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मनरेगाः प्रदेश के 10 लाख मजदूरों का 1 साल में 1.18 अरब रुपए का ट्रांजेक्शन हो गया फेल

2021-22 का अकेले सतना का 2.10 करोड़ का भुगतान असफल पांच साल पुरानी मजदूरी के भुगतान का भी निराकरण लंबित

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मनरेगाः प्रदेश के 10 लाख मजदूरों का 1 साल में 1.18 अरब रुपए का ट्रांजेक्शन हो गया फेल

MNREGA: Transaction worth Rs 1.18 billion failed in 1 year for 10 lakh laborers of Madhya Pradesh

सतना. मनरेगा में काम करने वाले मजदूरों को उनकी मजदूरी का समय पर भुगतान नहीं हो पा रहा है। जिम्मेदारों द्वारा इनके खाते गलत दर्ज करने या अन्य त्रुटियों के कारण महीनों तक उनकी मजदूरी नहीं मिल पा रही है। इसकी वजह है कि इनकी मजदूरी के ऑन लाइन किये जाने वाले भुगतान का रिजेक्ट हो जाना। मजदूरी के भुगतान रिजेक्ट होने का मामला छोटा मोटा नहीं है। अकेले वित्तीय वर्ष 2021-22 में प्रदेश के 10,19,311 मजदूरों का 1,18,44,07,478 रुपये का भुगतान रिजेक्ट हो गया था। जिसमें सतना जिले के 12,560 मजदूरों की 2,10,22,256 रुपये की मजदूरी का भुगतान ट्रांजेक्शन फेल होने के कारण अटक गया था। इससे भी भयावह पक्ष तो यह है कि अभी भी प्रदेश के 23,531 मजदूरों का 2,76,34,604 रुपये का भुगतान दो साल बाद भी नहीं हो सका है। इतना ही नहीं कई जिलों में तो 5 साल भी फेल ट्रांजेक्शन का निराकरण नहीं होने से मजदूरों की मजदूरी नहीं मिल सकी है। अब एक बार फिर से आयुक्त मनरेगा सूफिया वली फारुखी ने सभी जिला पंचायत सीईओ को पत्र लिखकर लंबित भुगतानों का निराकरण करने कहा है।

मनरेेगा के तहत कार्य करने वाले मजदूरों के भुगतान के लिए कार्य स्थल की जियो टैगिंग आवश्यक है। इसके बाद कराए गए कार्य की पूरी जानकारी फीड की जाती है और फिर जनपद स्तर से ही संबंधित मजदूरों के खाते में मजदूरी का पैसा हस्तांतरित किया जाता है। धनराशि हस्तांतरित करते समय खाता नंबर, आईएफएससी कोड या अन्य किसी तरह की गड़बड़ी होने पर ट्रांजेक्शन रिजेक्ट हो जाता है और धनराशि खाते में नहीं पहुुंचती। लेकिन अधिकारियों की ओर से इसे समय से संज्ञान नहीं लिया जाता है। जबकि शासन की ओर से यह प्रावधान है कि रिजेक्टेड ट्रांजेक्शन के कारणों की पड़ताल तत्काल की जाकर इसमें सुधार किया जाए। इसके बाद तुरंत मजदूरों के खाते में धनराशि का हस्तांतरण किया जाए। लेकिन स्थिति यह है कि विगत पांच सालों से पूरी तरह मजदूरी के भुगतान का मामला निराकृत नहीं हो सका है। ऐसा भी नहीं है कि राज्य स्तर से इस संबंध में चेताया नहीं जा रहा है लेकिन जिला स्तर पर इसमें हीलाहवाली की जाती है।

इन जिलों में 5 साल से लंबित है भुगतान

चार जिलों में वर्ष 2018-19 में रिजेक्ट हुए मजदूरी के भुगतान के मामले आज तक लंबित है और मजदूरों की उनकी मजदूरी का भुगतान नहीं हो सका है। इनमें सागर, अनूपपुर, सिवनी और राजगढ़ शामिल हैं। इसी तरह वर्ष 2019-20 के भुगतान जिन जिलों में लंबित हैं उनमें सागर, सिवनी, अनूपपुर, दमोह, खरगोन, विदिशा, डिंडोरी, देवास और राजगढ़ शामिल है। वर्ष 2020-21 से 20 जिलों में मजदूरी का भुगतान लंबित है। इसमें सीहोर और सिवनी जिलों में तो एक लाख रुपये से ज्यादा की मजदूरी लंबित है। रीवा संभाग के सतना जिले का भी भुगतान लंबित है। हालांकि इस संबंध में बताया गया कि ये वे पंचायतें थी जो नगरीय निकाय में शामिल हो गई थीं। इस वजह से तकनीकि वजह से इनके मामले लंबित है।

2021-22 में सभी जिलों में भुगतान लंबित

जानकारी के अनुसार 2021-22 में प्रदेश के सभी 51 जिलों में बड़े पैमाने पर मजदूरी का भुगतान रिजेक्ट हुआ है। अकेले रीवा संभाग की स्थिति अगर देखें तो सतना जिले में 12560 मजदूरों का भुगतान रिजेक्ट हुआ था हालांकि यहां निराकरण कर सभी के खाते में भुगतान कर दिया गया। रीवा में 1.91 करोड़ के 13314 ट्रांजेक्शन फेल हुए। जिसमें से अभी भी 6.99 लाख रुपये के 422 ट्रांजेक्शन का निराकरण नहीं हुआ है। सीधी में 1.87 करोड़ रुपये के 15240 ट्रांजेक्शन फेल हुए थे जिसमें से अभी भी 4.50 लाख रुपये के 329 ट्रांजेक्शन का भुगतान लंबित है। सिंगरौली में 1.60 करोड़ रुपये के 10278 ट्रांजेक्शन असफल हुए थे, जिसमें से 12.59 लाख रुपये के 656 ट्रांजेक्शन का अभी तक भुगतान नहीं हुआ है।

इनकी है लापरवाही

श्रमिकों के खाते कलेक्टर करके उन्हें सही तरीके से फीड करने की जिम्मेदारी जीआरएस की होती है। इसके बाद इनका सत्यापन कर फ्रीज करने का काम जनपद के सहायक लेखाधिकारी का होता है। लेकिन इनके द्वारा जिम्मेदारी से काम नहीं करने के कारण यह स्थिति बनती है। अगर भुगतान असफल होता है तो तो लेखाधिकारी काम है कि वह इसे निराकृत करे। लेकिन यहां भी लापरवाही की जा रही है।

''सतना जिले के सभी असफल भुगतान सभी करते हुए मजदूरों के खाते में धनराशि भेजी जा चुकी है। सभी जिम्मेदारों को चेताया भी गया है कि खाते सही तरीके से फीड और फ्रीज किए जाएं'' - डॉ परीक्षित झाड़े, जिपं सीईओ