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सवाईमाधोपुर.
राजस्थान कौशल आजीविका विकास निगम(आरएसएलडीसी) का कामकाज कानूनी दावं पेंच में फसता नजर आ रहा है। निगम के सात जिलों के जिला प्रबंधक ने निगम के खिलाफ उच्च न्यायालय की शरण ले रखी है। उन्होंने स्थनांतरण के विरोध में न्यायालय से स्टे भी ले रखा है लेकिन इसके बाद भी निगम के उच्च अधिकारी उन्हें काम करने का अधिकार नहीं दे रहे हैं। इससे कामकाज प्रभावित हो रहा है।
यह है मामला
पूर्व में आरएसएलडीसी के सवाईमाधोपुर सहित सात जिलों के जिला प्रबंधकों ने स्थनांतरण के विरोध में न्यालयलय की शरण ली थी। इसके बाद निगम ने कुछ माह पूर्व नई निविदा जारी कर निगम में जिला प्रबंधक का पद ही समाप्त कर दिया था और जिला प्रबंधक की जगह सभी जिलों में जिला कौशल समन्वयक नियुक्त कर दिए थे।
इसके बाद कोर्ट ने मामले में निर्णय होने के तक सातों जिलों में कार्यरत जिला प्रबंधकों को यथावत रखने के आदेश दिए थे इसके बाद निगम अधिकारियों ने जिला प्रबंधकों को हटाया तो नहीें है लेकिन वहां जिला कौशल समन्वयक भी नियुक्त कर दिए हैं।
नम्बर व आईडी की बंद
निगम के जिला प्रबंधकों को हटाया तो नहीें है लेकिन उन सभी के सीयूजी नम्बर व आईडी बंद कर दी है साथ ही जिला कौशल समन्वयकों को आईडी जारी कर दी है।
कोर्ट ने यह दिया था आदेश
गत सुनवाई के दौरान न्यायालय ने निगम को आदेश दिया था कि अगली सुनवाई तक सातों जिला प्रबंधकों को यथावत पद पर बरकरार रखा जाए और इनका कार्यक्षेत्र व अधिकार भी यथावत रहे लेकिन निगम अधिकारी जिला प्रबंधकों के कार्य क्षेत्र व अधिकार सिमित कर रहे हैं। इस मामले में अब अगली सुनवाई 24 अक्टूबर को होगी।
इनका कहना है....
यह मामला कोर्ट में है। एक नई कंपनी जीटी के कार्मिक काम करी रहे हैं। यह कंपनी का निजी मामला है। इससे हमारा कोई लेना देना नहीं है।
- अजय कौशिक, महाप्रबंधक, आरएसएलडीसी, सवाईमाधोपुर।
मामला कोर्ट मेें है अब तक मेरे मुवकिलों को न्यायालय से यथा स्थिति का स्टे ऑडर मिला हुआ है।
- अखिल सिमलौत्ते, वकील, परिवादी पक्ष।
Published on:
08 Oct 2018 11:31 am
