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चंबल घडिय़ाल अभयारण्य: पहली बार जलीय पक्षियों की गणना शुरू

चंबल घडिय़ाल अभयारण्य: पहली बार जलीय पक्षियों की गणना शुरू
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 अभयारण्य क्षेत्र में कलरव करते पक्षी

सवाईमाधोपुर. अभयारण्य क्षेत्र में कलरव करते पक्षी

सवाईमाधोपुर. वन विभाग ने राष्ट्रीय चंबल घडिय़ाल अभयारण्य में गत शनिवार से पहली बार जलीय व अप्रवासी पक्षियों की गणना का कार्य शुरू किया है। गणना 9 जनवरी तक चलेगी। विभाग की ओर से करीब तीस कार्मिकों को तैनात किया गया है।


एक प्वाइंट पर तीन जने रहेंगे तैनात
वन विभाग की ओर से चंबल अभयारणय क्षेत्र में कुल 15 काउंटिंग प्वाइंट बनाए हैं। इनमें पाली में तीन, मण्डराइल में तीन, जामरिया व केशवराय पाटन के तीन-तीन प्वाइंट हैं। इसके अलावा वन विहार आदि कई क्षेत्रों में प्वाइंट निर्धारित किए गए हैं। एक प्वाइंट पर तीन लोगों की टीम तैनात की गई है।


एक साथ की थी गणना
राष्ट्रीय चंबल घडिय़ाल अभयारण्य में गत वर्ष जलीय जीवों व पक्षियों की गणना राजस्थान, मध्यप्रदेश व उत्तरप्रदेश की टीमों ने एक साथ मिलकर की थी। आमतौर पर चंबल में पक्षियों व जीवों की गणना अलग-अलग की जाती है। फिर इसे केन्द्र सरकार को भेजा जाता है।


1978 में हुई थी स्थापना
घडिय़ाल, डॉल्पिन आदि जलीय जीवो व इण्डियन स्टीमर आदि विलुप्त होते पक्षियों को प्रजाति के संरक्षण के लिए केन्द्र सरकार ने 1978 में राष्ट्रीय चंबल घडिय़ाल अभयारण्य की स्थापना की थी। अभयारण्य में जलीय जीवों की गणना का कार्य 1984 से शुरू किया गया है।


15 वाटर बॉडीज की होगी गणना
वन विभाग की ओर से चंबल अभयारणय में 15 वाटर बॉडीज की गणना की जा रही है। इसमें 12 वाटर बॉडीज सवाईमाधोपुर जिले में व 3 बहार के हैं।


कोटा विश्वविद्यालय से आए शोधार्थी
वन विभाग की ओर से कोटा विश्वविद्यालय के शोधार्थियों की टीम बुलाई गई है। गणना के लिए तीन सदस्यीय दल आया है। वहीं भरतपुर के घना पक्षी विहार से विशेषज्ञों की टीम बुलाई गई है। इनको वन विभाग के विशेषज्ञों ने प्रशिक्षण भी दिया था।


आंकड़ों की नजर में चंबल अभयारण्य...
435 किमी लम्बा है अभयारण्य
1978 में हुई थी स्थापना
1984 से शुरू हुई जलीय जीवों की गणना
15 काउंटिंग प्वाइंट बनाए
15 वाटर बॉडिज की होगी गणना
30 कार्मिक किए तैनात
9 जनवरी तक चलेगी गणना
435 किमी लम्बा है अभयारण्य
राष्ट्रीय चंबल घडिय़ाल अभयारण्य कुल 435 किमी लम्बा है। राष्ट्रीय चंबल घडिय़ाल अभयारण्य की शुरुआत श्योपुर जिले के पाली के सामरसा घाट से ही होती है।


पहली बार देश भर में चंबल के अप्रवासी व अन्य पक्षियों की गणना की जा रही है। इसके लिए भरतपुर व कोटा से टीम आई है।
मुकेश सैनी, उपवन संरक्षक, रणथम्भौर बाघ परियोजना, सवाईमाधोपुर।


चंबल में पक्षियों की गणना का काम शुरू हो गया है। इसके लिए 15 प्वाइंट बनाए गए हैं।
रामबाबू शर्मा, डीएफओ, राष्ट्रीय चंबल घडिय़ाल अभयारण्य, सवाईमाधोपुर।

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