
आलनपुर सर्किल स्थित एक मैरिज गार्डन में भजनों की प्रस्तुति देती गायिका व भजन संध्या में मौजूद श्रोता।
सवाईमाधोपुर. रणतभंवर गणेश परिवार के तत्वावधान में गुरुवार को आलनपुर के एक मैरिज गार्डन में भजन संध्या हुई।
आयोजन से जुड़े अशोक खंूटेटा ने बताया कि इसमें मेघा सूर्यवंशी, चेतना अग्रवाल, कमलेश जायसवाल, निक्की सैनी, रानू सैन आदि गायक कलाकारों ने एक से बढ़कर एक भजन की प्रस्तुति देकर समां बांध दिया। कार्यक्रम में भजनों की बयार देर रात तक बही। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।
जागरण में झूमे श्रोता
बौंली. बालाजी सत्संग मंडल के तत्वावधान में राम बाड़ी बालाजी मंदिर परिसर में गुरुवार को रात्रि जागरण का आयोजन हुआ। मण्डल से जुड़े रविंद्र भट्ट ने बताया कि जागरण में स्थानीय व बाहर से आए कलाकारों ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुति दी। जागरण में सीताराम त्रिवेदी, शिव दयाल सैनी, राम अवतार सैनी, सुरेश पाठक, राजेश सैनी, प्रहलाद सैनी आदि कलाकारों ने प्रस्तुति दी।
भागवत श्रवण से बदलता है जीवन
सवाई माधोपुर. जिला मुख्यालय स्थित विज्ञान नगर कॉलोनी में चल रही संगीतमय भागवत कथा में शुक्रवार कथावाचक पंडित अमित वशिष्ठ ने सत्संग व भागवत श्रवण का महत्व बताते हुए कहा कि सत्संग जीवन को बदल देता है। अच्छे लोगों का संग इंसान को महान बना देता है। कथावाचक ने धु्रव चरित्र प्रहलाद चरित्र, गज ग्राह चरित्र आदि प्रसंग सुनाए।
लोककथा : खरी श्रद्धा
ए क दिन काशी में एक बड़े तपस्वी शान्ताश्रम स्वामी का ब्रह्मचैतन्य गोंदवलेकर महाराज से सम्भाषण हुआ। स्वामी ने पूछा- 'महाराज, इतने लोग काशी में गंगास्नान करने के पश्चात भी पावन क्यों नहीं होते। गोंदवलेकर महाराज बोले- 'क्योंकि उनमें खरी श्रद्धा नहीं होती! उत्तर से सन्तुष्ट न होने पर स्वामी बोले- 'वे खरी श्रद्धा के बिना गंगास्नान के लिए क्यों आएंगे? गोंदवलेकर महाराज ने कहा- 'इसका उत्तर तुम्हें शीघ्र ही दूंगा। इस सम्भाषण के चार दिन पश्चात गोंदवलेकर महाराज ने शान्ताश्रम स्वामी के हाथ-पैरों पर चीथड़े लपेटकर उन्हें महारोगी जैसा बना दिया, और जहां सैकड़ों लोग गंगास्नान के लिए उतरते हैं, वहां उन्हें बैठा दिया।
महाराज स्वत: बैरागी का वेष धारण कर उनके समीप खड़े हो गए। कुछ समय में वहां बहुत लोग एकत्र हो गए। बैरागी ने उपस्थित लोगों से कहा- 'सज्जनो, सुनिए! यह महारोगी मेरा भाई है। गत वर्ष हम दोनों ने भगवान विश्वनाथ की अत्यन्त मन से सेवा की थी। उस सेवा से प्रसन्न होकर उन्होंने मेरे भाई को वर दिया था कि जिस तीर्थयात्री में इस गंगा में स्नान करने से मेरे पाप नष्ट हो गए और मैं शुद्ध हो गया, ऐसा भाव होगा, उसके एक आलिंगन से तेरा यह महारोग नष्ट हो जाएगा। यहां आप इतने लोग हैं, कोई तो मेरे भाई पर इतना उपकार करे! बैरागी के वचन सुनकर भीड़ से आठ-दस लोग आगे बढ़े।
उसी क्षण बैरागी ने उन्हें रोककर कहा- 'आप लोग क्षणभर रुकिए! विश्वनाथ भगवान ने यह भी कहा था कि जो तीर्थयात्री इस महारोगी को आलिंगन देगा, उसे यह रोग लग जाएगा। जब वह पुन: शुद्ध भाव से गंगास्नान करेगा, तो ही महारोग से मुक्त होगा। यह सुनकर सब लोग वहां से चले गए। किन्तु, वहां खड़े एक युवक किसान ने अधिक विचार न कर, बड़ी निष्ठा से शान्ताश्रम स्वामी को आलिंगन दिया। उसके पश्चात तुरन्त गोंदवलेकर महाराज ने उस किसान को आलिंगन दिया और कहा- 'बेटा, तेरी काशीयात्रा सफल हुई। तेरा कल्याण हुआ!
Updated on:
13 Oct 2018 01:24 pm
Published on:
13 Oct 2018 01:24 pm
