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जानकर रह जाएंगे हैरान… यहां सारे काम छोड़ होती है पांच दिनों तक होली: Video

नवाबी शासन से चली आ रही परंपरा आज भी है कायम,नमक चौराहे पर सिर्फ केसरिया रंग से खेली जाती है होली...

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सीहोर@सुनील शर्मा की रिपोर्ट...

होली का नाम सुनते ही जेहन में रंग बिरंगे रंग आंखों में घुलने लगते हैं। मौज मस्ती का ये त्योहार जिलेभर में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है, लेकिन यह जानकार हैरानी होगी कि सीहोर में रंगों का पर्व होली मनाने का सिलसिला एक दो नहीं बल्कि पूरे पांच दिनों तक चलता है। धुलेंडी से शुरू होकर रंग खेलने का सिलसिला रंगपंचमी तक जारी रहता है। नवाबी शासन काल से चली आ रही परंपरा आज भी यहां पर कायम है। शहर के नमक चौराहे पर सालों से केसरिया होली खेलने की परपंरा सी बन गई है।
होली रंग और उमंग का त्योहार है, इसके साथ आने वाली खुशियां हम भूल नहीं पाते हैं। यह भाईचारे का पर्व है जो जिंदगी में खुशियों के रंग घोल देता है। होली पर्व का पूरे जिलेवासियों को बेसब्री से इंतजार रहता है।

इसके तहत पहले दिन गेर के साथ होली का भी आनंद होलिका दहन के बाद धुलेंडी पर रंग तो होता ही है, लेकिन शहर में इस दिन पंरपरागत रूप से गैर भी निकलते हैं और गमी की होली मानकर लोग उन घरों पर जाते हैं, जिनके यहां गमी हुई हो। अलसुबह अनेक लोग होलिका दहन स्थल पर जाकर पूजा-अर्चना भी करते हैं। छोटे बच्चों को भी होलिका दहन स्थल पर ले जाया जाता है।

दूसरे दिन बरसता है जमकर रंग
होली के दूसरे दिन भाई दूज को शहर में जमकर रंग बरसता है। इस दिन जिले में और कहीं इतना रंग नहीं होता। इसलिए बाहर से आने वाले लोग कई बार धोखा खा जाते हैं और हुलियारों से बच नहीं पाते हैं। बताया गया है कि इस दिन भोपाल के नवाब हमीदउल्लाह खान सीहोर आते थे। वर्तमान कलेक्ट्रेट में पोलीटिकल ऑफिस था, वहां और पुरानी निजामत,ब्राह्मणपुरा और बारादरी में वह उपस्थित रहते थे।

तीसरे दिन आष्टा में होती है होली
होली के तीसरे दिन नवाब आष्टा पहुंचते थे और वहां बुधवारे में बैठते थे। नवाबी परंपरा आज भी यहां कायम है। आष्टा के पुराना नपाध्यक्ष भवन जहां अब चौराहा तथा किले पर जमकर होली खेली जाती है ।

चौथे दिन भी रंगों से बचना रहता है मुश्किल
रंग पर्व के चौथे दिन नवाब जावर पहुंचते थे। वहां पर पूरे उल्लास के साथ पर्व मनाया जाता था। इसके साथ जिले मेें अनेक स्थानों पर भी होली का रंग चलता है। हुरियारों के होली के रंग से बचना मुश्किल होता है।

रंग पंचमी पर सुबह से शाम तक बरसता है रंग
होली पर्व का पांचवां दिन रंग पंचमी पूरे जिले में उल्लास से मनाया जाता है। वैसे तो शहर में पांच दिन खेली जाती है, लेकिन रंग पंचमी पर नजारा ही कुछ अलग नजर आता है। शहर में रंग पंचमी जुलूस निकाला जाता है जिससे पूरा नगर रंगमय हो जाता है। इस प्रकार शहर सहित जिलेभर में पूरे पांच दिन रंग बरसता है।

