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फूड प्रोसेसिंग यूनिट … विकास और रोजगार का नया रोडमैप

केन्‍द्रीय वाणिज्‍य और कृषि मंत्रालय संयुक्‍त रूप से सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्योग (एमएसएमई) की श्रेणी में 'एक जिला एक उत्‍पाद योजना' में निवेश को बढ़ावा देकर विकास और रोजगार का नया रोडमेप तैयार कर रहे हैंÕइससे हर जिले का अपना निर्यात हब होगा और सर्वश्रेष्‍ठ उत्‍पाद को प्रोत्‍साहन मिलेगा।

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सवाईमाधोपुर: आठ सौ करोड़ का सालाना कारोबार,धौलपुर: आलू उत्पादन से 180 करोड़ का कारोबार

सवाईमाधोपुर: आठ सौ करोड़ का सालाना कारोबारराजस्‍थान में सर्वाधिक 75 प्रतिशत अमरूदों की बागवानी सवाईमाधोपुर जिले में होती है। ,धौलपुर: आलू उत्पादन से 180 करोड़ का कारोबार

फूड प्रोसेसिंग यूनिट ...
विकास और रोजगार का नया रोडमैप

एक जिला एक उत्‍पाद योजना से चंबल अंचल के विकास की अपार संभावनाएं...

भरतपुर/सवाईमाधोपुर/धौलपुर/करौली

केन्‍द्रीय वाणिज्‍य और कृषि मंत्रालय संयुक्‍त रूप से सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्योग (एमएसएमई) की श्रेणी में 'एक जिला एक उत्‍पाद योजना' में निवेश को बढ़ावा देकर विकास और रोजगार का नया रोडमेप तैयार कर रहे हैं। हर उत्‍पाद का क्‍लस्‍टर तैयार कर निर्यात को बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। इससे हर जिले का अपना निर्यात हब होगा और सर्वश्रेष्‍ठ उत्‍पाद को प्रोत्‍साहन मिलेगा।
चंबल अंचल प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना के लिहाज से अपार संभावनाओं वाला क्षेत्र है। भरतपुर के सरसों उत्‍पाद, सवाईमाधोपुर में अमरूद, करौली में तिल्ली और धौलपुर में आलू योजना में शामिल हैं। इन जिलों में अब वहां के प्रमुख उत्‍पादों से संबंधित छोटी-बड़ी खाद्य प्रसंस्करण औद्योगिक इकाइयों की स्थापना की जा सकती हैं। सरकार की मंशा के अनुरूप किसान भी आगे आएं तो छोटे व मझौले किसानों की आर्थिक स्थिति में बदलाव आ सकता है और क्षेत्र की तस्‍वीर बदल सकती है। इससे रोजगार बढ़ने के साथ आर्थिक समृद्धि के द्वार भी खुलेंगे। इसी संदर्भ में स्‍थानीय उत्‍पादों के जरिये विकास की संभावनाएं खोलती रमेश शर्मा और राकेश वर्मा की रिपोर्ट...

पारंपरिक उद्योगों को बढ़ावे से बदलेगी तस्‍वीर
केन्‍द्र सरकार खुद आत्मनिर्भर पैकेज में देशभर में 10 हजार छोटी फूड प्रोसेसिंग इकाइयों की स्थापना में आधारभूत संरचना के लिए मदद कर रही है। इन इकाइयों को पूंजी निवेश में भी सहायता दी जाएगी। साथ ही जिलों के पारंपरिक उद्योगों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। किसी भी उत्‍पाद के निर्यात के क्षेत्र में आ रही बाधाओं को दूर करते हुए राज्‍य की विभिन्‍न निर्यातक इकाइयों और सरकार के बीच समन्‍वय बनाकर काम किया जाएगा।

बड़ा प्‍लेटफार्म मिलेगा
केंद्र सरकार की 'एक जिला, एक उत्पाद' योजना में प्रदेश के सभी 33 जिलों के 33 प्रमुख उत्‍पादों की सूची तैयार है। अब राज्‍य सरकार सूक्ष्‍म, लघु, मध्‍यम उद्योगों की श्रेणी में रखते हुए विभिन्‍न उत्‍पादों की खासियत और संभावनाओं को देखते हुए उन्‍हें बड़ा प्‍लेटफार्म देगी। सरकार की फूड प्रोसेसिंग योजनाओं का लाभ उठाकर उद्यमी इस क्षेत्र में अपनी प्रोसेसिंग यूनिट लगाने के लिये आगे आएं तो तस्‍वीर बदल सकती है।

