
कुम्भकार दीयों को बनाने में जुटे हुए हैं।
रवांजना चौड़. आधुनिक युग में झालरों और लाइटों ने भले ही घरों में रोशनी को बढ़ा दिया हो, लेकिन आज भी मिट्टी के दीयों की विशेषता कम नहीं है। दीपोत्सव में पांच दिनों तक मिट्टी के दीये घरों को रोशन करते हैं। ऐसे में कुम्भकार दीयों को बनाने में जुटे हुए हैं। हालांकि बाजार में कई तरह के सजावटी दीये आ गए हैं। जिसे भी लोग पसंद कर रहे हैं।
कई दिनों पहले जुट रहे काम में
कुम्भकारों ने बताया कि मिट्टी के दीये बनाने के लिए कई दिनों पहले जुटना पड़ता है। तब समय पर दीये तैयार हो पाते हैं। यह पुश्तैनी काम होने से पीढ़ी दर पीढ़ी इसी में लगे हुए हैं।
यह भी है विशेषता
कुम्भकारों व लोगों ने बताया कि मिट्टी के दीये घरों को रोशन करने के साथ ही विभिन्न बीमारियों से भी बचाते है। दीये में तेल डालकर जलाने से कई प्रकार के जीवाणु व विषाणु समाप्त हो जाते हैं। इससे बीमारी कम होती है।
Updated on:
02 Nov 2018 04:33 pm
Published on:
02 Nov 2018 04:33 pm
