
sawaimadhopur
सवाईमाधोपुर. रणथम्भौर अभयारण्य की सीमा के नजदीक स्थित होटलों से निकलने वाले कचरे को अभयारण्य की सीमा में ही फेंका जा रहा है। इससे अभयारण्य की जैव विविधता और पारिस्थिकि तंत्र पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। यह खुलासा वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट आरएस चुण्डावत व उपमन्यू राजू द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट से हुआ है। यह रिपोर्ट वन अधिकारियों सहित स्थानीय जिला प्रशासन को सौंपी गई है।
महज चार प्रतिशत होटेलियर्स कर रहे बॉयोवेस्ट मैनेजमेंट
रिपोर्ट में बताया गया है कि रणथम्भौर में पूर्व में 102 होटल थे जो अब बढ़कर दुगने से भी अधिक हो गए हैं। इनमें महज चार प्रतिशत होटल संचालक ही बॉयोवेस्ट व प्लास्टिक वेस्ट का मैनेजमेंट कर रहे हैं।
गांवों में फेंक रहे कचरा
रिपोर्ट के अनुसार रणथम्भौर के 89 प्रतिशत होटल कचरे को पास के गांवों में ही डाल रहे हैं। वहीं जिला मुख्यालय के पास स्थित होटलों से निकलने वाले कचरे को नगर परिषद की ओर से डंप किया जा रहा है।
11 प्रतिशत लॉज जला रहे प्लास्टिक
रिपोर्ट के अनुसार रणथम्भौर में प्लास्टिक के कचरे व डिस्पोजेबल कचरे को सड़क किनारे ही जला रहे हैं। वहीं कुछ होटल संचालक प्लास्टिक के कचरे को जमीन में दबा रहे हैं।
वन्यजीवों पर पड़ता है दुष्प्रभाव
रिपोर्ट की माने तो प्लास्टिक से निकलने वाले धुएं से वन्यजीवों की सेहत पर दुष्प्रभाव पड़ता है। पॉलिथिन आदि के सेवन से वन्य जीवों को कई प्रकार की बीमारियां होने की आशंका है। इसके बाद भी इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। गौरतलब है कि गत दिनों प्रधान वन संरक्षक व मुख्यवन्य जीव प्रतिपालक जीवी रेड्डी ने राष्ट्रीय उद्यान व अभयारण्यों में प्लास्टिक लेकर प्रवेश करने पर रोक लगाई थी और जुर्माने का प्रावधान किया था।
इनका कहना है....
मुझे रिपोर्ट के बारे में जानकारी नहीं है। प्रदूषण को कम करने के लिए अभयारण्यों में प्लास्टिक के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई है। आगे भी सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं।
- जीवी रेड्डी, प्रधान वन संरक्षक व मुख्यवन्य जीव प्रतिपालक, जयपुर।
Published on:
05 Oct 2018 06:10 am
