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Soalr Energy: जहां नहीं निकलता 5 महीने सूरज वहां सूर्य से होगा प्रकाश और ऊर्जा का प्रबंध, बर्फ को भी प्रदूषण से बचाने में मिलेगी मदद

Save Ice in Arctic ocean region: आर्कटिक महासागर क्षेत्र में पांच महीने सूरज के दर्शन नहीं होते हैं। इसके बावजूद सरकार ने सैलानियों की जरूरतों को देखते हुए सोलर पैनल लगाए हैं। इससे बर्फ को प्रदूषण से बचाने में भी मदद मिलेगी।

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How does Arctic region get electricity: आर्कटिक महासागर में स्वालबार्ड द्वीप समूह नॉर्वे और उत्तरी ध्रुव के बीच ऐसी जगह है जहां साल में पांच महीने सूरज का प्रकाश नहीं आता। अक्टूबर मध्य से फरवरी मध्य तक धूप का नामोनिशान नहीं रहता। हालांकि बीच में दो माह सूर्य का प्रकाश क्षितिज से नीचे तक रहता है जो सिर्फ ऊंची पर्वत चोटियों तक पहुंच पाता है। ऐसे ऊंचे स्थानों पर सरकार ने 360 सौर पैनल की शृंखला लगाई है। ये पैनल सैलानियों के लिए बने बेस कैंप और रेडियो स्टेशन की 50 फीसदी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद करेंगे। नोस्र्के के तकनीकी सलाहकार मॉन्स ओले सेलेवॉल्ड का कहना है कि पहली बार आर्कटिक पर इतने बड़े पैमाने पर सौर पैनल्स लगाए गए हैं। अल्बेडो इफेक्ट (बर्फ से परावर्तित प्रकाश) भी फोटोवॉल्टिक पैनलों की ऊर्जा उत्पादन में मदद करता है। फोटोवॉल्टिक पैनल का उपयोग सीधे सूर्य के प्रकाश से बिजली उत्पादन के लिए किया जाता है।

प्रदूषण से बचाई जा सकेगी बर्फ

स्वालबार्ड में पर्यटकों की आवाजाही रहती है इसलिए बेस कैंप के साथ अन्य ऊर्जा जरूरतों के लिए डीजल से चलने वाले जनरेटर आदि का इस्तेमाल किया जाता है। इससे होने वाला प्रदूषण पर्यावरण को भारी क्षति पहुंचा रहा है। सौर पैनल्स का प्रयोग सफल हुआ तो आर्कटिक के दूसरे समुदायों के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जाएगा।

कोयले और जनरेटर का उपयोग बंद हो जाएगा

नासा के सैटेलाइट अध्ययनों से पता चला है कि गर्मियों में तापमान बढऩे से आर्कटिक की बर्फ हर दशक 12.2 फीसदी की दर से सिकुड़ रही है। यह समुद्र के स्तर और परिस्थितिक तंत्र के लिए खतरनाक है। सौर पैनल से कोयला और जनरेटर के जरिए होने वाले प्रदूषण को कम किया जा सकेगा।

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