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सवाईमाधोपुर. राजकीय सामान्य चिकित्सालय में अब किडनी के रोगियों को नि:शुल्क डायलिसिस की सुविधा शुरू कर दी है। मेडिकल रिलीफ सोसायटी की ओर से इसके लिए कोलकाता की एक निजी संस्था के साथ करार किया गया है। फिलहाल जिला अस्पताल में डायलिसिस लैब का संचालन पीपीपी मोड पर किया जा रहा है। जिला अस्पताल में रोगियों को यह सुविधा नि:शुल्क उपलब्ध कराई जा रही है।
15 रोगियों का हो रहा उपचार
जिला अस्पताल में संचालित डायलिसिस केन्द्र में वर्तमान में 15 रोगियों का डायलिसिस किया जा रहा है। अस्पताल प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार फिलहाल लोगों को जिला अस्पताल में शुरू हुई डायलिसिस सुविधा की जानकारी कम है ऐसे में लोग कोटा या जयपुर जैसे शहरों की ओर रुख कर रहे हैं जागरुकता बढऩे के साथ ही जिला अस्पताल में डायलिसिस कराने वाले रोगियों की संख्या मे इजाफा होगा।
14 लाख की लगाई दो मशीने
जिला अस्पताल में संचालित डायलिसिस केन्द्र पर फिलहाल सात- सात लाख की दो मशीने लगाई गई हैं। अधिकारियों ने बताया कि रोगियों की संख्या को देखते हुए मश्ीनों की संख्या में और इजाफा किया जाएगा।
एक सप्ताह में साढ़े तीन हजार से अधिक का खर्च
चिकित्सकों ने बताया कि आमतौर पर जिस रोगी की दोनों किडनी खराब हो उसे सप्ताह में तीन बार कम से कम डायलिसिस कराने की आवश्यकता पड़ती है। निजी अस्पतालोंं में एक बार डायलिसिस कराने पर न्यूनतम 1800 रु पए का खर्च आता है ऐसे में रोगी को एक सप्ताह में साढ़े तीन हजार से अधिक डायलिसिस पर खर्च करने पड़ते हैं।
यह होती है डायलिसिस की प्रक्रिया
डायलिसिस में रोगी के खून को डायलाइजर मशीन की सहायता से रोगी के खून को पंप किया जाता है। जब किडनी की कार्यक्षमता कमजोर हो जाती है और शरीर से विषैले पदार्थ पूरी तरह नहीं निकल पाते हैं क्रिएटिनिन व यूरिया जैसे पदार्थो की शरीर में अधिकता हो जाती है तो डायलिसिस से खून को साफ किया जाता है।
इसलिए पड़ती है डायलिसिस की जरूरत
क्रॉनिक रिनल डिजीज या क्रॉनिक कि डनी डिजीज के कारण क्रिएटिनिन क्लियरेंस रेट शरीर में 15 फीसदी या उससे कम रहने पर डायलिसिस कराना पड़ता है। किडनी की समस्या होकिडनी के रोगियों को मिलेगा संबल
जिला अस्पताल में शुरू हुई डायलिसिस की सुविधा
उपचार के लिए नहीं जाना पड़ेगा बड़े शहरों में
सवाईमाधोपुर.
राजकीय सामान्य चिकित्सालय में अब किडनी के रोगियों को नि:शुल्क डायलिसिस की सुविधा शुरू कर दी है। मेडिकल रिलीफ सोसायटी की ओर से इसके लिए कोलकाता की एक निजी संस्था के साथ करार किया गया है। फिलहाल जिला अस्पताल में डायलिसिस लैब का संचालन पीपीपी मोड पर किया जा रहा है। जिला अस्पताल में रोगियों को यह सुविधा नि:शुल्क उपलब्ध कराई जा रही है।
15 रोगियों का हो रहा उपचार
जिला अस्पताल में संचालित डायलिसिस केन्द्र में वर्तमान में 15 रोगियों का डायलिसिस किया जा रहा है। अस्पताल प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार फिलहाल लोगों को जिला अस्पताल में शुरू हुई डायलिसिस सुविधा की जानकारी कम है ऐसे में लोग कोटा या जयपुर जैसे शहरों की ओर रुख कर रहे हैं जागरुकता बढऩे के साथ ही जिला अस्पताल में डायलिसिस कराने वाले रोगियों की संख्या मे इजाफा होगा।
14 लाख की लगाई दो मशीने
जिला अस्पताल में संचालित डायलिसिस केन्द्र पर फिलहाल सात- सात लाख की दो मशीने लगाई गई हैं। अधिकारियों ने बताया कि रोगियों की संख्या को देखते हुए मश्ीनों की संख्या में और इजाफा किया जाएगा।
एक सप्ताह में साढ़े तीन हजार से अधिक का खर्च
चिकित्सकों ने बताया कि आमतौर पर जिस रोगी की दोनों किडनी खराब हो उसे सप्ताह में तीन बार कम से कम डायलिसिस कराने की आवश्यकता पड़ती है। निजी अस्पतालोंं में एक बार डायलिसिस कराने पर न्यूनतम 1800 रु पए का खर्च आता है ऐसे में रोगी को एक सप्ताह में साढ़े तीन हजार से अधिक डायलिसिस पर खर्च करने पड़ते हैं।
यह होती है डायलिसिस की प्रक्रिया
डायलिसिस में रोगी के खून को डायलाइजर मशीन की सहायता से रोगी के खून को पंप किया जाता है। जब किडनी की कार्यक्षमता कमजोर हो जाती है और शरीर से विषैले पदार्थ पूरी तरह नहीं निकल पाते हैं क्रिएटिनिन व यूरिया जैसे पदार्थो की शरीर में अधिकता हो जाती है तो डायलिसिस से खून को साफ किया जाता है।
इसलिए पड़ती है डायलिसिस की जरूरत
क्रॉनिक रिनल डिजीज या क्रॉनिक कि डनी डिजीज के कारण क्रिएटिनिन क्लियरेंस रेट शरीर में 15 फीसदी या उससे कम रहने पर डायलिसिस कराना पड़ता है। किडनी की समस्या होने के कारण शरीर में पानी इक्कठा होने के कारण भी समस्या हो जाती है ऐसे में डायलिसिस करना पड़ता है। शरीर में पोटेशियम की मात्रा बढऩे और दिल की धड़कने अनियमित होने पर और दवाओं से लाभ नहीं होने पर भी डायलिसिस का सहारा लेना पड़ता है।
ने के कारण शरीर में पानी इक्कठा होने के कारण भी समस्या हो जाती है ऐसे में डायलिसिस करना पड़ता है। शरीर में पोटेशियम की मात्रा बढऩे और दिल की धड़कने अनियमित होने पर और दवाओं से लाभ नहीं होने पर भी डायलिसिस का सहारा लेना पड़ता है।
Published on:
13 May 2019 11:55 am
