
शावक मां के साथ नजर
सवाईमाधोपुर . वाइल्ड लाइफ नेचर में ऐसा नजारा बहुत ही दुर्लभ होता है कि बाघिन अपने शावकों को जन्म देने के बाद दस दिन में ही बाहर निकाल लेती हो और पर्यटकों या वन विभाग के स्टाफ को उनके दीदार भी हो जाते हों, लेकिन रणथम्भौर के इतिहास में पहली बार ऐसा नजारा गुरुवार को देखने को मिला।
बाघिन ऐरोहेडेड के शावक सिर्फ दस दिन के शावक पर्यटकों एवं वनकर्मियों को नजर आए। बाघिन शावकों को दूध पिला रही थी। साथ उन्हें जीभ से चाटकर दुलार भी कर रही थी। वनाधिकारियों का कहना है कि रणथम्भौर में ऐसा पहली कभी नहीं हुआ की बाघिन के बच्चे जन्म के इतने जल्द दिखाई दिए हो।
बाघ 86 के साथ रही ज्यादा
जानकारों का कहना है बाघिन ऐरोहेडेड बाघ टी-86 के साथ ज्यादा रही थी। बाघ आमाघाटी क्षेत्र में विचरण करता है। माना जा रहा है कि ऐरोहेडेड बाघिन के शावकों का पिता भी टी-86 हो सकता है।
मछली के फेमेली ट्री का हिस्सा...
बाघिन ऐरोहेडेड भी मछली फेमेली ट्री का ही हिस्सा है। मछली की बेटी टी-19 थी। टी-19 की बेटी ऐरोहेडेड है। वहीं ऐरोहेडेड ने दो बच्चों को जन्म देकर पहली बार मां बनी है। इस तरह मछली फेमेली ट्री से जुड़े बाघों की संख्या 50 से बढ़कर 52 हो गई है।
अक्सर तीन से चार माह में दिखते हैं...
वनाधिकारियों का कहना है कि जब भी बाघिन शावकों को जन्म देती है तो जन्म के करीब ढाई से तीन माह तक छिपाकर रखती है। इस दौरान इंसान तो दूर अन्य वन्यजीवों की परछाई तक उन पर पडऩे नहीं देती है। रणथम्भौर में अब तक जो भी शावक दिखाई दिए हैं वे अमूमन तीन से चार माह बाद ही पर्यटकों एवं वनकर्मियों को दिखे हैं। तब तक बच्चे उछल कूद भी करने लग जाते हैं।
रणथम्भौर में पहली बार इतने कम दिन के शावक मां के साथ नजर आए हैं। ऐसा नजारा पहले कभी नहीं देखा गया।
वाईके साहू, सीसीएफ, रणथम्भौर बाघ परियोजना
Published on:
23 Feb 2018 01:55 pm
बड़ी खबरें
View Allसवाई माधोपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
