
सवाईमाधोपुर। रणथंभौर बाघ परियोजना में शावक की मौत हो गई। इसमें आशंका जताई जा रही है कि नॉन पर्यटन क्षेत्र के बाघ ने हमला कर दिया। इससे यह समझा जा रहा है कि बाघ शाव को अपनी टेरेटरी में बर्दाश्त नहीं कर सका।
हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही पूरा मामला सामने आएगा। वहीं शावक के मुंह पर रक्त भी दिखाई दिया। इससे हमले की आशंका बलवान हुई है। रणथभौर के भदलाव वन क्षेत्र में बाघिन सिद्धि के एक मेल शावक का शव मिलने से पशुप्रेमियों में शोक दौड़ गया।
विभाग से मिली जानकारी के अनुसार बाघिन सिद्धि यानी टी-125 रणथंभौर की प्रसिद्ध बाघिन टी-84 यानी बाघिन ऐरोहेड की संतान है। पूर्व में भी बाघिन के मां बनने की खबरें सामने आई थी। लेकिन शावक नजर नहीं आए थे। वन अधिकारियों की मानें तो जिस शावक की मौत हुई है, उसकी उम्र आठ माह की थी।
बाघिन सिद्धि और उसके शावकों का मूवमेंट वर्तमान में कुंडेरा रेंज के दूध बावड़ी, पदम लेह आदि इलाकों में रहता है। उससे पूर्व में बाघिन सिद्धि का मूवमेंट रणथंभौर के जोन 3 और 4 में रहता था। वहीं एक बार बाघिन ने अपना आशियाना रणथंभौर के नॉन पर्यटन क्षेत्र कुंडेरा रेंज में भी बना लिया था।
रणथंभौर में एक शावक की मौत का मामला सामने आया है। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों का स्पष्ट खुलासा हो सकेगा।
डॉ. राजीव गर्ग, पशु चिकित्सक, सवाईमाधोपुर
यह टेरिटोरियल फाइट नहीं है। कई बार फीमेल के पास मेल टाइगर का मूवमेंट रहता है। वन विभाग की टीम ने दो दिन पहले इस जोन में बाघ 2311 का मूवमेंट देखा था। यह नोन पर्यटन जोन का टाइगर है। इसलिए आशंका जताई जा रही है कि मेल टाइगर ने इसे मारा हो।
अनूप के आर, सीसीएफ, रणथभौर बाघ परियोजना, सवाईमाधोपुर
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Published on:
10 Mar 2025 01:14 pm

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