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सवाईमाधोपुर. रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान में कार्यरत कई कर्मचारी अपने जीवन को दांव पर लगा कर वन एवं वन्य जीवों की सुरक्षा करने में पूरी मेहनत व ईमानदारी से लगे हुए है। वे अपने प्राणों की परवाह न कर केवल पार्क को सुरक्षित रखने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे है। ऐसे में वे दिन-रात एक कर रहे हैं। कई बार उन पर वन्यजीवों ने तो कई बार शिकारियों ने हमला किया, लेकिन उनका हौंसला कभी नहीं डगमगाया। ये वनकर्मी आज भी अनवरत काम को अंजाम दे रहे हैं।
जान की परवाह नहीं करते
सहायक वनपाल राजवीर सिंह पिछले करीब एक दशक से रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र सहित अलवर, करौली आदि जिलों में अपनी जान की परवाह नहीं कर खतरनाक व खूंखार वन्य जीव को ट्रंकूलाइज करते हैं। उन्होंने गांव, जंगल से वन्यजीवों को ट्रंकूलाइज कर मिशाल कायम की है। इस पर उन्हें कई बार सम्मानित किया जा चुका है। राजवीर सिंह कहते हैं रेस्क्यू करने में उन्हें आनंद मिलता है। वे पूरा जीवन इसी में समर्पित करेंगे। उन्होंने बताया कि दस वर्ष के कार्यकाल में उन्होंने 750 वन्य जीवों का रेस्क्यू किया है।
पैदल ट्रेकिंग में है अव्वल
अणतपुरा चौकी पर कार्यरत सहायक वनपाल हरलाल पैदल ट्रेकिंग में दक्ष है। वह नियमित 7 से 8 किलोमीटर अकेले ही पैदल ट्रैकिंग करते हैं। वे ड्यूटी के दौरान स्वप्रेरणा से ही कार्य क रते हैं। ट्रेकिंग के दौरान टाइगर ने हमला भी किया, लेकिन अकेले ही बाघ को हो हल्ला कर भगा कर अपनी जान बचाई। उसके बाद नियमित पैदल गश्त में लगे हैं। वह अन्य वनकर्मियों को बाघ एवं वन जीवों के बचाव व संरक्षण के लिए प्रेरित करते हैं।
पांच मिनट बाघ से संघर्ष
तालेड़ा रेंज में कार्यरत सहायक वनपाल रुपचंद टाइगर बचाने में व शिकारियों को पकडऩे में विशेषज्ञ है। यह जहां भी कार्यरत रहते हैं वहां बाघ बचाने का कार्य करते हैं। करीब एक दशक पहले तालेड़ा रेंज में गश्त करते समय बाघ ने हमला कर दिया था। इस दौरान पांच मिनट तक बाघ से संघर्ष करते रहे। बाद में अन्य वनकर्मियों के हो हल्ला के बाद बाघ उसे छोड़कर जंगल में चला गया। अभी भी यह इन्द्रगढ़ रेंज में कार्य कर रहे हैं।
शिकारियों ने किया हमला
फलौदी रेंज में कार्यरत सहायक वनपाल रामचरण शर्मा जंगल में शिकारियों को पकडऩे के कार्य में दक्ष है। उन पर कई बार शिकारियों ने हमले किए, लेकिन उनके कदम नहीं डगमगाए। वे अनवरत इसी कार्य में लगे है। इन्हें विभाग की ओर से सम्मानित किया जा चुका है।
जंगल की चौकियों पसंद
कुण्डेरा रेंज में कार्यरत वन रक्षक दशरथ सिंह की खास बात यह है कि वह घोर जंगल में स्थित वन चौकियों में पोस्टिंग करवाते हैं। 24 घंटे जंगल में रहकर बाघों व जंगल को बचाने का कार्य कर रहे हैं। वह निडरता से रात में अकेले ही टॉर्च व लाठी के सहारे गश्त करते हैं। कार्य के प्रति वफादार है।
इनका कहना है...
रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान में कई वनकर्मी वन एवं वन्य जीवों को बचाने में लगे हुए है, लेकिन कुछ चुनिंदा वनकर्मी ऐसे हैं, जिन्होंने लीक से हटकर वन एवं वन्यजीवों को बचाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इन्हें कई बार जिला स्तर पर सम्मानित किया गया है।
संजीव शर्मा,सहायक वनरक्षक, रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान, सवाईमाधोपुर।
Published on:
02 Oct 2018 06:10 am
