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नई सोच और जिम्मेदारियों के साथ पिता की भूमिका में आया बड़ा बदलाव

21 जून को फादर्स डे मनाया जाएगा। बच्चों को स्कूल छोडऩा, उनके साथ समय बिताना होमवर्क में मदद करना और उनकी भावनाओं को समझना, ये सब अब पिता की दिनचर्या का हिस्सा बनता जा रहा है।
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सिवनी

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Ashish Kumar Mishra

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Updated: 19 Jun 2026, 10:38 AM IST

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बदलते समय के पिता- कमाने वाले से केयर गिवर तक

सिवनी. समय के साथ समाज की सोच और पारिवारिक संरचना में तेजी से बदलाव आया है। कभी केवल परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी संभालने वाले पिता आज बच्चों की परवरिश में भी बराबर की भागीदारी निभा रहे हैं। अब पिता सिर्फ ‘कमाने वाल’ नहीं, बल्कि एक संवेदनशील ‘केयर गिवर’ की भूमिका में नजर आ रहे हैं।

अब पिता की दिनचर्या का हिस्सा

पहले जहां बच्चों की देखभाल, पढ़ाई और भावनात्मक जुड़ाव को मां की जिम्मेदारी माना जाता था, वहीं आज के पिता इन सभी पहलुओं में सक्रिय रूप से शामिल हो रहे हैं। बच्चों को स्कूल छोडऩा, होमवर्क में मदद करना, उनके साथ समय बिताना और उनकी भावनाओं को समझना, ये सब अब पिता की दिनचर्या का हिस्सा बनता जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव का सकारात्मक असर बच्चों के मानसिक और भावनात्मक विकास पर पड़ रहा है। पिता के साथ मजबूत रिश्ता बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाता है और उन्हें सुरक्षित महसूस कराता है।
बदलती जीवनशैली और महिलाओं की बढ़ती भागीदारी ने भी इस परिवर्तन को गति दी है। अब जिम्मेदारियां बांटने की सोच मजबूत हो रही है, जिससे परिवार में संतुलन और सामंजस्य बढ़ रहा है। हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों में यह बदलाव धीरे-धीरे पहुंच रहा है, लेकिन इसकी शुरुआत हो चुकी है। आने वाले समय में पिता की यह नई भूमिका समाज की नई पहचान बन सकती है। हर वर्ष जून के तीसरे रविवार को फादर्स डे मनाया जाता है। इस बार 21 जून को फादर्स डे मनाया जाएगा। ‘पत्रिका’ इस विशेष दिन को लेकर जिले में रहने वाले पिता की बदलती जिंदगी से आपको परिचित करा रहा है।

एक दूसरे के सामजस्य से ही बच्चों की बेहतर परवरिश

राजपूत कॉलोनी दीपक कुमार तिवारी नगर पालिका में कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि पत्नी स्वाती तिवारी गृहिणी हैं। उनकी दो बेटियां हैं। एक पांचवीं क्लास में है और दूसरी सेकंड क्लास में। दीपक कहते हैं कि पहले और आज में काफी अंतर आ चुका है। आज पिता की जिम्मेदारी पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है। नौकरी में हर दिन नई चुनौती रहती है। इसके साथ ही घर पर बच्चों को भी प्रर्याप्त समय देना है। घर पर अगर जरूरत पड़े तो खाना भी बनाना है। इसके अलावा बच्चों को पढ़ाने एवं उन्हें स्कूल छोडऩे की भी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। बच्चों के साथ समय बिता रहे हैं और उनकी भावनाओं को समझ रहे हैं। इससे परिवार में बैलेंस बना रहता है और दोनों पर बोझ नहीं पड़ता। सबसे बड़ी बात यह है कि उनकी दोनों बेटियां पिता से ज्यादा अटैच हैं। बेटी शब्दिता एवं श्रष्टि कहती हैं कि पापा उनके हीरो हैं। उनके साथ रहने पर उन्हें एक अलग फील होता है। पापा उनके लिए सारी दुनिया हैं। पापा उनके साथ खेलते भी हैं और पढ़ाई में भी मदद करते हैं। प्यार भी करते हैं और जरूरत पडऩे पर डांटते भी हैं। दीपक की पत्नी स्वाती कहती हैं कि एक दूसरे के सामजस्य से ही बच्चों की बेहतर परवरिश हो सकती है।

पैसे कमाने के साथ परिवार को भी संभालना जिम्मेदारी
दिलबाग नगर निवासी कमलेश दुबे एसबीआई लाइफ इश्यारेंस में टेरिटरी मैनेजर हैं। वे कहते हैं कि पिता का महत्व शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है। वे हर संतान के जीवन की नींव, उनके सबसे बड़े मार्गदर्शक और एक मजबूत स्तंभ होते हैं। हालांकि पहले और अब के समय में काफी बदलाव भी आया है। अब घर के काम में भी पिता को बराबर हाथ बंटाना है। बच्चे को पढ़ाने, उनके साथ समय बिताना और उनकी भावनाओं को समझना भी पिता की बड़ी जिम्मेदारी बन गई है। इसके अलावा अगर पत्नी कामकाजी महिला हैं तो जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। कमलेश दुबे की पत्नी प्रियंका दुबे वन विभाग में कार्यरत हैं। उनकी दो बच्चे पहल दुबे एवं श्रीश दुबे पढ़ाई कर रहे हैं। कमलेश का मानना है कि सभी को समानता का अधिकार मिलना चाहिए। आज बदलती सोच की वजह से महिलाओं को भी सम्मान मिल रहा है। एक समय था जब महिलाएं घर की चारदीवारी में कैद रहती थी। बात करने के लिए भी सोचना पड़ता था। सभी का जीवन है और जीने का अधिकार है। किसी के ऊपर कोई दबाव नहीं होना चाहिए। आज पिता घर से बाहर निकलकर पैसा भी कमा रहा है और परिवार को भी संभाल रहा है।