सतना। प्रभु श्रीराम की तपोभूमि सरभंगा जहां प्रभु ने माता सीता और भ्राता लक्ष्मण के सात वनवास बिताया था, वहां इन दिनों सड़कों पर बाघ घूम रहे हैं। आए दिन राहगीरों को बाघ आसानी से नजर आ रहे हैं। दरअसल सरभंगा वन क्षेत्र में इन दिनों दो दर्जन के लगभग बाघ हो गए हैं। इस वन भूमि में उच्च गुणवत्ता का लेटराइट मिलने से खनिज माफिया वन विभाग की मिली भगत से घने जंगलों में खनन कर रहा है। खनन में लिप्त भारी वाहनों की आवाज और रोशनी से बाघ घबरा कर अब जंगल से बाहर निकल रहे हैं। हालांकि वन विभाग ने इस पूरे क्षेत्र को अभयारण्य घोषित करने का प्रस्ताव राज्य शासन को भेज चुका है। जहां से सांसद और विधायक से सहमति पत्र मांगा गया है लेकिन इनके द्वारा अभी तक सहमति नहीं दिए जाने से अभयारण्य घोषित होने की प्रक्रिया ठंडे बस्ते में पड़ी हुई है। बताया जा रहा है कि सरभंगा में अब बाघों के लिए जल्द ही टेरीटरी का भी संकट होगा जिससे बाघों में क्षेत्र के लिए लड़ाई होने से इंकार नहीं किया जा रहा है। यह वीडियो सरभंगा क्षेत्र के अमुआ बांध के समीप धारकुण्डी आश्रम के रास्ते का है।