
Urea crisis deepens, farmers line started
सतना. अब जबकि गेहूं की बोनी प्रारंभ हो चुकी है और किसानों को यूरिया की आवश्यकता है ऐसे में जिले में यूरिया का संकट गहराने लगा है। किसानों को शासकीय संस्थाओं में तय लिमिट में यूरिया मिल रही है तो निजी संस्थाओं में यूरिया बढ़ी दरों पर मिल रही है। कुछ निजी दुकानदार अभी अपने गोदामों में यूरिया भंडारित करके रखे हैं और दुकानों में यूरिया की उपलब्धता नहीं दिखा रहे हैं। जिससे किसानों की लाइन लगना शुरू हो गई है।
समितियों में खाद नहीं
उधर सहकारी समितियों में भी खाद उपलब्ध नहीं है। समितियों का पुराना 17 करोड़ का बकाया होने से मार्कफेड ने उन्हें खाद देने से हाथ खड़े कर दिये हैं। ऐसे में गांवों में भी यूरिया की उपलब्धता नहीं है। मौजूद हालात में डबल-लॉक में ही खाद आसानी से उपलब्ध है। लिहाजा ग्रामीण क्षेत्रों से खाद लेने के लिये किसान डबललॉक केन्द्रों में पहुंच रहे हैं और यहां लाइन लगनी शुरू हो गई है।
नगद बिक्री हो सकता है हल
उधर किसानों का कहना है कि अगर समितियों का पुराना बकाया है लिहाजा ऐसी स्थिति में प्रशासन समितियों से खाद की नगद बिक्री की व्यवस्था करें। इससे किसानों को अनावश्यक खाद लेने के लिये इधर उधर नहीं भटकना पड़ेगा और डबल लॉक केन्द्रों में मारामारी भी नहीं होगी।
Published on:
03 Dec 2019 01:31 am
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