
veteran congress leader sriniwas tiwari died at 93 in delhi hospital
सतना। विंध्य को देश के राजनीतिक नक्शे में नई पहचान दिलाने वाले जनता के 'दादा' अब नहीं रहे। किसान, मजदूरों का हक दिलाने के लिए सामंतवाद के खिलाफ लड़ाई लडऩे वाले श्रीनिवास तिवारी अब इतिहास बन चुके हैं। लेकिन, उनसे जुड़ा प्रदेशभर में चर्चित चुनावी नारा 'दादा न होय दऊ आय, वोट न देहा तऊ आय' हमेशा-हमेशा के लिए अमर हो गया है।
एक साधारण किसान परिवार में जन्मे 'दादा' ने न सिर्फ रीवा, बल्कि विंध्य के विकास में अपना जो योगदान दिया वह अविस्मरणीय रहेगा। रीवा को विकास के रास्ते पर लाने और देश में अलग पहचान दिलाने वाले पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्रीनिवास तिवारी ने विंध्य प्रदेश को कई सौगातें दीं। उनका जन्म 17 सितंबर 1926 को तिवनी ग्राम के किसान मंगलदीन तिवारी के घर हुआ था।
माता कौशिल्या देवी थीं। सतना जिले के झिरिया ग्राम के रामनिरंजन मिश्र की बेटी श्रवण कुमारी से विवाह हुआ। उनके दो पुत्र अरुण एवं सुंदरलाल तिवारी हुए। अरुण अब नहीं रहे। सुंदरलाल गुढ़ से विधायक हैं। अरुण के बड़े पुत्र विवेक तिवारी जिपं सदस्य रह चुके हैं। छोटे पुत्र वरुण युवा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष हैं। श्रीनिवास ने शिक्षा मनगवां बस्ती के विद्यालय से आरंभ की। सन 1950 में दरबार कालेज रीवा से एलएलबी एवं 1951 में हिन्दी साहित्य से एमए किया। छात्र जीवन से राजनीति की।
जब विस में बना लिया था सचिव
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्रीनिवास तिवारी वर्ष १९९३ में पहली बार जब विस अध्यक्ष बने तो कटनी के तत्कालीन नगर पालिक अधिकारी रहे सत्यनारायण चतुर्वेदी को विधानसभा में सचिव बना लिया था। तत्काल प्रभाव से कमलाकांत को कार्यक्रम अधिकारी बना लिए थे। राजस्व प्रकरणों के लिए जगजाहिर तिवारी को जिम्मेदारी सौंपी थी, खास बात यह रही कि पूर्व अध्यक्ष तत्कालीन कलेक्टर को राजस्व प्रकरणों के निर्देश के बाद आरआरई रहे जगदीश तिवारी से समझने के लिए कहते थे।
राजनीति के 'पंडित' थे श्रीयुत
- चुनाव नहीं लडऩे की उम्र में चुनाव लड़े और जीता, मामला हाई कोर्ट पहुंचा जहां कुंडली लगाकर उम्र साबित की।
- पहले चुनाव में विंध्यप्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष यादवेंद्र सिंह से लड़े, वह जीतते तो सीएम होते। उन्हीं से राजनीतिक सीख चुनाव के समय भी लेते रहे।
- स्वास्थ्य मंत्री रहते शिक्षा विभाग की फाइल में हस्ताक्षर कर दिया। सवाल उठा तो बोले कैबिनेट मंत्री की शपथ ली है, किसी एक विभाग की नहीं।
- मुख्यमंत्री रहे अर्जुन सिंह के खिलाफ आवाज उठाते हुए कहा कि वह भी मंत्री की तरह विधायक हैं, सब कुछ नहीं हो सकते।
- विधानसभा अध्यक्ष रहते कांग्रेस पार्टी के पदाधिकारी भी रहे, कहा कि पार्टी की वजह से विधायक बना और विधानसभा अध्यक्ष। ऐसा करने वाले इकलौता विधानसभा अध्यक्ष रहे।
- देश में पहली बार विधानसभा के भीतर मुख्यमंत्री प्रहर कार्यक्रम शुरू किया, जिसमें सीएम को अनिवार्यरूप से जवाब देना होता था।
- दस वर्ष के विधानसभा अध्यक्ष कार्यकाल में विधायक डॉ. सुनीलम के अलावा किसी पर मार्शल का उपयोग नहीं किया।
चर्चा में रहे तिवारी के यह बयान
- विंध्य प्रदेश की जनता का मौलिक अधिकार है कि वह अपने भाग्य का निर्णय कर सकें।
- अर्जुन सिंह से मतभेद था, मनभेद नहीं।
- जवानी उम्र से नहीं भावनाओं से आंकी जाती है।
- हमारी सहमति से प्रत्याशी चयन नहीं तो उसके लिए वोट नहीं मांग सकता।
- राजीव गांधी की सिरमौर चौराहे की प्रतिमा को तोड़ा तो अपने दीनदयाल को नहीं बचा पाएगी भाजपा।
- हां प्रदेश में कांग्रेस की समानांतर अमहिया सरकार है और मैं उसका सीएम हूं।
- तिवारी ने आरोप लगाते हुए कहा था कि भाजपा सरकार से मिली भगत से काम कर रहे कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष।
सफरनामा
- जन्म-17 सितंबर 1926
- जन्म स्थान- ग्राम शाहपुर ननिहाल
- गृहग्राम- तिवनी
- माता- कौशल्या देवी
- पिता- पं. मंगलदीन तिवारी
- प्रारंभिक शिक्षा- तिवनी, मनगवां एवं मार्तंड स्कूल रीवा
- उच्च शिक्षा- एमए, एलएलबी, टीआरएस कालेज रीवा
- राजनीति में प्रवेश: छात्र जीवन से ही स्वतंत्रता आंदोलन में भागीदारी, सामंतवाद के विरोध मेंं कार्य
- विधायक : 1952, 1957, 1972 से 1985, 1990 से 2003 तक लगातार
- प्रदेश सरकार में मंत्री : 1980
- विस उपाध्यक्ष: 23-3-90 से 15-12-92
- अध्यक्ष विधानसभा: 1993 से 2003 तक
- उपलब्धियां : राजनीति, समाजसेवा, प्रशासन एवं साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य
Published on:
20 Jan 2018 11:35 am
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