
छपारा. जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते क्षेत्र के 200 से अधिक गांव में पेयजल संकट गहराता जा रहा है। बड़ी बात यह है कि एक के बाद एक लापरवाही अभी भी जारी है। वर्तमान में बांध से इंटकवेल तक पहुंचाने पहुंचाने के लिए कैनाल के लिए नाला बनाया जा रहा है। हालांकि इसमें भी नियमों का ध्यान नहीं रखा जा रहा है। जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। दरअसल सिवनी और केवलारी विधानसभा में सामूहिक नल जल योजना के तहत कार्य किया गया है। छपारा के गोहाना गांव में संजय सरोवर बांध में वर्ष 2018 में गांवों में पेयजल प्रदान करने के लिए इंटकवेल का निर्माण कराया गया था। इस कार्य में घोर लापरवाही बरती गई। बांध के नीचे वाले स्थान की जगह काफी ऊंचाई और बांध से दूर इंटकवेल का निर्माण कर दिया गया है। मापदंडों का ध्यान नहीं रखा गया। वहीं कुछ दिन पहले भीमगढ़ संजय सरोवर बांध से बालाघाट के लिए पानी छोड़ा गया है। इसके बाद से इंटकवेल के पास से जल स्तर काफी कम हो गया है। अब अधिकारी बांध से इंटकवेल तक नाली की खुदाई कर पानी पहुंचाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। इससे वर्तमान में इंटकवेल तक थोड़ा बहुत पानी ही पहुंच पा रहा है जो गांवों के लिए प्रर्याप्त नहीं है।
कैनाल बनाने में खानापूर्ति
बांध से इंटकवेल की दूरी अधिक होने के साथ ही कैनाल बनाने में भी खानापूर्ति की गई। परिणाम यह है कि अब फिर से कैनाल बनाने का प्रयास किया जा रहा है। जबकि इंटकवेल तक कैनाल का सही से निर्माण किया जाना चाहिए था। निर्माण कार्य में कई तकनीकी खामी है।
523 मीटर है भीमगढ़ बांध की ऊंचाई
भीमगढ़ बांध की ऊंचाई 523 मीटर है। जबकि बाढ़ का पानी 521.60 मीटर तक आता है। सिंचाई के लिए पानी 519.38 मीटर तक भरा जाता है। स्लूस गेट बैंड लेवल 506 मीटर है, जिसके बाद पानी बांध के बाहर नहीं जाता।
जबकि इंटकवेल का निर्माण 506 मीटर से अधिक ऊंचाई पर किया गया हैए जबकि पानी 503 मीटर से उठाया जाना था। इसके अलावा इंटकवेल तक पानी पहुंचाने के लिए बनाई गई नाली भी तकनीकी मानकों के अनुसार नहीं है। निर्माण के समय बरती गई इस लापरवाही का खामियाजा अब गर्मी के सीजन में 200 से अधिक ग्रामों की पेयजल व्यवस्था को प्रभावित कर रहा है।
निर्माण कंपनी कर रही सर्वे
जल स्तर कम हो जाने के बाद निर्माण कंपनी मौके पर पहुंचकर सर्वे कर रही है और इंटकवेल तक बांध से नाली खोदकर पानी लाने का प्रयास किया जा रहा है। जबकि इस योजना में सरकार के द्वारा जल जीवन मिशन योजना के तहत पेयजल प्रदाय के लिए करोड़ों रुपए खर्च किया गया है।
इनका कहना है…
बांध में सबसे नीचे वाला जो लेबल होता है उससे ढाई मीटर ऊपर पानी हमारे पास है। बांध के पानी के सबसे नीचे के लेबल से ढाई मीटर नीचे से इंटकवेल तक कैनाल बनाना था। जिससे प्रर्याप्त पानी मिल सकता था। यह कार्य कैसा हुआ इस बारे में जानकारी नहीं है। बांध में पानी की कोई कमी नहीं है।
विनोइ उइके, कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन विभाग, केवलारी
Published on:
15 Apr 2025 01:38 pm
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