ये है नवाबी होली का इतिहास
भोपाल रियासत में एक शताब्दी तक महिला शासक रहीं। बेगम नवाब सुल्तान जहां ने अपने पुत्र हमीदउल्लाह खान के पक्ष में पद त्याग दिया। उसके बाद कंपनी सरकार ने उनको भोपाल का नवाब बनाया।

तब पुरुष शासक का दौर शुरू हुआ साथ ही उनको प्रिंसेस कांउसिल का हेड बनाकर देसी रियासतों के प्रतिनिधि के रूप में लंदन भेजा गया। इसी बीच 1928 में जब वह लंदन से लौटे तो अंग्रेजों के खिलाफ जन-जागरण के संकेत मिलने लगे थे, 1935 तक सब ठीक रहा उसके बाद विवाद शुरू हो गया। इसी बीच नवाब ने होली पर शिरकत शुरू कर दी। धुलेंडी के दिन वह सीहोर, दूसरे दिन आष्टा और जावर आने लगे, तब से ही जिले में नवाबी होली की परंपरा कायम है।

नमक चौराहे पर सिर्फ केसरिया रंग
शहर के होली उत्सव समिति नमक चौराहा में होली खेलने का अलग ही अंदाज है। यहां सिर्फ केसरिया रंग से ही होली खेली जाती है। बच्चे, युवा व बुजुर्ग सिर्फ केसरिया रंग से ही होली खेलते है। बच्चों को भी केसरिया रंग देकर खोली खेलने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इस अलग अंदाज की वजह यहां दूर-दूर से युवा होली खेलने आते हैं।

इससे जुदा बुजुर्गों को भी विशेष रूप से आमंत्रित कर उन्हें न केवल सम्मानित किया जाता है, बल्कि बुजुर्गों की जोडिय़ों के रूप में होली खिलाकर पुराने जमाने की स्मृतियों को यादों को एक बार फिर से ताजा करा दिया जाता है। समिति के आनंद गांधी बताते हैं कि मोहल्ले में रहने वाले जो लोग बाहर चले गए हैं उन्हें भी आमंत्रण भेजकर केसरिया रंग से होली खेलने के लिए आमंत्रित किया जाता है।

होली पर्व को लेकर युवा-बुजुर्ग सहित बच्चों मे भी खासा उत्साह रहता है।

यह देते हैं आयोजन को मूर्त रूप
होली उत्सव समिति के सदस्य जो प्रतिवर्ष नए तरीके से होली मनाने के लिए आयोजन को मूर्त रूप देते हैं। उनमें राजेश अग्रवाल , आनंद गॉधी, आशीष पचौरी, अनिल पारे, प्रवीण अल्लु ताम्रकार, अनिल शांडिल्य, विनोद महेश्वरी, अरविन्द राठौर, नितिन अग्रवाल गोल्डी, प्रशांत बोरा शामिल हैं। होली अवसर पर बच्चों के लिए केसरिया रंग का कढ़ाव खोला जाएगा तो बड़े और युवा और बुजुर्गो को रंग, गुलाल से होली के रसीले गीतों पर सम्मान किया जाएगा।

पुराने हुरियारे और उनकी जोड़ी फिर चर्चा में
कैलाश अग्रवाल-अनिल पालीवाल, उमेश शर्मा-सत्तनारायण जयपुरिया, गिरधर अग्रवाल-मोहन अग्रवाल मुन्ना, राजेन्द्र अग्रवाल-सुभाष अग्रवाल, राजेन्द्र शर्मा -गणेश राठौर, गन्नु-दीनू, शरद मोदी-ऋषिराज शर्मा की जोड़ी के अलावा सुनील गुप्ता लल्ला, बालमुकुन्द पालीवाल, हरीश चन्द्र अग्रवाल, राजेश जैन, ब्रज शर्मा, शेखर शर्मा, दिलीप राठौर, नंदलाल राठौर, प्रदीप मिश्रा, हरी भूरा, संतोष सोनी, राजू अग्रवाल, कमल भावसार, टिण्डू उस्ताद, गोपाल, रमेश चन्द्र गुप्ता भी होली के रसिया के रूप में उपस्थित रहते हैं।