
डस्ट से जोड़ाई करता मिस्त्री।
अखिलेश ठाकुर सिवनी. शासकीय मेडिकल कॉलेज सिवनी का भवन लगभग बनकर तैयार है। परिसर में अभी कुछ निर्माण व आवासों के फिनिशिंग का कार्य अंतिम चरण में है। इस साल से पढ़ाई शुरू होने वाली है। नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है। इन सबके बीच गेट पर खड़ा गॉर्ड परिसर में जाने वाले को रोक रहा है। अब वह ऐसा क्यों कर रहा है? इस संबंध में कोई सही जवाब नहीं दे रहा है। इन सबके बीच सवाल खड़े हो रहे है कि कॉलेज के निर्माण में कहीं अनियमितता तो नहीं बरती जा रही या परिसर में कोई अनैतिक कार्य हो रहा है, जिसे जिम्मेदार मिलकर छुपाना चाह रहे हैं।
‘पत्रिका’ की टीम जब मेडिकल कॉलेज के ग्राउण्ड रिपोर्ट के लिए पहुंची और अंदर जाने के लिए गॉर्ड को परिचय दिया तो उसने मना कर दिया। उसका कहना था कि विधायक, कलेक्टर व पीआईयू अधिकारी का जब तक कॉल नहीं आएगा तब तक जाने नहीं दिया जाएगा। उससे जब इस संबंध में अंदर मौजूद किसी जिम्मेदार से बात करने की बात कही गई तो उसने किसी को कॉल लगाया और फिर जवाब दिया कि साइड इंचार्ज ने मना किया है।
पीआईयू के अधीक्षण यंत्री/कार्यपालन यंत्री आरके जैन को कॉल किया तो उन्होंने कहा कि आप कांटे्रक्टर से बात करिए, जब उनको बताया गया कि अंदर जाने नहीं दे रहा है तो बात कैसे करें। इस पर उन्होंने कहा कि क्या इश्यू है? उनको कॉलेज के ग्राउण्ड रिपोर्ट करने व डीन से मिलने की बात बताई गई तो उन्होंने कहा कि डीन भोपाल गए हैं। अंदर कोई है नहीं फिर क्या करोगे जाकर? उनको बताया गया कि अंदर कई वाहन दिख रहे है। इसके बाद भी उन्होंने कहा कि जब डीन और अन्य नहीं है तो क्या मतलब है। उनको बताया गया कि कई लोग पदभार ग्रहण करने वाले है। इसलिए जाना है। इस पर उन्होंने दुबारा कहा कि वहां कोई नहीं है। बताया गया कि देखना है कि कितने लोग पदभार ग्रहण करने आए थे? इस पर कहा कि मैं वहां का चौकीदार थोड़े हूं।
इस संबंध में कलेक्टर क्षितिज सिंघल को कॉल किया गया तो उन्होंने मैसेज कर मीटिंग में होने की जानकारी दी। उनको पूरी जानकारी वाह्टसएप पर दी गई। इस पर उन्होंने ओके लिखकर जवाब दिया।
प्रोजेक्टर मैनेजर बोले, मैंने नहीं दिया रोकने का आदेश-
इसके बाद गॉर्ड को वाहन के पास दिख रहे लोगों से मिलकर लौटने की बात कहकर ‘पत्रिका’ टीम अंदर पहुंची। निर्माणदायी संस्था के प्रोजेक्ट मैनेजर भावेश पटेल अंदर मिले तो उनसे पूछा गया कि मीडियाकर्मी को क्यों रोक रहे हैं? अंदर कहीं कोई अनैतिक कार्य चल रहा है क्या? इस पर उन्होंने कहा कि नहीं। हमने किसी को रोकने का आदेश नहीं दिया है। गॉर्ड अपनी ड्यूटी कर रहा होगा। उनके कार्यालय के बाहर डीन डॉ. परवेज सिद्दीकी के पीए प्रवीण श्रीवास मिले। पीए व निर्माणदायी संस्था का कर्मचारी अर्पित पटेल के साथ टीम कॉलेज भवन के पास गई। पीए ने बताया कि 42 प्रध्यापक, सह प्रध्यापक व सहायक प्रध्यापक सहित 42 लोगों की नियुक्ति हो गई है। मेडिकल कॉलेज छिंदवाड़ा के डॉ. दिनेश ठाकुर आए थे। उन्होंने बात किया और चले गए। उनकी नियुक्ति कॉलेज में हुई है। बताया कि एक सप्ताह में सभी को पदभार ग्रहण करने है। अर्पित पटेल ने बातचीत के दौरान बताया कि बिना विधायक व कलेक्टर के कॉल आए हमलोग किसी को अंदर आने नहीं देते हैं।
