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जो धर्म का नाश करता है धर्म उसका नाश कर देता है

जो धर्म का नाश करता है धर्म उसका नाश कर देता है

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जो धर्म का नाश करता है धर्म उसका नाश कर देता है

जो धर्म का नाश करता है धर्म उसका नाश कर देता है


शहडोल. महाभारत युद्ध के लिए जब अर्जुन तैयार नहीं हो रहे थे तो श्रीकृष्ण ने उन्हें तैयार करने के लिए 19000 लोग प्रमाण गीता की रचना की और इस उपदेश के उपरांत जब अर्जुन युद्ध के लिए इस बात पर तैयार होते हैं कि यह युद्ध अपने अभिमान के लिए नहीं किंतु धर्म की रक्षा के लिए किया जा रहा है। अर्जुन ने कृष्ण से पूछा कि धर्म का स्वरूप क्या है। अर्जुन को समझाते हुए कृष्ण ने बोला जो धर्म की रक्षा करता है धर्म उसकी रक्षा करता है जो धर्म का नाश करता है धर्म उसका नाश कर देता है। तो अर्जुन जी ने पूछा धर्म किसे कहते हैं कृष्ण ने इसके जवाब में कहा अहिंसा परमो धर्मा अर्थात अहिंसा ही परम धर्म है। जिसके साथ धर्म होता है उसकी ही विजय होती है। विश्व में सबसे धर्म अहिंसा होता है। यह उद्गार मुनिश्री सुव्रतसागर महाराज ने 1008 श्री पाŸवनाथ दिगंबर जैन मंदिर के पारस विद्या भवन में आयोजित चातुर्मास की सभा को संबोधित करते हुए कहे। उन्होंने कहा कि हमारे जीवन में अहिंसा का सबसे ऊपर स्थान है परंतु आज अज्ञानता के कारण हमने अहिंसा धर्म को नीचे पटक दिया है और हमारे जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में हिंसा का प्रवेश हो गया है। खान-पान से लेकर के जीवन के रहन-सहन के प्रत्येक हिस्से में हिंसा ने प्रवेश कर लिया है। जो व्यक्ति अपना जीवन जीना चाहता है जिसको अपना जीवन प्रिय है वह अहिंसा का उपासक है। संसार में प्रत्येक प्राणी को अपना जीवन प्रिय होता है अर्थात संसार का प्रत्येक प्राणी अहिंसा धर्म का उपासक है। अहिंसक व्यक्ति सभी जगह अपनी पहचान बनाने में सफल होता है। धर्म सभा में बहुत अधिक संख्या में श्रद्धालु जन उपस्थित रहे।