सवाईमाधोपुर. रणथम्भौर में बाघों का कुनबा बढऩे के साथ ही बाघ टेरेटरी की तलाश में अन्य जंगलों की ओर रुख करने लगे हैं। पूर्व में 2 से 4 नवम्बर के बीच रणथम्भौर का बाघ टी-136 दतिया व मुरैना के जंगलों में लगे कैमरे में कैद हुआ था। यह बाघ कुछ ही दिनों में दो बार राजस्थान से मध्यप्रदेश के जंगलों में जा चुका है। वर्तमान में इस बाघ का मूवमेंट अब एमपी के दतिया के जंगलों में बताया जा रहा है। वहीं अब एक और बाघ के रणथम्भौर से एमपी के जंगलों में पहुंचने की आशंका है। हालांकि अब तक वन विभाग की ओर से इसकी पुष्टि नहीं की जारही है। लेकिन सूत्रों की माने तो बाघ टी-47 भी अब एमपी के जंगलों में पहुंच गया है।
रूनिपुरा गांव के आसपास बताया जा रहा है मूवमेंट
एमपी वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार वर्तमान में एक बाघ का मूवमेंट मुरैना की जूरा तहसील के रूनिपुरा गांव के आसपास बताया जा रहा है। वन विभाग की ओर से बाघ की लगातार मॉनिटरिंग व टे्रकिंग कराई जा रही है। हालांकि अब तक वन विभाग की ओर से यह बाघ कौनसा है इसकी पुष्टि नहीं की गई है लेकिनसूत्रों की माने तो यह बाघ रणथम्भौर का मोहन यानि टी-47 हो सकता है।
एक व्यक्ति पर भी किया हमला
जानकारी के अनुसार बाघ ने मुरैना की जूरा तहसील के रूनिपुरा गांव के पास एक व्यक्ति पर गुरुवार को हमला भी किया था। हालांकि वन विभाग की टीम ने युवक को बचा लिया है। यह युवक किसी न्यूज चैनल का रिपोर्टर बताया जा रहा है।
आए दिन रहता है रणथम्भौर से बाहर
बाघ टी-47 यूं तो रणथम्भौर का बाघ है लेकिन टेरेटरी की तलाश में इस बाघ का आए दिन रणथम्भौर से सटे जंगलोंं में लगा रहता है। पूर्व में यह बाघ रणथम्भौर से निकलकर लम्बे समय तक करौली के जंगल में रहा था। इसके बाद कोरोना काल के दौरान यह बाघ वापस रणथम्भौर से आ गया था। लेकिन कुछ दिनों तक यहां रुकने के बाद तालेडा रेंज से होता हुआ वापस करौली पहुंच गया था। इसके बाद यह बाघ करौली से धौलपुर होता हुआ एमपी तक पहुंचा है।
इनका कहना है…
रणथम्भौर का एक बाघ मुरैना के जंगल में भटक रहा है। हालांकि अब तक बाघ की पहचान नहीं हो सकी है लेकिन इसके टी-47यानि मोहन होने की संभावना है। बाघ की टे्रकिंग कराई जा रही है।
– स्वरूप सिंह, उपवन संरक्षक, मुरैना।