
Zilla Panchayat CEO innovation landed on the ground in satna
सतना/ जिले के दस्यु प्रभावित क्षेत्र मझगवां जनपद में रोजगार की स्थिति काफी दयनीय है। यहां संसाधनों के अभाव में महिलाएं जंगल की लकडिय़ां काट कर और उसे सतना में बेचती हैं। साथ ही यहां उनके द्वारा जो दूग्ध उत्पादन होता है उसे स्थानीय दूधिये औने पौने दाम पर खरीदते थे। जिपं सीईओ ने एनआरएलएम प्रोग्राम के तहत विगत माह जब इस क्षेत्र का दौरा किया और महिला स्वसहायता समूह से मुलाकात कीं तो हकीकत सामने आई।
इसके बाद जिपं सीईओ ने यहां सांची का दुग्ध प्रोजेक्ट प्रारंभ करने का निर्णय लिया, जिससे महिलाओं को उनके दुग्ध की सही कीमत मिल सके। अब जाकर यह प्रोजेक्ट धरातल पर आ गया और इसका प्रायोगिक परीक्षण भी शुरू हो गया है। मझगवां में चिलर प्लांट लगाया जा चुका है। जल्द ही इस प्रोजेक्ट का शुभारंभ किया जाएगा।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास की योजना एनआरएलएम के तहत जिपं सीईओ ने मझगवां जनपद में मझगवां डेयरी नाम से प्रोजेक्ट की शुरुआत की। इसके तहत मझगवां जनपद पंचायत की ऐसी विभिन्न ग्राम पंचायतों का चिह्नांकन किया गया जहां दुग्ध का उत्पादन अच्छा होता है। इनके रूट तैयार कराए गए।
गांव के महिला स्वसहायता समूहों को प्रेरित किया गया और प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान चल रहे सर्वे में यह पता चला कि अभी यहां उत्पादित होने वाले दूध की कीमत स्थानीय दूधिये 20 से 30 रुपये देते हैं जबकि बाजार में इसकी कीमत 40 से 60 रुपए की है। इस पर जिपं सीईओ ने सांची से चर्चा कर मझगवां में ही चिलर प्लांट लगाने राजी किया।
तैयार किए हितग्राही
एनआरएलएम की टीम को सर्वे के लिए उतारा गया। टीम ने पूरे क्षेत्र में जाकर लगभग 20 गांव ऐसे चिह्नित किये जहां दूध उत्पादन बेहतर होता है। महिला स्वसहायता समूहों को इस प्रोजेक्ट से जुडऩे राजी किया गया। इसके बाद सांची को सर्वे रिपोर्ट के आधार पर एक हजार लीटर क्षमता का चिलर प्लांट लगाने कहा गया। अब यह प्रोजेक्ट प्रायोगिक तौर पर यहां शुरू हो गया है। यहां 200 हितग्राहियों से सात प्वॉइंटों पर दुग्ध का कलेक्शन किया जा रहा है। अभी 500 लीटर दूध एकित्रित हो रहा है। दूध एकत्र करने के लिए सांची के वाहन मिल्क रूट पर जाते हैं। अब इनके दूध की कीमत 40 से 55 रुपये तक बन रही है।
खातों में जाएगी राशि
बताया गया कि इनका एक माह का समय होने पर संबंधित समूह को यह राशि दी जाएगी जहां से संबंधित हितग्राहियों को उनके विक्रय किये गए दूध की मात्रा के हिसाब से राशि उनके खाते में दे दी जाएगी। महिलाएं जब चाहे पैसा निकाल सकें इसके लिये भी प्रावधान किए जा रहे हैं। इसके लिये बैंकर्स से चर्चा की जा रही है कि वे गांव में ही कियोस्क सेंटर लगा सकें। जल्द ही यह भी शुरू हो जाएंगे। इसके साथ ही यह प्रोजेक्ट दस्यु प्रभावित क्षेत्र में महिलाओं की जिंदगी में नई रोशनी लाएगा। इस प्रोजेक्ट को अंजाम तक पहुंचाने में एनआरएलएम टीम के प्रमोद शुक्ला जिला परियोजना समन्वयक, विष्णु तिवारी जिला प्रबंधक नोडल अधिकारी, आकाशदीप, ओमप्रकाश पयासी प्रबंधक सांची डेयरी की भूमिका मुख्य रही।
आज होगा निरीक्षण
इस प्रोजेक्ट के प्रारंभ हो जाने के बाद जिपं सीईओ ऋजु बाफना मझगवां स्थित चिलर प्लांट का मौका मुआयना करेंगी। इसके अलावा प्रोजेक्ट के गैप प्वाइंट भी देखे जाएंगी। जिसकी पूर्ति के बाद इस प्रोजेक्ट का शुभारंभ कराया जाएगा।
Updated on:
25 Dec 2019 12:53 am
Published on:
24 Dec 2019 05:27 pm
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