
tiger
सवाई माधोपुर रणथंबोर राष्ट्रीय उद्यान में शिफ्टिंग की प्रक्रिया तेज हो गई है रणथंबोर से सरिस्का भेजने के लिए बाघ के चयन के लिए मंगलवार को वन अधिकारियों की टीम रणथंबोर राष्ट्रीय उद्यान में विभिन्न क्षेत्रों में बाघों की ट्रैकिंग करती नजर आई इस दौरान एनटीसीए और डब्लू आई आई के सदस्य भी वन अधिकारियों के साथ रहे
टल भी सकता है मामला
वन अधिकारियों द्वारा रणथंबोर से बातचीत करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है लेकिन सूत्रों के अनुसार रणथंबोर से बाद शिफ्टिंग एक बार फिर अटक सकती है कारण है मौसम का बदल जाना सूत्रों की माने तो अब गर्मियां शुरू हो गई हैं जैसे जैसे समय बीतता जाएगा गर्मियों में इजाफा होता जाएगा ऐसे में बाघ को ट्रेंकुलाइज करना खतरे भरा रहेगा ऐसे में वन विभाग के अधिकारी फिलहाल गर्मियों में शिफ्टिंग को टाल भी सकते हैं हालांकि इस संबंध में अभी वन विभाग की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है
इनमे से कोई एक बाघ भेजा जा सकता है सरिस्का
टी-75
नर
यह रणथंभौर में अपने पैर नहीं जमा पा रहा है। जंगल के जिस इलाके में यह पला-बड़ा हुआ वहां अब दूसरे नर बाघों ने अपना आधिपत्य जमा लिया है। नर बाघों से संघर्ष से बचने के लिए यह ीमा में या बाहर ही रह रहा है। इन दिनों इसका मूवमेंट खंडार इलाके के तलावड़ा में देखा जा रहा है। विभाग इसे भी सुरक्षित आवास क्षेत्र देना चाहता है।
टी-66
नर
युवा बाघ टी-66 लंबे समय से खंडार किला क्षेत्र में विचरण कर रहा है। बाघ जंगल में दूसरे इलाके में जाने का प्रयास करे तो रास्ते में कई दूसरे नर बाघों से संघर्ष होता है। ग्रामीणों के लिए आफत खड़ी करता है। ऐसे में यह बाघ आबादी एवं जंगल के बीच एक पतली लकीर में फंस कर रह गया है।
टी-95
नर
यह बाघ बहुत ज्यादा संवेदनशील जोन में रह रहा है। वैसे तो इसके पास आवास के लिए जंगल है, लेकिन उस जंगल में दूसरे दबंग नर बाघों की मौजूदगी इसे दुम दबाने पर मजबूर कर रही है। गंभीर बात यह है कि यह जिला मुख्यालय एवं रणथंभौर रोड वाले इलाके में झूमरबावड़ी के जंगल में यहां-वहां भाग रहा है।
यह है चयन का आधार
रणथंभौर से सरिस्का भेजे जाने वाले बाघों का चयन करने के लिए वन विभाग एवं एनटीसीए ने कुछ गाइडलाइन तय कर रखी है। इसके तहत रणथंभौर से ऐसे किसी भी बाघ को यहां से नहीं हटाया जाएगा जो इस जंगल में व्यवस्थित तरीके से रह रहा है। यहां से वे ही बाघ स्थानांतरित किया जयेगा जो आवास क्षेत्र नहीं मिलने के कारण यहां-वहां भटक रहा हो हैं और आबादी के करीब होने के कारण आने वाले दिनों में स्वयं एवं ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है
Updated on:
03 Apr 2019 11:18 am
Published on:
03 Apr 2019 11:18 am
