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सवाईमाधोपुर . सरकार व शिक्षा विभाग भले ही स्कूलों में परीक्षा परिणाम सुधारने के लिए ढोल पीट रही है, लेकिन स्कूलों में पढ़ाई किस तरह हो रही है, इसका अंदाजा शैक्षणिक सत्र 2018-19 में 10वीं व 12वीं बोर्ड परीक्षा में देखा जा सकता है। जहां 55 स्कूलों में बोर्ड परीक्षा परिणाम निराशाजनक रहा है। अब जल्द ही बोर्ड निदेशालय के आदेशों के बाद कम परिणाम देने वाले 55 विद्यालयों के संस्था प्रधान एवं शिक्षक नपेंगे।
सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक उन्नयन के लिए वर्षभर चली गतिविधियों की पोल माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक कक्षाओं के परिणामों ने खोल दी। खराब परिणाम पर बोर्ड निदेशालय ने चिंता जताई। इसके बाद जिले के शिक्षा अधिकारियों से 10वीं एवं 12वीं बोर्ड परीक्षा में न्यूनतम परिणाम देने वाले संस्था प्रधानों की सूची मांगी है। जिले में दसवीं बोर्ड परीक्षा में 47 माध्यमिक एवं 8 उच्च माध्यमिक स्कूलों का परिणाम कम रहा है।
शिक्षक नहीं ले रहे गंभीरता से : सरकार पूरे संसाधन जुटाकर शिक्षकों को नवाचार के लिए प्रशिक्षित कर रही है। इसके बावजूद कुछ स्कूलों में शिक्षक गंभीरता नहीं बरत रहे है। विशेषतौर पर अंग्रेजी, विज्ञान एवं गणित विषयों में छात्रों का परिणाम कमजोर रहा। स्थिति ये थी इन विषयों में कई स्कूलों में बच्चों के पास होने तक भी नम्बर नहीं आए हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि दसवीं एवं बारहवीं बोर्ड परीक्षा में शिक्षकों ने अपने विषयों में भी मेहनत नहीं की।
इसका ही नतीजा रहा कई विद्यार्थी अंग्रेजी, विज्ञान एवं गणित विषयों में फेल हो गए।
ये है प्रावधान
जानकारी के अनुसार किसी सरकारी स्कूलों का माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की ओर से आयोजित 12वीं परीक्षा का परिणाम 30 प्रतिशत से कम रहता है, तो संस्था प्रधान तथा संबंधित विषय में 40 प्रतिशत से कम परिणाम रहने पर शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। इसी प्रकार दसवीं में 40 प्रतिशत से कम स्कूल का परिणाम रहने पर संस्था प्रधान व 50 प्रतिशत से कम परिणाम रहने पर संबंधित विषयाध्यापक के खिलाफ 17 सीसीए कार्रवाई का प्रावधान है। इसके विपरीत 80 प्रतिशत से अधिक परिणाम रहने पर संबंधित विषय अध्यापक को प्रशंसा-पत्र प्रदान किया जाता है।
Published on:
03 Jul 2018 06:34 pm
