
vindhya chamber of satna
सतना. आखिरकार तीन माह बाद विंध्य चेंबर ऑफ कामर्स ने अपने पूर्व अध्यक्ष लखन अग्रवाल को जानकारी उपलब्ध कराई है। इस जानकारी के साथ नया विवाद खड़ा हो गया। जानकारी में उल्लेख किया गया है कि 91 सदस्यों ने सदस्यता शुल्क जमा नहीं कराया है। उनके रेकॉर्ड भी गायब हैं। ऐसे में चेंबर की पूर्व कार्यकारिणी पर सवाल खड़ा हो गया है। वर्तमान भी सवालों के घेरे में है कि आखिर पूर्व कार्यकारिणी से जवाब तलब क्यों नहीं किया गया है?
यह है मामला
दरअसल, पूर्व चेंबर अध्यक्ष लखन अग्रवाल ने चेंबर अध्यक्ष को 6 दिसंबर 2018 को पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने जानकारी मांगी थी कि वर्ष 2014-16 और 2016-18 के मतदाता संख्या की जानकारी दी जाए। इस दौरान नए बने सदस्यों की सूची भी उपलब्ध कराई जाए। साथ ही वे कौन सदस्य हंै, जिन्होंने 800 रुपए की सदस्यता शुल्क नहीं जमा किया है? ये जानकारी भी उपलब्ध कराई जाए। पत्र मिलने के बाद चेंबर में हड़कंप मच गया। करीब 3 माह तक पत्र को दबाए रखा गया, जबकि कार्यकारिणी ने जानकारी उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भी पास कर दिया था। पत्रिका में खबर प्रकाशित होने के बाद 16 मार्च को जानकारी लिखित रूप से दी गई। इसके बाद नया विवाद शुरू हो गया।
यह दी गई है जानकारी
पत्र में कहा गया कि चेंबर के सत्र 2014-16 में मतदाता संख्या 1384 थी और वर्ष 2016-18 में मतदाता संख्या 1596 थी। लेखानुसार वर्ष 2014-16 में नए बने सदस्यों की संख्या 118 है, जबकि 2016-18 में नए सदस्य 38 हैं। वर्ष 2016-18 के लेखानुसार 1505 सदस्यों ने द्विवार्षिक शुल्क 800 रुपए दिए हैं। 91 सदस्यों के शुल्क अप्राप्त है, इनका रिकार्ड भी चेंबर कार्यालय में उपलब्ध नहीं है। वहीं 10 सदस्यों का शुल्क लेखा पुस्तिका में 500 रुपए जमा है।
रेकार्ड कहां गायब हो गए
मामले में चेंबर खुद सवालों के घेरे में आ गया है। चेंबर व्यापारियों की प्रतिष्ठित संस्था है। इस संस्था में सदस्यों का शुल्क जमा न करना व्यक्तिगत निर्णय हो सकता है लेकिन, उनके रेकॉर्ड गायब होना बड़े षडयंत्र की ओर इशारा करता है। पूर्व चेंबर अध्यक्ष लखन अग्रवाल को जानकारी देने में विलंब करना भी कई सवाल खड़ा करता है। अगर गडबड़ी हुई है, तो पूर्व कार्यकारिणी से सवाल जवाब होना चाहिए। लेकिन, ऐसा भी नहीं किया गया। ऐसे में व्यापारियों के बीच कई प्रकार की चर्चाएं भी हैं।
Published on:
19 Mar 2019 07:11 am
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