
On the first day of Shradh Paksha, light incense before 12:50 in the morning
सिवनी. पितरों को खुश रखने व पितृ दोष से मुक्ति पाने वाला 15 दिवसीय पितृपक्ष शनिवार से शुरु होगा। इसका समापन 21 सितम्बर को रहेगा। पंडितों के अनुसार यह समय पूर्वजों को स्मरण करने और उनकी आत्मा की शांति के लिए समर्पित माना जाता है। इस दौरान श्रद्धा और पिंडदान के जरिए हम अपने पितरों को तर्पण करते हैं और उनकी आत्मिक तृप्ति की कामना करते हैं। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इन 15 दिनों में पूर्वज धरती पर आते हैं और अपने वंशजों का कुशलक्षेम देखते हैं। इसलिए माना जाता है कि इस समय हर क्रिया सोच-समझकर करनी चाहिए। इस समय कुछ चीजों को खरीदना वर्जित माना जाता है। कुछ मान्यताओं में यह भी कहा गया है कि यदि इन नियमों का पालन न किया जाए, तो पितरों की कृपा में बाधा आ सकती है। पितृपक्ष पितरों को खुश व संतुष्ट करने का पक्ष है। मान्यता है कि पितृपक्ष में माता-पिता व पितरों को तर्पण करने से जीवन में चल रहे पितृ दोष या कुंडली में स्थित पितृ दोष के कारण उत्पन्न या संभावित पारिवारिक, शारीरिक, मानसिक, आर्थिक परेशानियों का दोष निवारण होता है। तमाम विषमताओं से मुक्ति के लिए प्रत्येक जातक को पितृ तर्पण, पितृ दान, पितृ भोजन अवश्य कराना चाहिए। इससे पितर खुश व आनंदित होते हैं तथा उनके शुभ आशीर्वाद से सर्व सफलता प्राप्त होती है।
पितृपक्ष का यह समय न केवल पितरों को संतुष्ट करने का है, बल्कि यह जातकों के लिए जीवन में सुख-समृद्धि और शांति प्राप्त करने का भी एक महत्वपूर्ण अवसर है।
पितृपक्ष की अष्टमी तिथि को जीवित्पुत्रिका व्रत
पितृपक्ष के दौरान ही सभी पितरों की प्रसन्नता के लिए जीवित्पुत्रिका व्रत भी किया जाता है। जीवित्पुत्रिका व्रत में मातृ पक्ष के पितरों को पानी दिया जाता है। जीवित्पुत्रिका व्रत आश्विन शुक्ल पक्ष के अष्टमी तिथि को किया जाता है।
Updated on:
07 Sept 2025 09:24 pm
Published on:
07 Sept 2025 09:24 pm
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