
बच्ची से स्कूल में जलवाया चूल्हा, खौलती दाल गिरी, जिंदगी और मौत से जूझ रही आदिवासी मासूम
शहडोल. शहर से सटे जोधपुर गांव में संचालित आंगनबाड़ी और शासकीय स्कूल में प्रबंधन की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। स्कूल में माध्यान्ह भोजन बनाने के दौरान खौलती दाल गिरने से पांच साल की मासूम गंभीर रूप से झुलस गई। आदिवासी बैगा मासूम को इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती किया। जहां से डॉक्टरों ने नाजुक हालत को देखते हुए इलाज के लिए जबलपुर रेफर कर दिया है।
जानकारी के अनुसार, जोधपुर निवासी बैसाखू बैगा की साढ़े चार साल की बेटी सुहासनी गुरुवार को आंगनबाड़ी गई थी। आंगनबाड़ी परिसर से सटे शासकीय स्कूल में माध्यांह भोजन बन रहा था। इस दौरान सहायिका ने सुहासनी को दोबारा चूल्हा जलाने के लिए भेज दिया गया था। पिता बैसाखू के अनुसार, सुहासनी ने चूल्हा जलाने के लिए बर्तन को उठाने का प्रयास किया तभी खौलती दाल ऊपर आ गिरी। इस दौरान सुहासनी के कमर के नीचे का काफी हिस्सा झुलस गया। मासूम के चीखने पर शिक्षक और परिजन मौके पर पहुंच गए और इलाज के लिए जिला अस्पताल में गुरुवार की शाम को भर्ती कराया है। मासूम की हालत नाजुक बनी हुई है। सीएमएचओ डॉ राजेश पांडेय के अनुसार मासूम 40 प्रतिशत झुलसी है।
शिक्षक ने इलाज के लिए दिए 250 रुपए
सुहासिनी के पिता बैसाखू के अनुसार स्कूल शिक्षक रविशंकर मिश्रा ने घटना के बाद ढाई सौ रुपए देकर इलाज के लिए शहडोल भेज दिया था। आंगनबाड़ी सहायिका और शिक्षक मासूम को छोड़ चले गए थे। इसकी जानकारी भी अधिकारियों को नहीं थी। घटना के तीन दिन बाद अधिकारियों को इसकी जानकारी लगी। जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया।
40 प्रतिशत झुलसी मासूम, जबलपुर रेफर
डॉक्टर्स के अनुसार खौलती दाल में मासूम ४० प्रतिशत से ज्यादा झुलस गई थी। मासूम के कमरे से नीचे का हिस्सा काफी झुलस गया है। कलेक्टर के निर्देश के बाद प्रशासन और बैगा विकास अधिकरण की मदद से मासूम को प्राइवेट एंबुलेंस के माध्यम से प्राइवेट अस्पताल जबलपुर के लिए रेफर किया गया है। कलेक्टर ने अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है।
कलेक्टर ने भेजी टीम, एडीएम करेंगे जांच
घटना की जानकारी मिलते ही कलेक्टर अनुभा श्रीवास्तव ने तत्काल अधिकारियों की टीम जोधपुर के लिए भेजी। महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने स्कूल और आंगनबाड़ी का निरीक्षण करते हुए दस्तावेजों को जब्त किया है। उधर मामले की प्राथमिक जांच की जिम्मेदारी कलेक्टर ने एडीएम को सौंपी है। बैगा विकास अधिकरण के परियोजना प्रशासक प्रयाश कुमार प्रकाश भी ने पहुंचकर आर्थिक मदद करते हुए इलाज के लिए जबलपुर रेफर कराने में मदद की।
रजिस्टर में नाम फिर भी कहा, तीन माह से नहीं आई
घटना के बाद अधिकारी एक दूसरे के पाले में गेंद डालते नजर आए। अधिकारियों का कहना था कि सुहासनी पिछले तीन माह से आंगनबाड़ी में नहीं आ रही थी, जबकि आंगनबाड़ी के रजिस्टर में सुहासनी का नाम भी दर्ज है। अधिकारियों का कहना था कि स्कूल से सटा सुहासनी का घर है। संभवत खेलते खेलते मासूम स्कूल पहुंच गई होगी। हालांकि अधिकारियों ने परिजनों का बयान दर्ज किया है और रजिस्टर व दस्तावेजों को जांच के लिए जब्त कर लिया है।
इस तरह मामले में बरती लापरवाही
अस्पताल में डॉक्टरों ने मासूम की एमएलसी तो कर ली लेकिन पुलिस को इसकी जानकारी नहीं दी।
स्कूल आंगनबाड़ी में सिलेण्डरों से खाना बनाने के निर्देश के बाद भी चूल्हे में खाना तैयार किया जा रहा था।
जिम्मेदारों ने अधिकारियों को जानकारी न देते हुए सरकारी अस्पताल में ही छोड़कर चले गए।
अधिकारियों का कहना है कि तीन माह से आंगनबाड़ी नहीं आ रही थी, बावजूद इसके नाम दर्ज क्यों था।
एडीएम को दी है जांच : कलेक्टर
मासूम के इलाज के लिए पूरी व्यवस्था करा दी है। बेहतर इलाज के लिए जबलपुर प्राइवेट अस्पताल के लिए रेफर कराया गया है। लापरवाही हुई है, कार्रवाई होगी। प्राथमिक जांच एडीएम को दी है।
अनुभा श्रीवास्तव, कलेक्टर
दस्तावेजों को जब्त कर लिया बयान
दस्तावेजों को जब्त किया है। जानकारी मिली है कि तीन माह से नहीं आ रही थी लेकिन आंगनबाड़ी रजिस्टर में नाम दर्ज है। बयान लेकर रजिस्टर जब्त किया है। लापरवाही पर कार्रवाई की जाएगी।
राकेश खरे, महिला बाल विकास अधिकारी
बेहतर इलाज के लिए कराया रेफर
मासूम के परिजनों से मिले हैं। गांव में निरीक्षण भी किया है। रिपोर्ट कलेक्टर के समक्ष सोमवार को रखेंगे। बेहतर इलाज के लिए जबलपुर निजी अस्पताल के लिए रेफर कर दिया है।
प्रयास कुमार प्रकाश, परियोजना प्रशासक बैगा विकास अभिकरण शहडोल
Published on:
27 Aug 2018 01:35 pm
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