
स्टेशनों के नाम-पट्ट पर तीन भाषाएं हिन्दी, उर्दू और अंग्रेजी में हुआ करती थी।
सवाईमाधोपुर. सवाईमाधोपुर यूं तो बाघों की नगरी के नाम से प्रसिद्ध है, लेकिन इसकी एक ओर विशेषता यहां का रेल परिवहन भी है। दिल्ली मुम्बई रुट हो या दिल्ली जयपुर। सभी ट्रेनों को सवाईमाधोपुर होते हुए ही निकलना पड़ता है। यहां की रेल लाइन का इतिहास भी काफी रोचक है। प्रसिद्ध इतिहासकार प्रभाशंकर उपाध्याय बताते है कि जयपुर के महाराज जब सवाईमाधोपुर आते थे तो जयपुर स्टेट की रेलगाड़ी खासा कोठी में जाती थी। उस रेलगाड़ी पर एक मोनोग्राम लगा होता था, इसमें ऊपर के भाग में अंग्रेजी में 'रेलवेÓ तथा नीचे के हिस्से पर 'जयपुर स्टेट अंकित होता था।
यूं तो सवाईमाधोपुर से गुजरने वाली बड़ी लाइन की स्थापना 1908 में हुई थी और इसे सवाईमाधोपुर से कोटा के मध्य मालगाडिय़ों के लिए एक मई 1909 को तथा उसके दो माह बाद सवारी गाडिय़ों के लिए इसी खंड पर संचालन के लिए खोला गया था। जून 1909 में इस रेल लाइन को सवाईमाधोपुर से मथुरा के लिए खोला गया था। इसके बाद एक अक्टूबर 1909 को दोनों प्रकार की रेलगाडिय़ों के लिए सम्पूर्ण रूप से खोल दिया गया था। 'एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ जयपुर स्टेटÓ की 1908-09 की रिपोर्ट बताती है कि सवाईमाधोपुर खंड से गुजरने वाली रेल लाइनों को बिट्रिश सरकार और जयपुर रियासत के वित्त सहयोग से बनाया गया था। उसमें जयपुर रियासत की ओर से 85 लाख रुपए की भागीदारी की गई थी। हिस्ट्री ऑफ इंडियन रेलवे में लिखा है कि इसे बीबी एण्ड सीआइ रेलवे द्वारा निर्मित किया गया और इसका प्रबंधन रियासत द्वारा किया जाता रहा।
प्रभाशंकर बताते है कि सवाईमाधोपुर से जयपुर(लोहारू) की ओर जाने वाली मीटर गेज की रेल लाइन का निर्माण 1905 में ब्रॉडगेज से पूर्व ही हो गया था और उसे निवाई से सांगानेर (52 किलोमीटर) के संचालन के लिए, उसी साल नवम्बर में खोल दिया गया था। दो वर्ष बाद 1907 में सवाईमाधोपुर से निवाई तक भी रेलगाड़ी दौडऩे लगी थी। उपरोक्त प्रशासनिक रिपोर्ट यह भी बताती है कि इस खंड का निर्माण बंबई-बड़ौदा सेंट्रल रेलवे कंपनी द्वारा जयपुर दरबार से हुए एक समझौते के अंतर्गत किया गया था। 31 मार्च 1936 को जयपुर दरबार ने उस समझौते को निरस्त कर संपूर्ण संचालन अपने अधीन ले लिया था। जिला गजेटियर बताता है कि शुरुआत में सवाईमाधोपुर-सांगानेर खंड पर देवपुरा, ईसरदा, चौथ का बरवाड़ा स्टेशन ही थे। तब स्टेशनों के नाम-पट्ट पर तीन भाषाएं हिन्दी, उर्दू और अंग्रेजी में हुआ करती थी।
Published on:
19 Jan 2019 01:35 pm