अनुदान का लाभ
एग्रो प्रोसेसिंग के लिए किसान आगे आएं तो एग्रो प्रोसेसिंग एंड एक्सपोर्ट पॉलिसी के तहत 2 करोड़ रुपए तक अनुदान का प्रावधान है। फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाने के लिए 1 करोड़ और एक्सपोर्ट यूनिट के लिए 1 करोड़ मिलेगा। किसान अगर प्रोसेसिंग यूनिट लगाता है तो उसे 2 करोड़ अनुदान मिलता है।

सवाईमाधोपुर: आठ सौ करोड़ का सालाना कारोबार

राजस्‍थान में सर्वाधिक 75 प्रतिशत अमरूदों की बागवानी सवाईमाधोपुर जिले में होती है। यहां के अमरूद यानी जामफल देश भर में प्रसिद्ध हैं और पेड़े के नाम से जाने जाते हैं। पिछले एक दशक से बागवानी की तस्वीर बदली है। काश्तकार परंपरागत खेती से हटकर अमरूदों की बागवानी कर रहे हैं। दस वर्ष पहले 3 हजार हैक्टेयर में अमरूदों के बगीचे थे। अब 15 हजार हैक्टयर में बागवानी होती है। अच्छी आमदनी से किसान इसमें ज्यादा रूचि ले रहे हैं।
ये उत्पाद बनाए जा सकते है...
विशेषज्ञ मानते हैं, जिले में फूड प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना कर दी जाए तो अमरूदों से प्रोसेसिंग यूनिट की मदद से जैली, आईसक्रीम, टॉफी, बर्फी और चीज आदि बनाई जा सकती है। इसकी विदेशों में काफी मांग है। फूड प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना कर दी जाए तो स्थानीय स्तर पर ही कई उत्पाद भी तैयार किए जा सकते हैं।

जिले में अमरूद खेती-एक नजर
15 हजार हैक्टेयर-कुल बगीचे
1 हजार हैक्टेयर- नए बगीचे लगेंगे
18 हजार परिवार- अमरूद खेती से जुड़े
2021 में उत्‍पादन- 1 लाख 45 हजार मीट्रिक टन
8 अरब करीब सालाना कारोबार
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फूड प्रोसेसिंग यूनिट के लाभ
5000 से अधिक लोगों को मिलेगा रोजगार
30 प्रतिशत तक कारोबार में होगा इजाफा
2000 से अधिक ट्रक व अन्य परिवहन साधन होंगे लाभांवित
120 कृषि संकाय के विद्यार्थियों को मिलेगा शोध का अवसर
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सवाईमाधोपुर जिले में अमरूदों का प्रचुर उत्पादन होने से हजारों लोगों की आजीविका जुड़ी है। फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगने से अमरूदों के कई उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं।
-चंद्रप्रकाश बड़ाया, सहायक निदेशक,
उद्यान विभाग, सवाईमाधेापुर।
केप्शन-सवाईमाधोपुर में लगे अमरूद के बगीचे।
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धौलपुर: आलू उत्पादन से 180 करोड़ का कारोबार
धौलपुर जिले में उत्तरप्रदेश की तर्ज पर आलू उत्पादन होता है। यहां के आलू की मांग चेन्नई, हैदराबाद, सूरत व कोलकाता तक है। यहां करीब नौ हजार हैक्टेयर


क्षेत्र में आलू बुवाई होती है। सालाना करीब 180 करोड़ का कारोबार होता है। संरक्षण के लिए कोल्ड स्टोरेज भी खूब बन गए हैं। यदि जिले में आलू से तैयार होने वाले उत्पाद जैसे चिप्स, स्नैक्स आदि बनाने शुरू किए जाएं तो स्‍थानीय लोगों को रोजगार देने में इसका फायदा होगा। फिलहाल जिले में इस तरह का कोई उद्योग नहीं है।

आंकड़े बताते हैं...
9 हजार हैक्टेयर में आलू पैदावार
5-6 हजार हैक्टेयर में इस वर्ष खेती, (सरसों में रुझान रहा)
12 से 15 हजार किसान जुड़े
30 कोल्ड रेस्टोज, कई नए लोगों को अनुदान के लिए तैयार किया
600 रुपए क्विंटल के भाव लगभग
180 करोड़ सालाना कारोबार

