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रिटायर्ड सैनिक का जज्बा, जमा पूंजी से खोली लाइब्रेरी, बेटियों से लेते हैं सिर्फ एक रुपए का शुल्क

Inspirational Story : सवाईमाधोपुर शहर के एक पूर्व सैनिक हुसैन खान उर्फ हुसैन आर्मी को सेवा का जज्बा जगा तो साल 2020 में सेना से सेवानिवृत्ति के बाद जमा पूंजी से लाइब्रेरी खोल दी और बेटियों से नाम मात्र एक रुपए एवं बेटों से मात्र डेढ़ रुपए माह का शुल्क लेकर जीवन संवारने में लगे हैं।

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Inspirational Story :सवाईमाधोपुर शहर के एक पूर्व सैनिक हुसैन खान उर्फ हुसैन आर्मी को सेवा का जज्बा जगा तो साल 2020 में सेना से सेवानिवृत्ति के बाद जमा पूंजी से लाइब्रेरी खोल दी और बेटियों से नाम मात्र एक रुपए एवं बेटों से मात्र डेढ़ रुपए माह का शुल्क लेकर जीवन संवारने में लगे हैं। इस दौरान लाइब्रेरी में पढ़ने आने वाले हर समाज के बच्चे को फ्री वाईफाई एवं फ्री पुस्तकों की सुविधा दे रहे हैं। अभी तक यहां पर एक हजार से अधिक बच्चे नि:शुल्क शिक्षा का लाभ उठा चुके हैं।

सीधे डॉ. कलाम के गांव पहुंचे और शुरू किया मिशन
बता दें कि हुसैन आर्मी पूर्व राष्ट्रपति एवं मिसाइल मैन डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के जीवन से प्रेरित हैं। डॉ. हुसैन ने बताया कि जब वे सेवानिवृत्त हुए तो सीधे डॉ. कलाम साहब के घर गए। उनके भाई से मिले और उनके जीवन को जाना। इसके बाद 2021 में कलाम की प्रेरणा से ही उन्होंने गरीब व अभावग्रस्त बच्चों की मदद के लिए नि:शुल्क लाइब्रेरी खोली। इसके लिए उन्होंने भवन खरीदकर यहां बच्चों की पढ़ाई के लिए फर्नीचर बनवाया और खुद के पैसों से जयपुर और दिल्ली से किताब लेकर आए और बुक बैंक बनाई। लाइब्रेरी का नाम जय हिंद रखा और इसमें देश के सभी महापुरुष एवं प्रेरणास्रोत व्यक्तियों के फोटो लगाए।

कलाम की बरसी पर लगाते हैं 500 पौधे
डॉ. हुसैन आर्मी एवं उनकी पत्नी नाज हुसैन डॉ. कलाम की बरसी पर हर साल 27 जुलाई को 500 पौधे लगाकर उनका संरक्षण का संकल्प लेते हैं। ये अभी तक दो उद्यान गोद ले चुके हैं और उन्हें हरा-भरा विकसित कर चुके हैं।

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कलाम के लेख को पढ़कर हुए प्रभावित
हुसैन आमी ने बताया कि उन्होंने एक बार कलाम का लेख पढ़ा, तो वे उनसे खासे प्रभावित हुए। सेवानिवृत्ति के बाद वे उनके पैतृक घर रामेश्वरम गए और उन्हें करीब से महसूस किया और जाना कि कलाम साहब की परवरिश किन हालातों में हुई और शिक्षा प्राप्त करने के लिए उन्हें किस तरह के कष्ट उठाने पड़े। बस यहीं से उनका यह मिशन शुरू हो गया और जयहिंद लाइब्रेरी की स्थापना कर दी।

बेटियां बोली, लाइब्रेरी से मिला शिक्षा का संबल लाइब्रेरी में पढ़ने वाली संतरा गुर्जर, शादाब खान ने बताया कि उन्हें इस लाइब्रेरी से आर्थिक संबल मिला। यहां मात्र डेढ़ रुपए देकर वे पढ़ाई कर रही है। ऐसे में वे आर्थिक तंगी के बावजूद अपनी पढ़ाई को सुचारू रूप से आगे जारी रख पा रही हैं।

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