हैं कि कमिश्रर दो माह में प्रकरण निराकृत करें और तब तक के लिये यथास्थिति बनाए रखें। इस आधार पर यहां जिन लोगों ने स्टे के बाद भी निर्माण किया है वे न्यायालय की अवमानना के तो दोषी हैं ही साथ ही हालिया स्थिति में शासकीय जमीन में अवैध निर्माण के भी दोषी हैं। एसडीएम ने चेताया कि अगर अब कोई भी निर्माण हुआ तो कार्रवाई की जाएगी। साथ ही सभी निर्माण तत्काल रोकने के निर्देश दिए।
इस दौरान तहसीलदार मानवेन्द्र सिंह व मैदानी राजस्व अमला भी रहा। हालांकि इस दौरान यहां एकाध बाउण्ड्री और हाल में निर्मित की जा रही नींव के काम को निगम के अमले ने धराशायी किया।

निगम के अफसर करवा रहे अवैध निर्माण

यहां मैदानी राजस्व अमले ने बताया कि सरकारी आराजी 1285 रकवा 16 एकड़ में से 5 एकड़ जमीन का आवंटन नगर निगम को एमआईजी भवन निर्माण के लिये किया गया है। बताया कि जब जमीन का आवंटन किया गया था उस वक्त निगम के अफसर रोजल प्रताप सिंह को एक भवन निर्माण दिखाया था और कहा था कि यह अवैध तरीके से बन रहा है। उस वक्त तक लेन्टर लेबल तक काम हुआ था। लेकिन आज की स्थिति यहां उस भवन की पूरी छत ढल गई है। निगम के अमले के सामने यह जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि अभी भी निगम को जो जमीन आवंटित है और स्टे है इसके बाद भी निर्माण हो रहा है तो स्पष्ट है कि निगम के अफसर मिले हुए हैं। अगर ये अपनी जमीन नहीं बचा सकते हैं तो इनसे क्या उम्मीद की जाएगी। इस दौरान निगम का मैदानी अमला मुस्कुराते हुए खड़ा रहा।

नहीं दी कोई नोटिस

न्यायालय के स्टे के बाद भी यहां अवैध निर्माण होने पर भी अभी तक इन्हें कोई भी नोटिस निगम की ओर से नहीं दी गई और न ही राजस्व विभाग ने कोई नोटिस दी। निगम के पास तो यह तक जानकारी नहीं थी कि यहां उनकी अपनी जमीन में कितने निर्माण है। जबकि नियमानुसार पजेशन लेने के वक्त ही यह प्रक्रिया पूरी कर ली जानी चाहिए थी।

अवैध कालोनी का गलत चिन्हांकन

नगर निगम ने रिलायंस पेट्रोल पंप के पीछे विजय अग्रवाल की अवैध प्लाटिंग को चिन्हिंत किया था। लिहाजा एसडीएम और तहसीलदार की मौजूदगी में यहां प्लाटिंग के लिये बनाई गई रोड को निगम के अमले ने उखाड़ दिया। इसी दौरान निगम अमले की अवैध कालोनी की सूची में इससे लगा एक मकान और बाउण्ड्री भी शामिल बताई गई थी। कलेक्टर और निगमायुक्त को इसे कालोनी का हिस्सा बताते हुए तोडऩे की अनुमति भी ले ली गई थी। जिस पर भू-स्वामी ने कलेक्टर और निगमायुक्त को दस्तावेज प्रस्तुत करते हुए बताया कि उसने संबंधित से कोई भूखंड नहीं बल्कि एग्रीकल्चर लैण्ड ली थी। जिसका डायवर्सन कराने के बाद निगम में नक्शा पास करने के लिये दिया। जिसे अवैध कालोनी का हिस्सा बता कर बिना परीक्षण निरस्त कर दिया गया। जो नियम विरुद्ध तरीके से निरस्त था। इसके बाद निगमायुक्त से मिलने पर ईई एसके सिंह को समय सीमा में प्रकरण निर्णीत करने निर्देश दिए गए लेकिन सिंह मामले पर चुप्पी साधे बैठे रहे। यह जरूर है कि बिना नक्शा के निर्माण किया गया जिसका अर्थदण्ड भरा जाएगा। निगमायुक्त ने भी सभी दस्तावेज देखने के बाद बाउण्ड्री गिराने की कार्रवाई रोक दी। लेकिन इस घटना से स्पष्ट हो गया है कि निगम का अमला और अफसर मनमानी तरीके से माफियाराज के अभियान पर अपनी दुकान खोलने की भी तैयारी कर रहे हैं। सर्किट हाउस के बाद यह लगातार दूसरा मामला सामने आया है।

