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Mother’s Day Success Story: मजदूरी कर बेटी को बनाया RAS, इन माताओं के त्याग ने भी बेटियों के लिए लिखी नई इबारत

Mother’s Day Special: मदर्स डे पर सवाईमाधोपुर जिले की माताएं केवल परिवार की जिम्मेदारी निभाने वाली स्त्रियां नहीं रहीं, बल्कि संघर्ष और साहस की जीवित मिसाल बन गईं। पति की असमय मौत, आर्थिक तंगी और सामाजिक दबाव के बीच भी उन्होंने हार नहीं मानी।

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Mother's Day Success Story

आरएएस सरस्वती मां के साथ व मां के साथ व्याख्याता बेटी रानू। फोटो: पत्रिका शर्मा

सवाईमाधोपुर। मदर्स डे पर सवाईमाधोपुर जिले की माताएं केवल परिवार की जिम्मेदारी निभाने वाली स्त्रियां नहीं रहीं, बल्कि संघर्ष और साहस की जीवित मिसाल बन गईं। पति की असमय मौत, आर्थिक तंगी और सामाजिक दबाव के बीच भी उन्होंने हार नहीं मानी।

इन माताओं ने अपने त्याग और परिश्रम से बेटियों को पढ़ाया‑लिखाया, उन्हें सरकारी नौकरी तक पहुंचाया और समाज को यह सिखाया कि कठिन हालात में मां का साहस ही बच्चों के भविष्य की सबसे मजबूत नींव है। जब जीवन अंधेरे में डूबा हो, तब मां का संघर्ष ही रोशनी बनकर दूर तक चमकता है।

उन माताओं को सलाम है जिन्होंने अपने जीवन की कठिनाइयों को अवसर में बदलकर बेटियों को नई पहचान दिलाई और समाज को प्रेरणा दी। पत्रिका टीम ने शनिवार को जिले की ऐसी ही कुछ माताओं से बातचीत की, जिन्होंने पति की असमय मौत, आर्थिक तंगी और सामाजिक दबाव के बीच बेटियों को पढ़ा लिखाकर उनका जीवन संवारा।

मजदूरी से बेटी को बनाया अफसर

गोठड़ा खण्डार निवासी किशोरी देवी के पति बलबीर सिंह चौधरी आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी थे। वर्ष 2020 में उनकी मौत हो गई। इसके बाद किशोरी देवी ने मजदूरी कर बेटी सरस्वती चौधरी की पढ़ाई का जिम्मा उठाया। गांव से बेटी की पढ़ाई के लिए वह खण्डार आकर रहने लगीं। कठिन हालात में भी उन्होंने बेटी को हर सुविधा दी।

सरस्वती की मेहनत रंग लाई। उसने 2023 में आरएएस परीक्षा में लॉविजन कैटेगरी में 14वीं रैंक हासिल की और जिला रोजगार नियोजन विभाग में प्रशिक्षण शुरू किया। इसके बाद 2024 की आरएएस परीक्षा में उसका चयन हो गया। किशोरी देवी ने दिखा दिया कि मां का त्याग और परिश्रम बेटी को अफसर बना सकता है।

दुखों के पहाड़ पर हिम्मत की चढ़ाई

खण्डार कस्बे के पटेल मोहल्ला निवासी गुड्डी देवी शर्मा के जीवन में 26 अप्रेल 2021 को बड़ा हादसा हुआ। पति दिलीप शर्मा की मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। दिलीप पहले लोडिंग टैंपो चलाकर परिवार का भरण‑पोषण करते थे। हालात बेहद कमजोर थे। लेकिन गुड्डी देवी ने हिम्मत नहीं छोड़ी। उन्होंने बेटियों रानू और पूजा को पढ़ाया।

नतीजा यह हुआ कि रानू शर्मा का चयन 9 अक्टूबर 2023 को प्रथम श्रेणी व्याख्याता के पद पर हुआ। इसके बाद छोटी बेटी पूजा शर्मा भी पीछे नहीं रही। 6 दिसम्बर 2023 को उसका चयन द्वितीय श्रेणी वरिष्ठ अध्यापक के पद पर हुआ। गुड्डी देवी ने साबित कर दिया कि मां का संघर्ष बच्चों के भविष्य को नई दिशा दे सकता है।