
सवाईमाधोपुर. जिले को अमरूद की खेती से मिली पहचान के बाद अब किसानों की नजर अनार पर है। अमरूद की तरह ही किसान अनार की खेती को बढ़ावा देने के प्रयास में जुटे हुए हैं। ये प्रयोग सफल रहा तो निकट भविष्य में यहां अनार की भी बम्पर पैदावार होने लगेगी। उद्यान विभाग ने भी यहां के वातावरण को अनार उत्पादन के लिए अनुकूल बताया हैं। विभाग ने किसानों को अनार की खेती के लिए प्रेरित किया है।
सितम्बर व अक्टूबर में उपयुक्त समय
उद्यान विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अनार के पेड़ों पर वर्ष में दो बार फूल व फल आते हैं। एक तो सितम्बर व अक्टूबर में व दूसरा मई व जून में आते हैं। सितम्बर व अक्टूबर में फल व फूल प्राप्त करने का उपयुक्त समय है। हालांकि मई व जून में गर्मी होने के कारण तथा पानी पर्याप्त नहीं मिलने से फल खराब हो जाते हैं।
एक पौधे पर लगता 25 से 30 किलो फल
अधिकारियों ने बताया कि एक हैक्टेयर क्षेत्र में करीब चार सौ पौधे लगाए जा सकते हैं। ये पौधे पांच-पांच मीटर की दूरी पर लगते हैं। उद्यान विभाग के पास वर्ष 2011-12 में करीब 50 हैक्टेयर क्षेत्र में अनार के पौधे लगाने का लक्ष्य भी आया था, लेकिन विभागीय अधिकारियों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। इसके बाद कोई लक्ष्य नहीं आए। वहीं इस बार अनार के पौधे लगाने का लक्ष्य मिलने की उम्मीद है। हालांकि अनार उत्पादन करने में किसानों को सबसे बड़ी परेशानी पौधे मिलने की आती है। ये पौधे यहां तैयार नहीं होते हैं। गुजरात या महाराष्ट्र से एक विशेष किस्म के पौधे तैयार होते हैं। विभाग किसानों को यहां पर पौधे उपलब्ध करा दे तो पैदावार को बढ़ावा मिलेगा।
जिले में यहां हो रहे प्रयोग
अधिकारियों ने बताया कि अनार की खेती का प्रयोग जिले के पीपलदा, सेलू व खण्डार आदि इलाके में हो रहा है। पीपलदा में रतनलाल आजाद ने दो सौ से ज्यादा पौधे अपने दो बीघा के खेेत में लगाए हैं। ये पौधे लग गए और जल्द ही इनसे अब फल प्राप्त होने वाले हैं। पौधों के बढ़वार से काफी उत्साहित हैं। इसी प्रकार सेलू में हाबूलाल ने करीब एक बीघा में अनार की खेती शुरू की है। खण्डार के 17 मील क्षेत्र में भी कुछ किसानों ने अनार के पौधे लगाए हैं। अब फल की गुणवत्ता से ही तय होगा कि अनार का उत्पादन उपयुक्त है या नहीं।
देश में कहां है अधिक पैदावार
उद्यान अधिकारियों का कहना है कि देश में सबसे ज्यादा अनार की पैदावार गुजरात व महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों में होती है। अनार की पौध भी वहां पर नर्सरियों में तैयार की जाती है। किसानों को चाहिए कि वे इन नर्सरियों में तैयार अनार का पौधा ही खेतों में लगाएं। क्योंकि पैदावार अच्छी मिलती है।
जिले में अनार की खेती के लिए प्रचुर संभावनाए हैं। कई किसानों ने इसका प्रयोग भी किया है। हालांकि अभी कम ही किसान इसकी खेती कर रहे है।
चंद्रप्रकाश बढ़ाया, सहायक निदेशक, उद्यान विभाग, सवाईमाधोपुर।
Published on:
21 Sept 2023 12:33 pm
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