पुलिस ने नहीं दर्ज की एफआईआर

सरकारी आराजी को फर्जी तरीके से बेचने के मामले में कोलगवां पुलिस ने पीडि़तों की एफआईआर दर्ज नहीं की है। हालांकि यह बात आराजी क्रमांक 1285 में फर्जीवाड़े के शिकार होकर बना चुके लोगों ने दोपहर में एसडीएम को भी बताई थी कि वे लोग पहले भी कोलगवां थाने जा चुके हैं लेकिन पुलिस एफआईआर तो दूर शिकायत तक नहीं ले रही है। इस पर एसडीएम ने कहा कि अभी जाइये और कहिएगा कि हमने कहा है। साथ ही बताया कि एसपी भी निर्देश दे चुके हैं। इस बार एफआईआर दर्ज हो जाएगी। इस पर जब संबंधित जन कोलगवां थाने पहुंचे तो पहले तो शिकायत लेने से ही इंकार कर दिया। बाद में उनकी शिकायत लेकर चलता कर दिया। शिकायतकर्ताओं ने बताया कि उन्होंने पुलिस को दिए आवेदन में बताया है कि जमीन 1285/1/ड़/2 करीब 5 एकड़ जो कृपालपुर मौजा में है, हम लोगों ने कॉलोनाइजर महेन्द्र कुशवाहा निवासी संग्राम कालोनी, रामस्वरूप कुशवाहा उचेहरा, मुचकुन्द पाण्डेय सतना, ज्ञानचंद्र गुप्ता सतना, सोनू कुशवाहा संग्राम कालोनी, सोनू मिश्रा सतना तथा पिंटू गुप्ता निवासी नई बस्ती से जमीन खरीदी थी। जिस वक्त जमीन खरीदी गई उस वक्त यह शासकीय नहीं थी। 2016 में यह जमीन शासकीय हो गई। इस पर इन विक्रेताओं से संपर्क कर पैसा लौटाने या कहीं और प्लाट मकान देने कहा। लेकिन ये आश्वासन देते रहे कि यह गलत दर्ज हो गई है इसमें सुधार करवा रहे हैं। लेकिन अभी तक मध्यप्रदेश शासन ही है। हमारे साथ फर्जीवाड़ा करने वाले इन लोगों पर प्रकरण दर्ज किया जाए। शिकायतकर्ताओं में कृष्णमणि मिश्रा, रजनीश गुप्ता, शांति त्रिपाठी, दयालु शुक्ला, कैलाश ताम्रकार, रोशललाल सेन, नीलेश त्रिपाठी, विनोद द्विवेदी, श्रीकृष्ण द्विवेदी, शिवानी विश्वकर्मा, अमित पाण्डेय, विकास द्विवेदी, कन्हैया लाल गुप्ता और राजेश गुप्ता हैं। इन्होंने बताया कि राजस्व विभाग इस मामले में कुछ कर नहीं रहा है और पुलिस भी एफआईआर दर्ज नहीं कर रही है। ऐसे में हमने अपनी जिंदगी भर की जो जमापूंजी इस फर्जीवाड़े में खर्च कर दी उसका न्याय कैसे मिलेगा।

निगम अमले की खानापूर्ति

इस पूरे अभियान में यह जानकारी सामने आ रही है कि निगम के अफसरों ने अवैध कालोनी और भवनों की जो सूची तैयार की है वह पुरी पुख्ता नहीं है। जो है भी उसमें अभी पर्याप्त होम वर्क नहीं हुआ है। इतना ही नहीं अभियान के तहत अफसरों को जो निर्देश निगमायुक्त दे रहे हैं वह लीक भी हो रहे हैं। ऐसे में शहर में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है। ऐसे में आला अधिकारी अब खुद ही मौका मुआयना के साथ परीक्षण शुरू कर चुके हैं। माना जा रहा है कि 28 दिसंबर के बाद ही ऐसे मामलों में कोई ठोस कार्रवाई की शुरूआत हो सकेगी।