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satna: युवाओं ने स्टार्टअप से बनाई पहचान, कइयों को रोजगार देने की तैयारी

सतना जिले को देश में पहचान देने वाले कई स्टार्टअप तैयार

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satna: युवाओं ने स्टार्टअप से बनाई पहचान, कइयों को रोजगार देने की तैयारी

Yash gautam

सतना। व्यावसायिक नगरी में शुमार सतना अब स्टार्टअप के माध्यम से एक नई उड़ान के लिये तैयार है। जिले के कई युवाओं ने लाखों रुपये के नौकरियां छोड़कर स्वरोजगार की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाना शुरू कर दिया है। इन युवाओं को उद्यमी बनाने सतना में स्थापित प्रदेश का तीसरा इन्क्यूबेशन सेंटर मदद कर रहा है। यहां कई स्टार्टअप ऐसे हैं जिन्हें भारत सरकार ने मान्यता दी है।

नौकरी के ऑफर ठुकराए, बने भारत के प्रतिष्ठित ऊर्जा ब्रांड

सतना के युवा यश गौतम ने सोलर एनर्जी से पढ़ाई की और अच्छी रैंकिंग के कारण कॉलेज के कैम्पस में नामी कंपनियों का उनका सलेक्शन भी किया। लेकिन यश कुछ हट कर करना चाहते थे। लिहाजा उन्होंने नौकरी के ऑफर छोड़ अक्षय ऊर्जा में कुछ नया करने का सोचा। 35 लाख में एक छोटा सा स्टार्टअप शुरू किया और 2 करोड़ के टर्न ओवर के साथ भारत सरकारी के मान्यता प्राप्त प्रतिष्ठित ऊर्जा ब्रांड का उत्पादन कर रहे हैं। यश ने बताया कि 2021 में नवीकरणीय ऊर्जा का स्टार्टअप लक्सन एनर्जी इंडिया प्रा. लिमि. की स्थापना की। 28 लोगों के साथ सोलर एनर्जी के क्षेत्र में कार्य प्रारंभ किया। शुरुआत सतना शहर में एक घर में रूफ टॉप सोलर सिस्टम लगाने से की और आज इंदौर जैसे बड़े शहरों में कई प्रोजेक्टों पर काम कर रहे हैं। इस वर्ष ने 6 करोड़ के टर्न ओवर के टारगेट पर काम कर रहे हैं। बताया कि हमारा ग्रह एक जलवायु संकट का सामना कर रहा है, और यह हम सभी पर निर्भर है कि हम अपने कार्बन फुटप्रिंट को कम करने और स्वच्छ, नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता बढाए। यह ऊर्जा किफायती प्रदूषण मुक्त है। इस क्षेत्र में अभी उतनी व्यावसायिक प्रतिद्वंद्विता भी नहीं है लिहाजा बड़ा मार्केट उपलब्ध है। अब हम सोलर एनर्जी के साथ विंड एनर्जी पर भी काम कर रहे हैं। जल्द ही दिल्ली में भी कार्पोरेट ऑफिस डालने की तैयारी है। अक्षय ऊर्जा प्रौद्योगिकी में प्रगति और घटती लागत ने अधिक से अधिक व्यवसायों और व्यक्तियों के लिए स्वच्छ ऊर्जा में निवेश करना और उससे लाभ प्राप्त करना संभव बना दिया है।

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15 लाख की नौकरी छोड़ी, एग्रीटेक स्टार्टअप शुरू किया

