
रणथम्भौर में आपस में लड़ते बाघ। फोटो: पत्रिका
सवाईमाधोपुर। रणथम्भौर में क्षेत्राधिकार को लेकर खून के रिश्तों में संघर्ष की दास्तां कोई नई नहीं है। यहां अब तक मां-बेटी के बीच संघर्ष होते रहे हैं। अधिकतर बार बेटी ने मां को ही अपने क्षेत्र से खदेड़ा है। उल्लेखनीय है कि सोमवार को जोन-3 के लेक क्षेत्र में बाघिन टी-124 (रिद्धि) और उसकी बेटी के बीच टेरिटोरियल फाइट हुई, जिसमें दोनों घायल हो गईं थी।
संघर्ष के दौरान रिद्धि के कान और पैर में चोट आईं थी। वहीं 2504 के पैर में चोट आई, जिससे वह लंगड़ाते हुए दिखाई दी। इससे पहले ये दोनों बाघिन अक्टूबर माह में एक दूसरे को आमने सामने हो गई थी।
जंगल में आम तौर पर इलाके को लेकर अपने ही परिवार के बाघ-बाघिनों के बीच संघर्ष देखने को मिल रहा है। पूर्व में भी कई बार इलाके की जंग को लेकर रणथम्भौर में मां-बेटी के बीच ही देखने को मिलते हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार पिछले करीब पांच सालों से इस तरह के संघर्ष सामने आ रहे हैं। इससे पहले साल 2015 में बाघिन मछली यानि टी-16 को उसकी बेटी कृष्णा ने क्षेत्राधिकार के संघर्ष में जोन तीन से खदेड़ दिया था। इसके बाद कृष्णा और उसकी बेटी एरोहैड में संघर्ष हुआ।
बाघिन कृष्णा पूर्व में जोन तीन में घूमती थी, लेकिन बेटी से पराजित होने के बाद वह जोन चार के लकड़दा की तरफ चली गई। इसके बाद बाघिन एरोहैड को उसकी बेटी रिद्धी ने ही जोन तीन से हटाया था, जिसके बाद एरोहैड जोन दो में चली गई। अब रिद्धि और उसकी बेटी के बीच में यह संघर्ष सामने आ रहा है।
29 दिसम्बर 2025: बाघिन रिद्धि और उसकी बेटी के साथ आपसी संघर्ष हुआ।
9 अक्टूबर 2025: बाघिन रिद्धि और उसकी बेटी के साथ आपसी संघर्ष हुआ।
2022: बाघ टी-120 गणेश का एक बाघ के साथ संघर्ष हुआ, जो कि उसका पुत्र था।
27 अक्टूबर 2019: बाघिन नूर के फेर में बाघ टी-57 व टी-58 में फाइट हुई थी।
पिछले पांच साल से मां-बेटी के बीच संघर्ष की परंपरा चली आ रही है। जोन तीन में बाद में जो भी बाघिन आई है। वह अपनी मां को हटाकर ही काबिज हुई है। बाघों के बीच में भी आपस में इसी तरह के संघर्ष सामने आते हैं।
-मानस सिंह, डीएफओ, रणथम्भौर बाघ परियोजना।
Updated on:
31 Dec 2025 02:59 pm
Published on:
31 Dec 2025 02:59 pm
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