
शहडोल. निमोनिया और गर्म सलाखों का दंश झेलने के बाद मेडिकल कॉलेज शहडोल में जिंदगी मौत के बीच संघर्ष करते हुए तीन माह की आदिवासी मासूम बच्ची ने रविवार की सुबह दम तोड़ दिया। दागना का दर्द और निमोनिया मासूम को कोमा में ले गया था। दगना का दंश ऐसा था कि बार-बार उसे झटके आ रहे थे। खुद से सांस भी नहीं ले पा रही थी। डॉक्टर उसे वेंटिलेटर से सांस दे रहे थे। डॉक्टरों की टीम इलाज में जुटी रही लेकिन उसे नहीं बचाया जा सका।
हालत बिगड़ने पर लाए थे अस्पताल
शहडोल जिले के राजेन्द्र ग्राम के ताराडांड गांव में रहने वाली ऊषा पति मोहन सिंह की तीन महीने की मासूम बच्ची दुर्गेश्वरी को निमोनिया था। प्राथमिक इलाज न मिलने पर परिजनों ने उसे इलाज के नाम पर गर्म सलाखों से दगवा दिया था। लगातार संक्रमण बढ़ने के बाद हालत में सुधार नहीं आया तो परिजन उसे अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां से डॉक्टरों ने नाजुक हालत को देखते हुए बच्ची को मेडिकल कॉलेज शहडोल के लिए रेफर कर दिया था। मासूम की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही थी। सांस न ले पाने पर मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर उसे वेंटिलेटर में रखे थे लेकिन नहीं बचाया जा सका।
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12 दिन में 3 बच्चों की दागना के बाद मौत
पिछले 12 दिन में 3 बच्चों की दागने के बाद मौत हो चुकी है। राजेन्द्रग्राम ताराडांड की ऊषा सिंह की बेटी दुर्गेश्वरी की मौत से पहले शहडोल के पटासी गांव में एक तीन माह की बालिका की मौत 19 दिसंबर को हुई थी, उसे अनगिनत बार दाग दिया गया था। इसी तरह उमरिया के बकेली में भी एक 45 दिन की बालिका की दागने के बाद 28 दिसंबर को मौत हुई थी। इसके बावजूद प्रशासनिक प्रयास शून्य है।
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Published on:
31 Dec 2023 08:48 pm
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