कृष्णदेव सिंह एचआर क्षेत्र में 15 लाख की नौकरी कर रहे थे। इसमें और उन्नति की संभावनाएं और महानगरीय रहन-सहन भी था। किसान परिवार से होने के कारण किसानों के लिये कुछ करने और खुद का व्यवसाय करने का जुनून उन्हें नौकरी से बाहर निकाल लाया। अब वे मृदा से फसल प्रबंधन का एग्रीटेक स्टार्टअप करने जा रहे है। अर्थ एनालिटिका लैब के जरिए वे किसानों, एफपीओ, किसान सहकारी समितियों को मृदा परीक्षण, जल परीक्षण, सम्पूर्ण कृषि प्रबंधन, कृषि विज्ञान सलाह, कृषि अवशिष्ट प्रबंधन ,कृषि बाजार और कृषि सामुदायिक विकास पर सेवाएं प्रदान करने के प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। 50 लाख की शुरुआती लागत वाले इस प्रोजेक्ट के जरिये ऐसी सेवाओं के पहले विन्ध्य में पहले सेवा प्रदाता हैं। उन्होंने बताया कि इसके जरिए किसानों को उनके स्थान पर डोरस्टेप सेवाएं प्रदान करेंगे। हम मृदा पारिस्थितिकी तंत्र और प्राकृतिक खेती को पुनर्जीवित करना चाहते है। उन्होंने मानव संसाधन और विपणन में एमबीए पूरा किया है और वह मुंबई में एक फिनटेक स्टार्टअप के साथ काम भी किया। उनकी टीम में आईआईटी और शीर्ष संस्थानों के लोग शामिल हैं। वे स्टार्टअप इंडिया के टॉप 22 टीम्स में शामिल रहे तो इंडिया - कनाडा स्टार्टअप कनेक्टिविटी प्रोग्राम टूगेदर 2023 का हिस्सा हैं। अप्रैल 2023 से अपना कमर्शियल पायलट लॉन्च करने वाले हैं। इसमें किसानों के खेतों की मिट्टी का परीक्षण इसके बाद उसमें प्रयुक्त होने वाले उर्वरक और उनकी मात्रा सहित फसल आदि की जानकारी और उपलब्धता देंगे।

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एअर लाइंस की नौकरी छोड़ी, 600 लोगों को रोजगार देने की तैयारी

अभिषेक खरे ने अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी के लिए शहर छोड़ दिया। 8 साल तक अलग-अलग कंपनियों में नौकरी की। एअर लाइंस कंपनी में भी काम किया। लेकिन नौकरी उन्हें रास नहीं आ रही थी। 2016 में नौकरी छोड़ी और वापस सतना आकर खुद का व्यवसाय करने लगे। सेवा क्षेत्र के व्यवसाय के दौरान उन्होंने पाया कि आज बेरोजगारी बड़ी समस्या और इसे ही अपना व्यवसाय बनाने का संकल्प किया। उन्होंने एक ऐसा प्रोजेक्ट तैयार किया जो न केलव लोगों को रोजगार देगा बल्कि उनके जरिए अलग-अलग सेक्टर को विभिन्न सेवाएं मिल सकेंगे। इसके लिये उन्होंने रोजर लैण्ड प्रोजेक्ट तैयार कर इसे स्टार्टअप के तौर पर शुरू किया। 50 लाख की शुरुआती लागत वाले इस प्रोजेक्ट को तीन फेज में किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट के जरिए 600 लोगों को रोजगार दिया जाएगा।

अपनी पढ़ाई कंप्लीट करने के बाद मैंने यहां पर रहकर ही नौकरी करने का बहुत प्रयास किया मगर नौकरी नहीं मिली लास्ट में मुझे जॉब के लिए बाहर जाना पड़ा 8 साल तक बाहर अलग-अलग कंपनी में काम करने के साथ अपने क्षेत्र की इस प्रॉब्लम को सॉल्व करना चाहता था 2016 में मैं वापस आया और अपने इस टारगेट अपोजिट को लेकर काम चालू किया इसमें मेरी 6 साल की मेहनत और 14 साल का work experience है। बेरोजगारी की इस समस्या को यदि मैं कुछ हद तक भी कम करने में सफल रहा तो मैं अपना जीवन धन्य मानूंगा। 1 साल में मेरा अभी 600 लोगों को काम देने का टारगेट है। अभिषेक ने बताया कि रोजगार देने की ई-कॉमर्स कंपनी है रोजरलैण्ड। इसके पहले फेज जो 15 दिन में शुरू होने जा रहा है इसमें लोगों को बिजनेस सर्विस देंगे। दूसरा चरण जो अगले 2-3 माह में शुरू होगा इसमें इम्प्लायमेंट स्टोर खोला जाएगा। जिसके तहत लोगों को उनकी योग्यता के तहत रोजगार दिया जाएगा और उनके उत्पादों का एक हिस्सा वे स्वयं खरीदेंगे। अंतिम चरण में वंचित बेरोजगारों को रोजगार का लाइव प्रशिक्षण का होगा। जिससे वे स्वरोजगार स्थापित कर सकेंगे। इसके लिये एप और पोर्टल तैयार किया गया है। जिसमें एक ओर से सेवाओं की मांग होगी वहीं दूसरी ओर सेवा पूर्ति के लिए रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा।