
सिवनी। अंग्रेज हुकूमत से आजादी की लड़ाई लड़ रहे नेताजी सुभाषचंद्र बोस और उन जैसे कई और क्रांतिकारियों को सिवनी की जेल में महीनों रखा गया था। उन आजादी के दीवानों को जिस कोठरी में बंदी रखा गया था, जहां वे रसोई पकाते थे, उस स्थान को धरोहर की तरह सिवनी में सुरक्षित रखा गया है। आजाद हिन्द फौज का गठन कर ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ देशवासियों में प्राणवायु फूंकने वाले नेताजी सुभाषचंद्र बोस की स्मृतियां सिवनी से जुड़ी हैं। ब्रिटिश हुकूमत ने 149 दिन नेताजी सुभाष को सिवनी कारागार में निरुद्ध किया था, इनकी स्मृतियां आज भी उसी स्वरूप में सुरक्षित हैं।
थाना कोतवाली के पीछे स्थित पुराने जेल भवन में देश के महान जननायकों को ब्रिटिश हुकूमत ने निरुद्ध किया था, उस भवन में अब बाल संरक्षण गृह (सुधारालय) का संचालन किया जा रहा है। जननायकों की स्मृतियाें को मूल स्वरूप में रखे जाने के पूरे प्रयास हुए, जिससे ये सभी स्मृतियां सुरक्षित हैं।
जेल रेकॉर्ड में दर्ज हैं क्रांतिकारियों का इतिहास
पुराने जेल भवन में दर्ज रेकॉर्ड के अनुसार वर्ष 1932 के जनवरी महीने की 03 तारीख को ब्रिटिश हुकूमत ने नेताजी सुभाषचंद्र बोस को सिवनी कारागार में लाया था, यहां नेताजी को 30 मई 1932 तक बंदी के रुप में रखा गया था। इस दौरान नेताजी के साथ कई और महान क्रांतिकारी भी रहे हैं, जिनमें मुख्य रुप से नेताजी के भाई शरदचंद्र बोस भी शामिल हैं। इसी कारागार में आचार्य विनोबा भावे, माधव सदाशिव गोलवलकर, शिवदास डागा, सेठ गोविंद दास व अन्य भी निरुद्ध हुए थे। इस कक्ष को स्मृति कक्ष नाम देकर आज भी उसी स्वरूप में रखा गया है। कारागार में रहने के दौरान नेताजी सुभाषचंद्र बोस द्वारा अपना भोजन स्वयं पकाया जाता था। बंदी कक्ष के ठीक सामने रसोई कक्ष है, जिसमें चूल्हे पर नेताजी प्रतिदिन अपना भोजन बनाया करते थे। इस स्थान को भी बाल सुधारालय प्रबंधन द्वारा स्मृति स्वरुप संजोकर अपने मूल स्वरुप में रखा गया है।
Published on:
23 Jan 2023 06:38 pm
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