2 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

सिर्फ माटी की मूरत बनाएंगे कलाकार

गणेशोत्सव को लेकर मूर्तिकार भगवान श्रीगणेश की मूर्तियां तैयार करने में जुटे हैं।

2 min read
Google source verification

image

Mahendra Bhagel

Aug 22, 2016

seoni

seoni


सिवनी.
पीओपी की मूर्तियों से पर्यावरण को हो रहे नुकसान पर पत्रिका द्वारा चलाए जा रहे अभियान से मूर्तिकार भी जुड़कर सिर्फ माटी की मूरत बनाने का संकल्प ले रहे हैं। पांच सितम्बर से धूमधाम से मनाया जाएगा। गणेशोत्सव को लेकर मूर्तिकार भगवान श्रीगणेश की मूर्तियां तैयार करने में जुटे हैं। इसके साथ मूर्तिकार पर्यावरण के हित को देखते हुए मिट्टी की मूर्तियां बनाने में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं। वहीं, भक्तों ने भी गणेशोत्सव की तैयारियां शुरू कर दी हैं, शहर में जगह-जगह गणेशोत्सव मनाने के लिए भव्य पंडालों के निर्माण का काम शुरू होने लगा है। जागरुकता के चलते गणेश उत्सव पर भगवान गणेश की मिट्टी की प्रतिमाओं को लेकर आकर्षित हो रहे हैं।

मूर्तिकारों के अनुसार लोग मिट्टी की बनी भगवान गणेश की मूर्तियों की मांग कर रहे है। मूर्तिकारों ने भगवान गणेश की अलग-अलग आकार की प्रतिमाएं बनाई हैं। इसके साथ उनकी शैली के साथ ही भगवान गणेश की कई तरह की पगड़ी व मुकुट वाली मूर्तियां देखने को मिलेगी साथ ही मूर्तिकारों ने मांग के अनुसार ही मूर्तियों का निर्माण किया है।

मठ मंदिर के मूर्तिकार श्याम कुशवाहा ने बताया कि हर साल की तरह इस साल भी विभिन्न शैलियों के गणेशजी की मूर्तियां बनाई गई है। मिट्टी से मूर्तियां बनाने में समय और मजदूरी भी ज्यादा लगती है। इसलिए मांग के अनुसार ही मूर्तियां बनाई जा रही हैं। मूर्तियां बनाने का काम दो माह पहले शुरू कर दिया जाता है। अब मूर्तियों की फिनिशिंग और सजावट हो रही हैं। रंग और बाकी चीजों के दामों में इजाफे के कारण मूर्तियों के दामों में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।

मूर्ति बनाने के सामान एवं शिल्पकारों की मजदूरी बढऩे से मूर्तियों के दामों में भी बीते साल की तुलना में अंतर आया है। शिल्पकारों के अनुसार महंगाई के कारण मूर्ति बनाने का कलर, बांस और मूर्तियों को सजाने की सामग्री के दाम 15 से 25 प्रतिशत तक बढ़ी है। खासकर मिट्टी की छोटी मूर्तियां बनाने में अधिक समय लगता है, जिसके चलते बड़ी की तुुलना छोटी मूर्तियों के दाम अधिक रह सकते हैं।