
NASA Mangal Mission: अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा में काम कर रहीं डॉ. अक्षता कृष्णमूर्ति मंगल ग्रह पर रोवर का संचालन करने वाली पहली भारतीय महिला बन गई हैं। वह नासा के मंगल मिशन से जुड़ी हुई हैं। मिशन के तहत नासा के वैज्ञानिक प्रयोगशाला से मंगल ग्रह के नमूने इकट्ठा करने में जुटे थे। इसी काम के लिए अक्षता ने रोवर चलाकर इतिहास रच दिया। इन नमूनों को पृथ्वी पर लाया जाएगा। साल पहले नासा के साथ काम करने का सपना लेकर अमरीका आई थी। जमीन और मंगल ग्रह पर विज्ञान और रोबोटिक ऑपरेशन की अगुवाई करने के सपने के अलावा मेरे पास कुछ नहीं था। कुछ लोगों ने कहा कि मेरे लिए यह नामुमकिन है, क्योंकि मेरे पास विदेशी वीजा है। मुझे प्लान बी तैयार रखना चाहिए या फील्ड ही बदल लेना चाहिए।' अक्षता को खुद पर भरोसा था। मस्कट इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से पीएचडी करने के बाद उनका नासा में चयन हो गया।
सपने पूरे करने के लिए खुद पर भरोसा
अक्षता का कहना है कि उन्हें नासा तक पहुंचने में कई परेशानियों का सामना करना पड़ा। कई बार लोगों की बातों ने उनका मनोबल तोड़ा, लेकिन उन्होंने तय कर लिया था कि नासा में काम करना है। मेहनत, हौसले और धुन के दम पर अब वह उस मुकाम पर हैं, जहां पहुंचने का सपना लाखों-करोड़ों लोग देखते हैं। अक्षता ने कहा, अपने सपने पूरे करने के लिए खुद पर विश्वास रखना बहुत जरूरी है।
सुनीता विलियम्स और कल्पना के रेकॉर्ड
भारतीय मूल की अमरीकी नागरिक सुनीता विलियम्स इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में छह महीने रहकर रेकॉर्ड बनाने वाली पहली महिला थीं। नासा की इस एस्ट्रोनॉट ने 9 दिसंबर, 2006 से 22 जून, 2007 के दौरान 29 घंटे 17 मिनट की चार स्पेस वॉक की थीं। इससे पहले 1997 में भारत की कल्पना चावला ने नासा के कोलंबिया स्पेस शटल में 15 दिन और 16 घंटे अंतरिक्ष में बिताए थे।
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Published on:
06 Dec 2023 09:19 am
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