तौल कांटे रहे सूने, दूसरे दिन भी नहीं पहुंचे किसान

तौल कांटे रहे सूने, दूसरे दिन भी नहीं पहुंचे किसान

Subhash Pal Mishra | Publish: Oct, 13 2018 03:31:28 PM (IST) Sawai Madhopur, Rajasthan, India

www.patrika.com/rajasthan-news

सवाईमाधोपुर. जिले में समर्थन मूल्य पर होने वाली उड़द खरीद की व्यवस्थाएं पूरी तरह से गड़बड़ाई हुई है। पंजीयन के बाद किसानों को खरीद केन्द्र पर आने का मैसेज नहीं मिलने से एक भी किसान केन्द्र पर अपनी जिंस लेकर नहीं पहुंचा। ऐसे में दूसरे दिन शुक्रवार को भी तौल-कांटे सूने पड़े रहे है। इससे एक बोरी भी जिंस की खरीद नहीं हो सकी। जिला मुख्यालय चकचैनपुरा स्थित फल-सब्जी मण्डी में दो दिन से किसानों के अभाव में मण्डी में शुक्रवार को सूनापन रहा। यहां गुरुवार से समर्थन मूल्य पर उड़द की खरीद शुरू हो गई है, लेकिन किसानों के पास मैसेज नहीं आया, जिससे वे जिंसों की तुलाई कराने नहीं पहुंच रहे है। यहां राजफेड की ओर से क्रय-विक्रय सहकारी समितियों से उड़द की खरीद की जानी है। इस वर्ष उड़द का समर्थन मूल्य 5600 रुपए प्रति क्विंटल रखा गया है। समर्थन मूल्य खरीद के लिए खण्डार, सवाईमाधोपुर, चौथकाबरवाड़ा, गंगापुरसिटी व बौंली में केन्द्र बनाए गए है। सवाईमाधोपुर के अलावा अन्य केन्द्रों पर किसानों के पास मैसेज नहीं आने से वे तुलाई कराने नहीं पहुंचे।

किसानों का इंतजार
राजस्थान क्रय-विक्रय संघ लिमिटेड जयपुर से निर्देश के अनुसार जिले की 6 ही क्रय-विक्रय सहकारी समितियों ने बैनर व तौल लगाकर तैयारियां पूरी करते हुए शुक्रवार को किसानों का इंतजार किया, लेकिन एक भी केन्द्र पर शाम तक एक भी किसान केन्द्र पर नहीं पहुंचा। ऐसे में केन्द्र पर कर्मचारी इंतजार करते दिखे। जिला मुख्यालय पर अमरूद फल मण्डी में बारदाना, तौल कांटे, हम्माल की व्यवस्था हो चुकी है, लेकिन किसानों के पास मैसेज नहीं आने से तुलाई नहीं हो सकी।

उद्घाटन तक नहीं
जिला मुख्यालय अमरूद फल मण्डी में किसानों के नहीं आने से अब तक खरीद केन्द्र का उद्घाटन तक नहीं हो सका। स्थिति ये थी कि केन्द्र पर कांटे जमीन में रखे हुए थे। पल्लेदारों ने एक कांटे को तो बाद में खड़ा किया।

ये भी है मुख्य कारण
जिले में गत दिनों अतिवृष्टि से खराब हुई उड़द-मूंग, बाजरा फसल में खराबे से अब तक किसानों की फसल की गिरदावरी नहीं हो सकी है। ऐसे में कई किसान गिरदावारी के कारण खरीद केन्द्रों पर जिन्सों को लेकर नहीं पहुंच रहे हैं। ऐसे में किसानों की फसल ऑनलाइन नहीं हो सकी है। वे सरकार को अपनी उपज नहीं बेच पाएंगे।

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