
water cricus
सवाईमाधोपुर. रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान में गर्मी के चलते पेयजल संकट गहराता जा रहा है। गर्मी के कारण रणथम्भौर में प्राकृतिक जलस्रोत सूखने लगे हैं। कई प्राकृतिक जलस्रोतों में नाम मात्र का पानी बचा है। इसके चलते जंगल में वन्यजीवों को पानी की कमी के चलते परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।हालांकि वन विभाग की ओर से वन्यजीवों को पानी उपलब्ध कराने के लिए टैंकरों से जलापूर्ति कराई जा रही है। वहीं रणथम्भौर के सवाईमानसिंह सेंचुरी के इलाके में भी अभी से जल संकट गहराता नजर आ रहा है। यहां के अधिकाश जलस्त्रोत पानी की कमी के चलते सूख गए हैं।
इन क्षेत्रों में टैंकरों से डला रहे पानी
बारिश नहीं होने के कारण जंगल में पानी की कमी को पूरा करने के लिए विभाग की ओर से टैंकरों का सहारा लिया जा रहा है। विभाग की ओर से जोन तीन में मण्डूक में, चार व पांच में तामाखान के पास टैंकरों से पानी डलवाया जा रहा है। इसके साथ फलौदी रेंज में भी टैंकरों से पानी डलवाया जा रहा है। साथ ही रणथम्भौर के बाहरी जोन सात, आठ व दस में जलापूर्ति कराई जा रही है।
20-25 से टैंकर प्रतिदिन जा रहे
विभाग की ओर से रणथम्भौर के कई इलाकों में टैंकरों से पानी भरवाया जा रहा है। इसके लिए विभाग की ओर से प्रतिदिन 20 से 25 से टैंकर भिजवाए जा रहे है। वन अधिकारियों ने बताया कि अभी गर्मी की शुरुआत है अभी से ही जंगल में पानी की कमी हो गई है ऐसे में मई- जून में जब गर्मी अपने पूरे चरम पर होगी तब यह समस्या और भी विकट हो सकती है।
दस दिनों से चल रही आपूर्ति
वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार रणथम्भौर में गर्मी में पानी की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए गत दस दिनों से लगातार टैंकरों से आपूर्ति की जा रही है। हालांकि इस बार आचार संहिता के चलते इसके लिए टेण्डर नहीं किए गए हैं लेकिन गत वर्ष की तुलना में इस बार कम दर भी टैंकरों से जलापूर्ति की जा रही है। इससे पूर्व फरवरी माह में भी रणथम्भौर के इण्डेला आदि पहाड़ी क्षेत्रों के पास टैंकरों से जलापूर्ति की गई थी।
यह है आंकड़ो का गणित....
10 जोन है रणथम्भौर में
6 रेंज में बटा है रणथम्भौर
10 से अधिक वाटर हॉल व प्वाइंट है एक जोन में
100 से अधिक वाटर प्वाइंट है रणथम्भौर में
20 से अधिक टैंकरो से प्रतिदिन हो रही जलापूर्ति
इनका कहना है....
रणथम्भौर में गर्मी को देखते हुए टैंकरों से जलापूर्ति शुरू कर दी गई है। फिलहाल प्रतिदिन लगभग बीस टैंकर भिजवाए जा रहे हैं।
- मुके श सैनी, उपवन संरक्षक, रणथम्भौर बाघ परियोजना, सवाईमाधोपुर।
Updated on:
27 Apr 2019 12:10 pm
Published on:
27 Apr 2019 12:10 pm
