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नोटबंदी के 70 दिन बाद भी नकदी के लिए बैंक के बाहर सुबह पांच बजे से लग रही कतार

बैंक में कैश को लेकर परेशान हो रहे किसान
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Prashant Sahare

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Jan 17, 2017

seoni

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सिवनी/बरघाट
. नोटबंदी के 70 दिन बाद भी नकदी के लिए बैंक के बाहर सुबह पांच बजे से कतार लग रही है। अनाज बेचने वाले किसानों को कैश को लेकर बैंकों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

जिला सहकारी बैंक की शाखाओं में नोट बंदी के बाद से अब तक कैश की समस्या बरकरार है। खाताधारी किसानों को कैश नहीं मिल पा रहा है। इससे किसानों में आक्रोश पनपता जा रहा है। धान विक्रेता किसानों के करोड़ों रुपए के भुगतान की एडवाइजरी सहकारी बैंकों में आ चुकी है, लेकिन सहकारी बैंकों का खजाना खाली होने से समस्या आ रही है। परेशान किसानों ने तहसीलदार को ज्ञापन सौंप समाधान की मांग की है।

लगातार बैंक में कैश की समस्या से किसानों की परेशानी बढ़ती जा रही है। रोजाना बैंक में 500 किसान पहुंच रहे हैं। जिसमें मात्र 100 से 150 किसानों को ही राशि मिल पा रही है। आलम ये है कि किसान सुबह पांच बजे से लाइन में लग जाते हैं। राष्ट्रीयकृत बैंकों की अपनी चेस्ट ब्रांचें हैं जहां रिजर्व बैंक से कैश भेजा जाता है। इन ब्रांचों से बैंक की अन्य शाखाओं को कैश भेजा जाता है। जिला सहकारी बैंकों में कोई चेस्ट ब्रांच नहीं होती हैं। इनके राष्ट्रीयकृत बैंकों में ही करंट अकाउंट होते हैं। इसी अकाउंट के माध्यम से सहकारी बैंक लेन-देन करते हैं। नोटबंदी के बाद से राष्ट्रीयकृत बैंकों में कैश की किल्लत है। इस कारण सहकारी बैंकों में भी कैश नहीं पहुंच पा रहा है। सिवनी के जिला सहकारी बैंक से जिले के सभी सहकारी बैंक जुड़े हैं। इनमें लाखों किसानों के खाते हैं। बरघाट क्षेत्र के किसान धान बेचने के बाद भुगतान के लिए परेशान हैं।

किसानों के सब्र का बांध मंगलवार को टूट गया और उन्होंने बैंक में हंगामा कर दिया। हंगामे के बाद किसान नेता अर्जुन सिंह काकोडिय़ा बैंक पहुंचे और किसानों को समझाइश दी। कैश देने में पारदर्शिता न बरते जाने की शिकायत सहित बैंक में अधिक कैश उपलब्ध कराने की मांग को लेकर जिला सहकारी बैंक से ले तहसील कार्यालय तक सैकड़ों किसानों ने रैली निकालकर बरघाट तहसीलदार प्रीती नागेन्द्र को ज्ञापन सौंपा है।