इनका कहना है...
धौलपुर जिले में आलू की बम्पर पैदवार होती है। गत दिनों कोल्ड स्टोरेज स्थापना के लिए कई लोगों को अनुदान दिया गया है। इससे किसानों का रुझान बढ़ा है। आलू से बनने वाले उत्पादों पर आधारित औद्योगिक इकाई लग जाए तो किसानों को माल बेचने में आसानी होगी और रोजगार भी बढ़ेगा।
विजय सिंह, उपनिदेशक कृषि विस्तार, धौलपुर
केप्शन- धौलपुर में तैयार की जा रही आलू की खेती।

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भरतपुर: सरसों का 10 हजार करोड़ की कारोबार
भरतपुर में सरसों की बम्पर पैदावार होने से यह प्रमुख सरसों उत्पादक जिलों में शुमार है। करीब 2 लाख 15 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में सरसों की बुवाई होती है। जिले के विकास और अर्थव्यवस्था को बढ़ाने में इसका अहम योगदान है। कृषि विभाग की मानें तो जिले में करीब दस हजार करोड़ रुपए का टर्नओवर है। सरसों पर आधारित तेल उद्योग को बढ़ाया जाए तो और विकास रफ्तार पकड़ सकता है, रोजगार के भी द्वार खुलेंगे।

आंकड़ों पर नजर
66 प्रतिशत क्षेत्र में सरसों की बुवाई
40 रुपए किसानों को आय (राष्ट्रीय आंकड़े 37.50)
40 प्रतिशत पैसा किसानों से बाजार में पहुंचता है
3 लाख 6 हजार किसान सरसों खेती से जुड़े
2 लाख 15 हजार हेक्टेयर लगभग में सरसों बुवाई
2 लाख 60 हजार इस वर्ष का बुवाई आंकड़ा
10 हजार करोड़ रुपए सरसों तेल उद्योग का प्रतिवर्ष टर्नओवर

इनका कहना है......
हमने हमेशा से ही मुद्दा उठाया है कि स्थानीय स्तर पर ही प्रोसेसिंग यूनिट बनाई जाए। पहले फूड प्रोसेसिंग सेंटर स्वीकृत भी हुआ, लेकिन खुल नहीं पाया। हालांकि सरसों मिल बड़ी संख्या में हैं। बड़ा प्लेटफार्म मिलता है तो बहुत लाभ होगा। फिलहाल दिल्‍ली पर निर्भरता है, वहां का मार्ग सुगम नहीं है।
सीताराम गुप्ता
अधिशाषी निदेशक, लुपिन फाउंडेशन
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करौली: तिल का 90 करोड़ का टर्नओवर
करौली जिले में वैसे तो बाजरा और सरसों की पैदावार प्रमुखता से होती है, लेकिन सपोटरा, नादौती इलाके में तिल्‍ली का सर्वाधिक उत्पादन होता है। जिले में पैदा होने वाली तिल्ली अन्य स्थानों पर कम ही जाती है। इस वर्ष जिले में करीब 22 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में तिल की बुवाई की गई। इसका विशेष उपयोग करौली की प्रसिद्ध गजक के निर्माण में किया जाता है। तेल के लिए भी इसका उपयोग होता है।
आकड़ों पर नजर
22 हजार हैक्टेयर जिले में उत्पादन
50 हजार किसान तिल की बुवाई से जुड़े
12 हजार टन इस वर्ष तिल्ली उत्पादन की उम्मीद
7300 रुपए प्रति क्विं. समर्थन मूल्‍य घोषित
90 करोड़ का उत्पादन इस साल होने की उम्‍मीद

इनका कहना है...
केन्द्र सरकार की एक जिला एक उत्पाद योजना में तिल्ली का चयन किया गया है। यहां पर 22 हजार हैक्टेयर में बोई जा रही है। उत्पादन बढ़ाए जाने की जरूरत है। यहां के तिल से तैयार होने वाली गजक खासी प्रसिद्ध है। तिल आधारित अन्य उद्योगों को भी बढ़ाया जाए तो स्थानीय लोगों के रोजगार में वृद्धि की उम्मीद है।
धर्म सिंह, कृषि अधिकारी,
कृषि विस्तार, करौली
केप्शन- करौली जिले में बोई तिल की फसल।


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