
रणथम्भौर रोड पर सोमवार रात एक खेत में पळाव करता किसान।
सवाईमाधोपुर. रणथम्भौर बाघ परियोजना क्षेत्र से सटे करीब 40 गांवों के किसान रात को जान हथेली पर रखकर खेतों में पळाव करने को मजबूर हैं। वजह ये है कि बिजली निगम अफसरों की अनदेखी के चलते इन गांवों में रात को बिजली आपूर्ति की जा रही है। जबकि रणथम्भौर से सटे इन गांवों में बाघ, पैंथर, भालू व अन्य जंगली जानवरों का मूवमेंट रहता है। ऐसे में किसानों पर हमले की आशंका बनी रहती है। खेतों में आए दिन जंगली जानवर भी आ रहे हैं। अब तक दर्जनों मवेशियों को भी शिकार बना चुके हैं। लेकिन फिर भी निगम अफसरों को किसानों की जान की परवाह नहीं है।
इन गांवों के किसानों पर खतरा
किसानों ने बताया कि सवाईमाधोपुर क्षेत्र के माधोपुरसिंहपुरा, रामसिंहपुरा व जमूल खेड़ा, छारोदा, कुण्डेरा, खवा खांडोज, बसौ खुर्द आदि गांव आते हैं। जबकि खण्डार इलाके में मेई कलां, मेई खुर्द, तलावड़ा, फलौदी क्वारी, टोडरा, खण्डार आदि इलाकों में रात को दस से सुबह चार-पांच बजे तक बिजली दी जाती है। किसान रात को बिजली के इंतजार में खेतों पर ही रहते हैं।
निर्बाध नहीं मिलती बिजली
किसान नेता कानजी मीणा ने बताया कि खेती के लिए रात के फीडर में दी जाने वाली बिजली निर्बाध नहीं मिलती है। कई बार उसमें ट्रिपिंग आती है तो कभी फाल्ट आ जाता है। किसान बिजली के इंतजार में बैठे रहते हैं। रात को कब बिजली आती है, इसका भी कोई समय पता नहीं रहता है।
अधीक्षण अभियंता का गैर जिम्मेदाराना जवाब-तकनीकी परीक्षण करेंगे, कोई पता नहीं कब परीक्षण होगा
इस बारे में निगम के अधीक्षण अभियंता एमसी चौधरी से बात की तो उन्होंने गैर जिम्मेदाराना जवाब दिया। उनका कहना था कि रणथम्भौर क्षेत्र में 40 गांवों में रात को बिजली दी जा रही है। दिन में बिजली देने के लिए तकनीकी परीक्षण करेंगे। तकनीकी परीक्षण कब तक होने के सवाल पर वे उखड़ गए और बोले इसका कोई पता नहीं है। जब होगा तब ही होगा। फिर बोले जयपुर से एप्रुवल मिलेगी तब होगा।
निगम की मनमानी पर सरकार भी खामोश, किसानों में बढ़ रहा आक्रोश
मलारना डूंगर क्षेत्र में अधिक भार के बहाने किसानों को ठिठुरती ठंड में अद्र्ध रात्रि को थ्रीफेज बिजली मिल रही है। वहीं दूसरी तरफ भूरी पहाड़ी जीएसएस पर किसानों को सभी फीडरों पर लगातार दिन में बिजली मिल रही है। एक ही जिले में दो अलग जीएसएस पर अधिकारियों के अलग-अलग नियमों ने मलारना डूंगर क्षेत्र के किसानों में रोष है। किसानों की माने तो वर्तमान में भूरीपहाड़ी जीएसएस से बसव, चोनबास, खिरखड़ा, ढोला की ढाणी, डूंगरी, तालड़ा में सुबह 6 बजे से किसानों को बिजली दी जा रही है। वहीं मलारना डूंगर जीएसएस के खातौली व बालोली फीडर पर रात दस बजे से सुबह 4 बजे तक किसानों को बिजली दी जा रही है। शनिवार को सप्ताह पूरा होने पर मायापुर व बहतेड़ फीडर पर किसानों को रात 10 बजे से बिजली मिलने लगेगी। किसानों में आक्रोश बढ़ रहा है।
रात में जंगली जानवरों का खतरा
रात के समय खेतों में फसल सिंचाई के दौरान किसानों को जंगली जानवरों का भय भी सताता रहता है। किसानों की माने तो मलारना डूंगर उपखण्ड क्षेत्र में कई दिनों से बाघ व पैंथर का मूवमेंट बना हुआ है। इनके अलावा जरख, सियार जैसे वन्यजीव क्षेत्र में अधिकता में रहते है। ऐसे में वन्यजीवों ने पूर्व में भी किसानों पर हमले किए हैं। भूरी पहाड़ी रणथम्भौर नेशनल पार्क से सटा होने से यहां दिन में बिजली सप्लाई की बात कही जा रही है।
परेशानी को नहीं समझ रहे अफसर
बिजली निगम किसानों की परेशानी को नहीं समझ रहा है। जानबूझकर रात को बिजली देते हैं। रणथम्भौर रोड से सटे गांवों में रोज जंगली जानवर खेतों की ओर रुख करते हैं। हर समय किसानों पर खतरा रहता है। बिजली दिन में दी जानी चाहिए।
चिरंजीलाल सैनी, अध्यक्ष, ईडीसी, रामसिंहपुरा
निगम अधिकारी एक रात रुककर तो देखें
रात को जंगली जानवरों को खतरा तो रहता ही है। साथ ही सर्द रात में पळाव करना पहाड़ तोडऩे जैसा है। बिजली निगम का कोई अधिकारी एक रात खेत में रुककर देखे तो उसे हालातों का पता चल जाएगा।
मूलचंद गुर्जर, छाण के किसान
उनकी तरफ से जान जाए तो जाए
निगम को कई बार शिकायत कर चुके हैं कि रात को जंगल जानवर आते हैं। गांवों में दिन में बिजली दी जाए। किसान सर्दी के कारण बीमार हो रहे हैं। वहीं जंगली जानवरों के भय के बीच रात को पळाव करते हैं। लगता है कि उन्हें किसान की परवाह नहीं है।
जितेन्द्र सैनी, पंचायत समिति सदस्य, सवाईमाधोपुर
Updated on:
15 Jan 2019 11:56 am
Published on:
15 Jan 2019 11:56 am
