
The story of maihar shardamandir
सतना। मध्यप्रदेश के सतना जिला स्थित मैहर त्रिकूट पर्वत पर विराजमान मां शारदा यूं तो हजारों भक्तों पर अपनी कृपा वर्षा चुकी है। लेकिन आज भी एक ऐसी दंतक कथा है जिसको सुनने के लिए लाखों भक्त बेताब रहते है। पत्रिका की बातचीत में मुख्य पुजारी देवी प्रसाद ने बताया कि 52 शक्ति पीठों में मैहर शारदा ही ऐसी देवी जहां अमरता का वरदान मिलता है। मां की कृपा कब किस भक्त पर हो जाए ये कोई नहीं जानता है।
हालांकि माता की एक दर्जन दंतक कथाएं सदयुग, द्ववापर, त्रेता एवं कलयुग में सुनाई जा रही है। देवी प्रसाद ने कहा कि हमारी चौथी पीढ़ी माता की सेवा कर रही है। मैट्रिक की पढ़ाई करने के बाद मैं कई बार पुलिस में सेवा करना चाहा लेकिन माता के बुलावा के कारण नहीं कर पाया। सन् 1967 में हमारे पिता ने माता की पूजा-अर्चना करने का अवसर दिया। उस समय त्रिकूट पर्वत पर वीरान जंगल था।
आल्हा को अमरता का वरदान
मैंने भी कई कथाएं आल्हा-उदल और पृथ्वी राज सिंह चौहान की सुनी थी। मुझे भी लगा की माता ने आल्हा को अमरता का वरदान दिया है। आज भी कई भक्त कहते है कि रोजाना सुबह घोड़े की लीद और दातून पड़ी रहती है। वहीं कई लोग दावा कर रहे है कि माता की रोजाना पहली पूजा आल्हा ही करता है। लेकिन मैं इन सब बातों का दावा नहीं कर सकता।
चढ़े थे माता के दर पर पुष्प
हां 50 वर्षों की पूजा के दौरान एक बार मुझे एहसास हो चुका है। एक बार मैं पूजा कर घर चला गया। सुबह मंदिर का पट खोलकर पूजा की शुरुआत की तो पहले से ही पुष्प माता के दर पर चढ़े थे। फिर भी मन नहीं माना तो माता की चुनरी को उठाया तो अंदर भी पुष्प दिखाई दिए। तब से हमें भी एहसास हुआ की मां अजर-अमर है।
मां को अर्पण जीवन
यह जरूर भक्तों को मन चाहा वरदान देती है। देवी प्रसाद ने बताया कि मैहर वाली शारदा की मुझसे पहले पिता जी हमारे दादा-परदादा पूजा कर चुके है। मैं भी 50 वर्ष मां की सेवा में बिताने के बाद माता का भक्त हो चुका हूं अब जो भी मेरा जीवन बचा है वह भी माता को अपज़्ण कर दूंगा। दुनिया की माया मोह छोड़ दिन रात माता की पूजा में लीन रहता हूं।
70 वर्ष बाद गाता हूं मनचाहा गाना
मंदिर के पुजारी ने बताया कि एक साल पहले अचानक मन में गीत गुनगुनाने लगा। फिर कुछ देर बाद मैं गाने लगा। आज स्टेज तक में खड़ा होकर कोई भी देवी गीत गा सकता हूं। अब रोजाना सुबह-शाम की पूजा में भक्ति गीत गाकर माता की आरती करता हूं। भक्त भी मेरे द्वारा गाई जाने वाली आरती को सुनने के लिए बेताब रहते है।
Published on:
23 Sept 2017 11:07 am
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