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ISRO का अगला मिशन दो महीने में

ISRO अध्यक्ष ए एस किरण कुमार ने कहा कि हम नवम्बर-दिसम्बर में अगले पीएसएलवी प्रक्षेपण की तैयारी कर रहे हैं।

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Jameel Ahmed Khan

Sep 23, 2017

ISRO

बेंगलूरु. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) अगले मिशन की तैयारियों में जुट गया है। इसरो अध्यक्ष ए एस किरण कुमार ने कहा कि हम नवम्बर-दिसम्बर में अगले पीएसएलवी प्रक्षेपण की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले 31 अगस्त को पीएसएलवी सी-39/आईआरएनएसएस-1एच मिशन के प्रक्षेपण में मिली नाकामी की जांच कर रही समिति नतीजों पर पहुंचने के आखिरी चरण में है।


उन्होंने कहा कि प्रक्षेपण यान में कोई गड़बड़ी नहीं थी, केवल हीटशील्ड के अलग नहीं होने के कारण ही मिशन विफल हुआ। इसरो पीएसएलवी की डिजाइनिंग या कंट्रोल सिस्टम में कोई बदलाव नहीं करेगा। इस बीच इसरो के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक पीएसएलवी अपने अगले मिशन में नेविगेशन उपग्रह नहीं ले जाएगा। इसरो नेविगेशन उपग्रह से पहले अर्थ ऑब्जर्वेशन कार्टोसैट-2 श्रृंखला का एक उपग्रह भेजने की योजना बना रहा है।

अगले नौवहन उपग्रह की भी तैयारी

वहीं, भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली नाविक श्रृंखला के एक नाकाम पड़े उपग्रह का रिप्लेसमेंट भेजने की भी तैयारी हो रही है। यह आईआरएनएसएस 1 आई उपग्रह होगा। इस उपग्रह को एसेंबल करने के लिए निजी क्षेत्र के इंजीनियरों की एक टीम को इसरो प्रशिक्षित कर रहा है। हालांकि, इसरो उपग्रह केंद्र के निदेशक एम.अन्नादुरै के मुताबिक आईआरएनएसएस 1 आई उपग्रह को तैयार करने की समय सीमा मई 2018 थी और अभी कोई उसमें बदलाव नहीं हुआ है। यह उपग्रह तैयार हो जाने के बाद इसरो के अन्य प्रक्षेपण कार्यक्रमों के मुताबिक इसे समायोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसरो जल्दी ही विकल्प के तौर पर एक अन्य नेविगेशन उपग्रह आईआरएनएसएस-1 जे की मंजूरी के लिए प्रस्ताव रखेगा और मंजूरी हासिल करेगा।

3-डी प्रिंटेड मॉडल मिला मानव दिल की धड़कन का सूत्र
लंदन। वैज्ञानिकों के एक दल ने त्रिआयामी प्रिंट किया गया दिल का मॉडल विकसित किया है, जिससे शल्य चिकित्सकों को उन विशेष कोशिकाओं की जानकारी मिली है, जो हमारे दिलों में धड़कन पैदा करती हैं। इसके अलावा यह मॉडल दिल की बीमारियों के इलाज के लिए भी अभूतपूर्व विस्तृत जानकारी मुहैया कराएगा, जिससे अनमोल ऊतकों को नुकसान पहुंचाए बिना इलाज किया जा सकेगा।

इसकी मदद से दिल की प्रणाली में आई गड़बड़ी का अति सूक्ष्म स्तर पर निरीक्षण किया जा सकेगा और बेहतर इलाज किया जा सकेगा। यह हृदय से जुड़ी अन्य बीमारियों के इलाज में भी मददगार होगा, जैसे कि अनियमित धड़कन जो रक्त संचार में गड़बड़ी से जुड़ी होती है।

ब्रिटेन के लिवरपूल जॉन मूरेस यूनिवर्सिटी (एलजेएमयू) के प्रोफेसर जोनाथन जारविस का कहना है, 3-डी आंकड़ों से कार्डियक कंडक्शन प्रणाली की हृदय के बाकी हिस्से से जटिल संबंधों को समझने में आसानी होती है।

साइंटिफिक रिपोर्ट पत्रिका में प्रकाशित इस शोध-पत्र में जारविस ने लिखा है कि 3-डी प्रिंटेड मॉडल के आंकड़ों से हृदय रोग विशेषज्ञों, हृदय रोग से पीडि़त मरीजों के बीच बीमारी के बारे में चर्चा में भी मदद मिलती है।

कॉर्डियक कंडक्शन सिस्टम विद्युत तरंगों का निर्माण करती है और छोड़ती है, जो हृदय की मांसपेशियों को सिकुडऩे और फैलने के लिए उत्तेजित करती है और हृदय के विभिन्न भागों का विनियमन करती है, ताकि वे समन्वित ढंग से काम करें।

अगर इस प्रणाली में किसी प्रकार की खराबी आ जाती है और हृदय का एक हिस्सा बाकी हिस्से से तालमेल बिठाकर काम नहीं करता तो हृदय रक्त को कुशलता से पंप नहीं कर पाता और यह प्रक्रिया दिल के लिए हानिकारक होती है और उसकी कार्यप्रणाली को नुकसान होता है।