
केस में बेवजह नहीं घसीटें जाएं कर्मचारी
गंगापुरसिटी . कानून का मानना है कि भले ही १०० दोषी बच जाएं, लेकिन १ भी निर्दोष को सजा नहीं मिले। कुछ इसी तर्ज पर पुलिस महानिरीक्षक भरतपुर ने एक आदेश जारी कर सरकारी कर्मचारी और छात्रों को बेवजह केस में घसीटने वाले मामलों की बारीकी से जांच करने की बात कही है। साथ ही अनुसंधान अधिकारियों (आईओ) को भी चेताया है कि यदि आईओ ने दूषित अनुसंधान किया तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।
पुलिस महकमे में पहुंचने वाले तमाम परिवाद एवं अनुसंधान पत्रावलियों की समीक्षा में सामने आया है कि सरकारी सेवा में कार्यरत कर्मचारी एवं अध्ययनरत विद्यार्थियों के विरुद्ध उनके घटना में शामिल नहीं होने के बाद भी केसों में उनके नाम लिखा दिए जाते हैं। इससे कर्मचारी को मानसिक एवं आर्थिक परेशानी होने के साथ उनका सेवा रिकॉर्ड भी खराब होता है। इसी तरह अध्ययन कर रहे विद्यार्थियों/नाबालिग छात्रों का नाम भी मुकदमों में अनावश्यक तरीके से उनके परिजनों को परेशान करने और विद्यार्थियों का भविष्य खराब करने के आशय से लिखा दिया जाता है।
ऐसे में उन्हें पुलिस थानों और उच्चाधिकारियों के समक्ष बेगुनाह साबित करने के लिए चक्कर लगाने पड़ते हैं। ऐसे मामलों से निपटने के लिए आईजी मालिनी अग्रवाल ने पुलिस अधीक्षक, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, पुलिस वृत्ताधिकारी, उप अधीक्षक एससी/एसटी सैल एवं थाना प्रभारियों को पत्र लिखा है, जिससे सरकारी कर्मचारी और छात्रों के नाम बेवजह केस में नहीं घसीटे जाएं। इस मामले में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गंगापुरसिटी हिमांशु का कहना है कि इस संबंध में हमें पत्र मिला है। इसके लिए सभी अनुसंधान अधिकारियों को साफ तौर से दिशा-निर्देश दिए गए हैं, जिससे किसी भी कर्मचारी या छात्र का नाम बेवजह केस में नहीं आए।
वैज्ञानिक तरीका भी अपनाएं
पुलिस महानिरीक्षक ने कहा है कि ऐसे प्रकरण जिनमें किसी सरकारी कर्मचारी अथवा अध्ययनरत छात्र को अरोपति किया गया है। उसके संबंध में गहनता से अनुसंधान किया जाए। इसके लिए स्वतंत्र साक्ष्य संकलित करने के साथ आवश्यकता होने पर वैज्ञानिक तकनीकी (सीडीआर विश्लेषण) आदि का सहयोग लिया जाए। अपराध में उनकी संलिप्तता के संबंध में सूक्ष्म अनुसंधान के पश्चात ही निष्कर्ष प्रस्तुत किया जाए।
तो होगी विभागीय कार्रवाई
यदि अनुसंधान निष्कर्ष के बाद पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय या पुलिस मुख्यालय द्वारा अनुसंधान/समीक्षा कराए जाने पर सरकारी कर्मचारी एवं छात्र की संलिप्तता केस में नहीं पाई जाती है तो पूर्व में जिस अनुसंधान अधिकारी ने कर्मचारी एवं छात्र के विरुद्ध आरोप प्रमाणित किया है, उसके विरुद्ध दूषित अनुसंधान किए जाने पर अनुशासनात्मक विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
गहन अनुसंधान कराएं
आईजी अग्रवाल की ओर से पर्यवेक्षण अधिकारियों (पुलिस अधीक्षक, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एवं वृत्ताधिकारी) को ऐसे प्रकरणों में निस्तारण आदेश देते समय अनुसंधान अधिकारी की सम्यक समीक्षा/निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। आईजी ने कहा कि इस तरह की कोई शिकायत या परिवाद मिलता है तो उस पर गहन अनुसंधान कराया जाना सुनिश्चित किया जाए।
Published on:
21 Dec 2018 07:59 pm
