
सवाईमाधोपुर. जिला अस्पताल में संचालित आईसीयू वार्ड।
सवाईमाधोपुर. जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में ह्रदय रोगियों को इलाज के नाम पर कोई सुविधा नहीं है। अगर अस्पताल में वे जाते है तो सिर्फ रैफर टिकट ही मिलता है। हालांकि यहां संसाधन हैं, लेकिन वे पर्याप्त मात्रा में नहीं है। बड़ी मशीनें नहीं होने से रोगियों को समय पर उपचार नहीं मिल पाता है।
जिला अस्पताल में न तो हृदय रोग विशेषज्ञ है और न ही जांच की कोई सुविधा है। ऐसे में बुजुर्ग व पुराने रोगियों के लिए परेशानी और बढ़ गई है। यहां ईसीजी में बीमारी का संकेत नजर आने पर चिकित्सक रोगी के परिजनों को जयपुर रैफर कराने की सलाह देते हैं।
प्रतिदिन औसतन एक दर्जन रोगी : इन दिनों हर रोज औसतन 10 से 12 हृदय रोगी जिला अस्पताल के आउटडोर में उपचार व परामर्श के लिए पहुंच रहे है। हर रोज औसतन एक हृदय रोगी भर्ती किया जा रहा है, लेकिन रोगियों को यहां उच्च स्तर जांच सुविधा नहीं मिल रही है।
नहीं है कॉर्डियोलॉजिस्ट का पद
जिला अस्पताल मेंं हृदय रोग विशेषज्ञ का पद ही नहीं है। ऐसे में हृदय रोग से संबंधित रोगियों को समय पर उपचार नहीं मिल रहा है। यहां हृदय रोग विभाग बने तो रोगियों को राहत मिल सकती है।
ये रोगी भी बढ़ रहे
तापमान में गिरावट के चलते हृदय रोग के अलावा इन दिनों सर्दी, खांसी,जुकाम व बच्चों में निमोनिया रोग बढ़ रहा है। तेज सर्दी व गलन के असर से अस्पताल का आउटडोर भी औसतन 1200 से 1500 के बीच चल रहा है।ह्दय रोग की आशंका हाइ ब्लड प्रेशर, वाल्व खराब, सीने में दर्द आदि कारणों से होता है। जिला अस्पताल में छल्ले व एन्ज्योग्राफी की सुविधा नहीं है। ऐसे में रोगियों को अधिकतर समय रैफर ही करना पड़ता है। इसके लिए यहां बड़ी मशीनों की जरूरत है। रोग से बचाव के लिए खान पान में सावधानी बरतनी चाहिए।
इनका कहना है
-जिला अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ का पद नहीं है। प्रतिदिन हृदय रोग से पीडि़त रोगी आने पर आईसीयू वार्ड में भर्ती कर प्रारंभिक उपचार शुरू किया जाता है। ज्यादा गंभीर होने पर रैफर करते है।
डॉ.रंगलाल मीणा, पीएमओ, जिला अस्पताल, सवाईमाधोपुर
Published on:
16 Jan 2019 04:12 pm
