
sawaimadhopur
सवाईमाधोपुर. जिला अस्पताल के मातृ एवं शिशु अस्पताल में एसएनसीयू बार्ड में चिकित्सा महकमे की अनदेखी से अव्यवस्थाएं पूरी तरह से हावी है। यहां कम वजन एवं कमजोर बच्चो की बढ़ती संख्या से एसएनसीयू वार्ड का लोड बढ़ा है। अब यहां भर्ती होने वाले बच्चो की संख्या ढाई गुना बढ़ गई है, जबकि एनसीयू (स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट)वार्ड में केवल 12 बैड की क्षमता है, लेकिन यहां वर्तमान में 28 से अधिक शिशु भर्ती है। ऐसे में चिकित्सक एक बैड पर चार तो किसी में तीन से दो शिशु भर्ती कर रहे हैं। शिशुओं में संक्रमण फैलने का खतरा बना है, जबकि एक ट्रोली में केवल एक शिशु ही भत्र्ती होना चाहिए, ज्यादा संख्या में शिशु भर्ती होने के बाद भी यहां से दूसरी जगह रैफर नहीं किया जा रहा है। इधर, परिस्थितियों को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन को एसएनसीयू में भर्ती बच्चों की क्षमता बढ़ाने की जरूरत है लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया।
एक रेडियंट वार्मर में दो से चार बच्चे भर्ती
क्षमता 12 बैड की, भर्ती हो रहे डबल
कम वजन के बच्चे
एसएनसीयू वार्ड में यूं तो एक किलो 800 ग्राम या अधिकतम 2 किलो तक वजन के बच्चे भर्ती होना चाहिए, लेकिन वर्तमान में 11 शिशु दो किलो से अधिक एवं 5 बच्चे तीन किलो ग्राम वजन से अधिक भर्ती है। वहीं लगभग 4 शिशुओं का वजन 2 किलोग्राम से कम है।
30 के लिए नहीं स्टाफ
स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट वार्ड में 12 शिशुओं पर केवल आठ जनों का स्टॉफ है, जबकि 30 शिशुओं के लिए स्टॉफ की कमी है। ऐसे में स्टॉकर्मियों पर ही काम का अतिरिक्त बोझ है। उनकी देखभाल से लेकर अन्य कार्यों में भी परेशानी हो रही है।
संक्रमण का मंडरा रहा खतरा
एसएनसीयू वार्ड में एक बैड पर चार से तीन शिशुओं के भर्ती होने से शिशुओं में संक्रमण का खतरा मण्डरा रहा है। इससे चिकित्सा महकमा कोई ध्यान नहीं दे रहा है। स्थिति ये है कि इस बारे में चिकित्सा महकमा कोई स्पष्ट जवाब तक नहीं दे पा रहा है।
इनके भर्ती है शिशु
एसएनसीयू वार्ड में इन दिनों कोल्ड स्ट्रेस, रेसपिरेट्री डिस्ट्रेस, रिफ्यूज्ल टू फीड, एबजेमिनल डिस्टेन्शन, सीवियर जोइस्ट्रिस (पीलिया), रक्तस्त्राव (शरीर के किसी भी अंग जन्मजात विकृति), कोमा, शॉक आदि से पीडि़त शिशु भर्ती है।
Updated on:
06 Oct 2018 01:08 pm
Published on:
06 Oct 2018 01:08 pm
