
सरकारी दफ्तर में लगे सिस्टम बने शोपीस, नागरिक लगाने में नहीं दिखा रहे दिलचस्पी
सीहोर/आष्टा। इस सप्ताह केरल में मानसून दस्तक देने की बात कही जा रही है। ऐसा हुआ तो चंद दिन बाद प्रदेश में भी इसके पहुंचने के बाद आसमान से बारिश की झड़ी शुरू हो जाएगी। इस पानी को सहेजने अफसरों की नींद अब तक नहीं खुली है। ऐसे में इस साल भी नालियों में बारिश का पानी व्यर्थ बह जाएगा।
इसके चलते आने वाले समय में फिर लोगों को वर्तमान जैसे जलसंकट का सामना करना पड़ेगा। बारिश के पानी को सहेजने रैन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को अनिवार्यता दी गई थी। इसके जरिए बारिश के पानी को जमीन में उतरकर वाटर लेवल बढ़ाना था। जिससे कि पानी की समस्या से निपटा जा सकें, लेकिन इस सिस्टम को लेकर अफसर से लेकर नागरिकों ने जमकर लापरवाही दिखाई है।
आष्टा शहर के कई दफ्तर में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगे हैं। इनमें से अधिकांश काम करने की बजाए दिखावा बनकर रह गए हैं। इनको ठीक करने की जहमत किसी ने नहीं उठाई है। इसकी बानगी उत्कृष्ट स्कूल में आसानी से देखी जा सकती है। स्कूल में लगा वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम सिवाय शोभा बढ़ाने के अलावा कुछ काम नहीं कर रहा है।
ऐसा ही कुछ अन्य विभागों के हाल है। उल्लेखनीय है कि लगातार गिरते जल स्तर को नियंत्रित करने और भूजल स्तर को बढ़ाने शासन ने भवन निर्माण की मंजूरी देने नगरीय निकाय को वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के निर्देश दिए थे।
जमा कराई जाती है राशि
मकान निर्माण परमिशन लेते समय नगर पालिका द्वारा वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने ७ हजार ५०० रुपए की राशि जमा कराती है। इस राशि को जमा कराने का उद्देश्य यही रहता है कि संबंधित मकान निर्माणकर्ता सिस्टम को प्राथमिकता के आधार पर लगाए। मकान निर्माण होने के बाद मकान मालिक को इसका प्रमाण नगर पालिका में प्रमाण सहित दिखाना पड़ता है। इसके बाद नपा जमा कराई गई राशि को वापस लौटा देती है। नगर में अभी यह स्थिति है कि जिनको बैंक से ऋण लेना होता है, वही परमिशन को लेकर आगे आते हैं। जबकि अन्य की बात की जाए तो वह बिना परमिशन के ही मकान बना लेते हैं। इसके चलते वह सिस्टम को नहीं लगा पाते हैं।
10 हजार मकान में से कुछ में सिस्टम
नपा के रिकार्ड में करीब 10 हजार मकानों की संख्या दर्ज है। इसमें देखा जाए तो कुछ ही मकानों में यह सिस्टम नजर आएगा। जबकि कई लोगों को तो यह तक पता नहीं कि आखिर हार्वेस्टिंग सिस्टम होता क्या है। जागरूकता के अभाव में वह चाहकर भी इसे नहीं लगा पाते हैं। अफसरों ने भी उनको जागरूक करने कोई कदम नहीं उठाया है। इधर सरकारी दफ्तरों में खराब पड़े सिस्टम को सुधारने की तरफ ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इसके कारण यह लगे होने के बाद भी काम नहीं कर रहे हैं। बता दे कि शहर की आबादी 60 हजार के करीब है।
क्यों जरूरी है सिस्टम
नगर, गांवों में लगातार भू जल स्तर गिर रहा है। इसका मुख्य कारण पक्का निर्माण और खनन होना है। वर्तमान में नगर के सभी वार्डो में सीसी सड़क व नालियों का पक्का निर्माण किया हो गया है। इस प्रकार गांवों में भी सड़क निर्माण कार्य किया जा रहा है, जिससे बारिश का पानी बहकर निकल जाता है। उल्लेखनीय है कि वाटर सिस्टम के तहत जमीन में से तीन से पांच फीट चौड़ा और छह से दस फीट गहरा गड्डा खोदा जाता है। जिसमें नीचे मोटे पत्थर, बीच में मध्यम आकार के पत्थर और सबसे ऊ पर छत से पानी पाइप के जरिए गड्ढे में उतार दिया जाता है। जहां से पानी छनकर जमीन में चला जाता है।
अवगत कराते हैं
नगर पालिका मकान बनाने की परमिशन लेते समय वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के लिए साढ़े सात हजार रुपए की राशि जमा कराती है। सिस्टम लगाने के बाद उसका प्रमाण दिखाने पर वापस राशि लौटा देती है। लोगों को भी सिस्टम लगाने अवगत कराया जा रहा है।
-केएल सुमन, नगर पालिका आष्टा
Published on:
25 May 2018 08:50 pm
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