डस्ट व काली रेत से हो रही जोड़ाई-
कॉलेज परिसर में कुछ स्थानों पर जोड़ाई का कार्य चल रहा था। जोड़ाई काली रेत व डस्ट से हो रही थी। जोड़ाई कर रहे मिस्त्री से जब इस संबंध में पूछा गया तो उसने बताया कि यह काफी मजबूत है। वहां बच्चो के साथ कुछ महिला मजदूर दिखी। उनसे जब वहां मिलने वाले सुविधाओं के बारे में पूछा गया तो वे जवाब नहीं दे पाई। परिसर में बच्चो के खेलने और दूध पिलाने के लिए कहीं कोई व्यवस्था नहीं है। सडक़ किनारे लगाए जा रहे पत्थर को भी काली रेत से बनाया जा रहा था।
महिला मजदूर जाती है शौच के लिए बाहर, अंदर का शौचालय चोक-
परिसर में कार्य कर रही एक महिला मजदूर ने ‘पत्रिका’ को बताया कि उनको शौच के लिए बाहर जाना पड़ता है। परिसर के पीछे बाहर की तरफ करीब छह फीट ऊंची टीनशेड के नीचे वे लोग रात काटते है, जहां कीड़े-मकोड़े आते रहते हैं। बताया कि दो माह पूर्व ही हमलोग आए हैं। परिसर में मिले एक गॉर्ड ने बताया कि हमलोगों को 12500 रुपए प्रति माह मिलते है। जान जोखिम में डालकर काम कर रहे है। परिसर का शौचालय चोक हो गया है। सुबह सभी लोग बाहर शौच के लिए जाते हैं। ये जानकारी यहां आने वाले अधिकारियों से लेकर काम कराने वाले निर्माणदायी संस्था को है, लेकिन कोई कुछ नहीं बोलता है।
पूर्व में तैनात पीआईयू के कार्यपालन यंत्री पकड़े गए थे रिश्वत लेते-
बीते कुछ वर्ष पूर्व लोकायुक्त की टीम ने तत्कालीन पीआईयू के कार्यपालन यंत्री मोहन डहेरिया को 50 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए दबोचा था। ऐसे में मेडिकल कॉलेज सहित जिले में जिन भवनों का निर्माण पीआईयू करा रही है। उनकी गुणवत्ता की बारीकी से जांच कराई जानी चाहिए। मेडिकल कॉलेज में प्रवेश पर जिस तरह से मीडिया के प्रवेश पर रोक लगाई गई है और वर्तमान अधीक्षण यंत्री/कार्यपालन यंत्री आरके जैन बातचीत कर रहे हैं। यह ठीक नहीं है, क्योंकि मेडिकल कॉलेज के निर्माण के लिए 300 करोड़ रुपए जो सरकार ने दिए है, वे पब्लिक के टैक्स के है। उसमें पब्लिक के बच्चे पढेंगे। ऐसे में अंदर जाने की पाबंदी अनेको सवाल खड़े कर रही है, वह भी तब जब उक्त पद पर तैनात पूर्व के एक कार्यपालन यंत्री को लोकायुक्त ने रिश्वत लेते हुए पकड़ा है। ऐसे में यह कहा जा रहा है कि मेडिकल कॉलेज के निर्माण में पारदर्शिता की अनदेखी की गई है।
मैंने कभी किसी को रोकने का आदेश नहीं दिया है। यह बात जो भी कह रहा है उसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। मैं इस संबंध में कलेक्टर के साथ ही पीआईयू के आरके जैन से बात करुंगा कि मेरा नाम कौन बदनाम कर रहा है। मैं खुद मीडियाकर्मियों को लेकर मेडिकाल कॉलेज का निरीक्षण करने जाता हूं।
- दिनेश राय मुनमुन, विधायक सिवनी विस
काली रेत धुली हुई होती है। इसलिए उससे काम करा रहे है। मजदूर बाहर शौच के लिए जाते है। इसकी जानकारी मुझे नहीं है। अंदर शौचालय चोक हो गया है। इसकी जानकारी भी मुझे नहीं है।
Published on:
26 May 2024 08:38 pm
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