
कैसे होगी वैतरणी पार, एक नाव पर दो राज्यों के मेले का है भार
प्रशासन के लिए यात्रियों की सुरक्षा की चुनौती, दो लाख यात्री जुटते हैं रामेश्वर धाम मेले में
कैसे होगी वैतरणी पार, एक नाव पर दो राज्यों के मेले का है भार
सवाईमाधोपुर. राजस्थान- मध्यप्रदेश की सीमाओं पर मंगलवार को भरने वाले लक्खी मेेले में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए वैतरणी पार करना चुनौती भरा रहेगा। इसका कारण यह है कि दोनों राज्यों के बीच बहने वाली चम्बल नदी को पार करने के लिए परिवहन विभाग ने मात्र एक नाव का परमिट जारी किया है, जबकि मेले में लगभग 2 लाख यात्रियों की भीड़ जुटती है। जिनमें से 50 हजार से अधिक यात्रियों की आवाजाही चम्बल पार करके एक-दूसरे प्रदेशों के बीच रहती है। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से यात्रियों के आने-जाने के लिए कोई खास सुरक्षात्मक प्रबंध नहीं किए हुए हैं।
इस बार कार्तिक पूर्णिमा पर ग्रहण होने से तडक़े चार बजे से छह बजे तक करीब दो लाख से अधिक श्रद्धालुओं के चम्बल नदी त्रिवेणी संगम व परशुराम घाट पर जमा होने की उम्मीद है, जो यहां डुबकी लगाकर भगवान चर्तुभुज नाथ के दर्शन करेंगे। श्रद्धालुओं का सोमवार शाम से त्रिवेणी संगम व परशुराम घाट पर पहुंचना शुरू हो गया। इस दौरान हजारों यात्री चम्बल को पार करके मध्यप्रदेश से भी आते हैं। ऐसे में मेले में जमा होने वाली भीड़ और श्रद्धालुओं की आवाजाही को लेकर प्रशासन के सामने चुनौती है। ये चुनौती विशेष इसलिए है कि इस बार त्रिवेणी संगम की तीनों नदियों चम्बल, बनास तथा सीप में काफी अधिक पानी है। चम्बल को पार करने के लिए परिवहन विभाग ने एक ही नाव को परमिट जारी किया हुआ है। हालांकि एक और नाव का परमिट प्रक्रिया में बताया। जानकारों का कहना है कि हजारों लोगों के चम्बल पार करने की आवाजाही करने के लिए मात्र एक-दो नावों की संख्या ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। इससे क्षमता से अधिक लोगों के नाव में सवार होने से हादसे की आशंका है।
अवैध नावों में ओवरलोड संचालन
रामेश्वर धाम में त्रिवेणी संगम पर मेले के पहले दिन पुलिस -प्रशासन के सामने परिवहन नियमों की अवहेलना करके चम्बल में अवैध नावों का संचालन किया गया। इतना ही नहीं क्षमता से अधिक सवारी भरकर ये नाव चम्बल में दौड़ती दिखी।
पंचायत का दावा पांच नावों का संचालन
परिवहन विभाग ने चाहें एक नाव का परमिट जारी किया है, लेकिन अनियाला सरपंच का दावा है कि मेले के दौरान चम्बल नदी में 5 नावों का संचालन किया जा रहा है। सरपंच कहते हैं कि ये सभी नाव परमिटशुदा है। इनमें दो नावों में यात्रियों के बैठने की क्षमता 35-35, अन्य दो में 15-15 तथा एक नाव में 25 यात्रियों के बैठने की क्षमता है। यात्रियों को नाव में बैठाने से पहले उनका नाम,पता व मोबाइल नम्बर लिखे जा रहे है। ये बात दीगर है कि मेले वाले दिन मंगलवार को ऐसी व्यवस्था कितनी चल पाएगी। सरपंच के अनुसार भीड़ के चलते थोड़ी अव्यवस्था तो रहती है।
भंवर पड़ती है पानी में
इस पर मानसून के देरी से विदा होने के कारण त्रिवेणी संगम , राजस्थान में बहने वाली चम्बल, बनास नदी तथा मध्यप्रदेश में बहने वाली सीप नदी में पानी अधिक है। त्रिवेणी संगम से ही यात्री नाव में बैठते है। वहीं पर नदियों में तेज बहाव होने तथा भंवर पडऩे से हादसे का अंदेशा रहता है। हालांकि प्रशासन ने लोहे की जंजीर यहां लगवाई हैं।
इनका कहना है...
विभाग की ओर से रामेश्वरधाम त्रिवेणी संगम से मध्यप्रदेश आने-जाने के लिए 35 सवारी की क्षमता की एक नाव को परमिट जारी किया है। दूसरी नाव के परमिट का नवीनीकरण प्रक्रिया में है। मेले में एक से अधिक नाव का संचालन हो रहा है तो वह अवैध है। उन पर कार्रवाई की जाएगी।
सियाराम शर्मा, परिवहन निरीक्षक जिला परिवहन अधिकारी सवाईमाधोपुर।
इस पर बार त्रिवेणी संगम पर तीनों नदियों में पानी की अधिकता है। मेले में राजस्थान से मध्यप्रदेश घाट तक परमिट शुदा पांच नावों का संचालन किया जा रहा है। पुलिस प्रशासन से सुरक्षा व्यवस्था मुस्तैद है। यात्रियों को किसी प्रकार की समस्या नहीं आने दी जाएगी।
विजंता मीणा, सरपंच अनियाला।
राजस्थान में दर्शन, एमपी में खरीदारीमेले के दौरान राजस्थान में धार्मिकता का विशेष महत्व है, जबकि एमपी में भरने वाले मेले की व्यावसायिक दृष्टि से विशेष पहचान है। क्षेत्र के ग्रामीण सिंगोरकलां निवासी राधे जाट, गोठउ़ा के बृजमोहन चौधरी, कुरेड़ी के महावीर जाट आदि ने बताया कि मध्यप्रदेश के हजारों लोग राजस्थान में चर्तुभुज नाथ मंदिर व रामेश्वरम के दर्शनों के लिए यहां आते हैं। जबकि राजस्थान के लोग एमपी में लोहे , पीतल आदि बर्तनों सहित अन्य सामान की खरीदारी करने जाते हैं। वहां से रोजमर्रा के सामान की खरीदारी सस्ती दरों में होती है।
Published on:
08 Nov 2022 12:44 pm
