
सिवनी. कृषक कल्याण वर्ष के अंतर्गत जिला प्रशासन एवं किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के प्रयासों से जिले में फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिल रहा है। किसानों को पारंपरिक खाद्यान्न फसलों के साथ तिलहन फसलों की ओर भी प्रेरित किया जा रहा है, जिससे उनकी आय में वृद्धि के साथ कृषि को अधिक लाभकारी बनाया जा सके। इसी क्रम में सिवनी विकासखंड के ग्राम थांवरी के किसान सतीश डहेरिया ने गेहूं फसल के साथ लगभग 2 एकड़ क्षेत्र में सूरजमुखी की फसल लगाई गई है। वहीं ग्राम थांवरी की किसान सुषमा राजेश वरकड़े ने गेहूं के साथ तिलहन फसल कुसुम को लगभग 8 एकड़ क्षेत्र में बोया गया है। इसके अलावा कांति बाई सूर्यवंशी ने भी लगभग 1.5 एकड़ क्षेत्र में सूरजमुखी की फसल लगाई है। किसानों ने बताया कि कुसुम फसल कांटेदार होने के कारण पशुओं एवं जंगली जानवरों से सुरक्षित रहती है और कम सिंचाई व कम लागत में अच्छा उत्पादन देती है। वहीं सूरजमुखी एवं कुसुम से प्राप्त तेल स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होने के साथ घरेलू उपयोग के लिए भी उपयोगी है, जिससे किसानों को खाद्य तेल के लिए बाजार पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। साथ ही किसान इन फसलों के बीज सुरक्षित रखकर आगामी वर्षों में अधिक रकबे में खेती करने के लिए अन्य किसानों को भी प्रेरित करेंगे। उल्लेखनीय है कि किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग द्वारा रबी 2025-26 में वैल्यू चेन पार्टनर कार्यक्रम के अंतर्गत किसानों को सूरजमुखी का बीज उपलब्ध कराया गया है। वहीं सुषमा वरकड़े ने पिछले वर्ष विभाग से प्राप्त कुसुम के बीज को संरक्षित कर इस वर्ष अधिक क्षेत्र में इसकी खेती की है। विभाग द्वारा इस वर्ष ग्रीष्मकालीन फसल के लिए किसानों को मूंगफली का बीज भी उपलब्ध कराया गया है, जो फसल विविधीकरण में सहायक सिद्ध होगा। उपसंचालक कृषि सुधीर कुमार धुर्वे, सहायक संचालक कृषि प्रफुल्ल घोड़ेसवार, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी जेडी नागेश एवं कृषि विस्तार अधिकारी सुनीता कुल्हाड़े ने किसानों के खेतों में पहुंचकर फसलों का अवलोकन किया एवं तकनीकी मार्गदर्शन देकर किसानों का उत्साहवर्धन किया।
Published on:
16 Mar 2026 01:40 pm
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